अपमान जनक – पुष्पा पाण्डेय

गोविन्द अब प्रशासनिक अधिकारी बन गया है। पढ़ने में ठीक-ठाक ही था फिर अनुसूचित जनजाति का कोटा उसे उच्च अधिकारी बना ही दिया। माता-पिता अपने व्यवसाय से अभी भी उसी तरह जुड़े रहे जैसे पहले थे। गाँव के शादी- व्याह में ढोलक बजाने का काम करते थे। बेटा को ये काम अपमान जनक लगता था, … Read more

मर्यादा  – अभिलाषा कक्कड़

आप सब लोग अपने घर जाये । डाक्टर साहब को कोई ज़रूरी काम आन पड़ा है इसलिए वो चले गये । आप सब को कल देखेंगे..  पिछले एक घंटे से बैंच पर बैठे सीमा और आकाश का ध्यान अचानक से चपरासी ने अपनी ओर खींचा ।आकाश और सीमा कुरुक्षेत्र से दिल्ली अपने किसी दोस्त की … Read more

ठंड बहू को भी लगती है!! – मनीषा भरतीया

इस बार ठंड कड़ाके की पड़ रही थी…..सक्रांति भी चली गयी…माही चौथ भी चली गई…. पर ठंड जाने का नाम नहीं ले रही थी…. हर बार तो सक्रांति के पश्चात ठंड एकदम से कम हो जाती है लेकिन इस बार तो ठंड ने जैसे हालत खराब करके रखी थी…. पानी में हाथ देने भर से … Read more

काश ऐसी दादी मेरे बच्चों की भी होती… – रश्मि प्रकाश

अपने बेटे को बस स्टॉप पर पहली बार छोड़ने आई निवेदिता देख रही थी वहाँ पर सब बच्चे या तो अपनी मम्मी के साथ खड़े हैं या फिर पापा के साथ पर एक लड़की किसी बुजुर्ग महिला के साथ खड़ी थी वो शायद उसकी नानी… दादी … या फिर कोई और होंगी । कुछ पुराने … Read more

आज सही मायने में मुझे बेटी मिली – संगीता त्रिपाठी

जिंदगी भर जिसकी कद्र नहीं की,” आज  न जाने क्यों उसकी यादें, मेरी आँखों में आँसू भर रहे हैं..?, “तुम सही कह रही, राधा,.। आखिर हीरे की परख जौहरी ही तो करता हैं, पर हम हीरे की परख समय बीत जाने के बाद कर पाये..।               जो बहुएँ, आपकी नौकरी तक, हमारे आगे -पीछे घूमती … Read more

 मम्मी जी! मुझे तो पीरियड्स आने वाले हैं – ज्योति आहूजा

“आरती! ओ आरती| कहां चली गई? सुनती है या नहीं?” सुलेखा जी ने बहू आरती को जोर से चिल्लाते हुए आवाज़ दी|  “पता नहीं क्या कर रही है?” इतने में आरती भागी चली आती है|  “जी मांजी, आपने बुलाया?” आरती ने कहा| “क्या कर रही थी जी की बच्ची? कब से आवाज दे रही हूं!” … Read more

मनौती – कल्पना मिश्रा

“हे प्रभु,सवा सौ का प्रसाद चढ़ाऊंगी,,पर इस बार भी उसे बेटा ही देना” वो हाथ जोड़े बार-बार प्रार्थना कर रही थीं।फिर उन्हें बेचैनी सी होने लगी तो उठकर चहलकदमी करने लगीं। “आज ग्यारह तारीख़ है।सौर की वजह से छोटी बहू के साथ कम से कम सवा महीना तो रहना ही होगा…मतलब अगले महीने के पन्द्रह … Read more

माँ बाप का अपमान कैसे सहूं – संगीता अग्रवाल 

” बहु आ गई… बहु आ गई.. ” किसी ने आवाज़ दी और नई बहु के स्वागत की तैयारी होने लगी! बहु के आगमन के साथ ही उसके साथ आये सामान को नापा तोला जाने लगा. ” बहु सोने का सेट तो बड़ा हलका बनवाया माँ ने तुम्हारी ” ये बुआ सास की आवाज़ थी! … Read more

छोटा-सा सपना – दीक्षा शर्मा

विधा – लघुकथा जब दिशा ने अपने पापा से बोला कि वो एक प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका बनना चाहती है तो उसके पापा कुछ खास खुश नहीं हुए। कारण यह था की वो दिशा को अपनी तरह रेलवे में नौकरी करवाना चाहते थे।पर दिशा को हमेशा से छोटे बच्चों के साथ समय बिताना अच्छा लगता … Read more

“दिलफेंक ननदोई जी” – कुमुद मोहन

रीमा बहुत खुश थी जब माला जी ने उसकी ननद ननदोई को उसके घर आने की सूचना दी ! “बहूजी ध्यान रखना वो सिर्फ मेहमान नहीं ‘मान’ हैं हमारे!”रीमा की सास माला जी ने  फोन कर के रीमा से कहा! तेरे ब्याह के बाद पहली बार आ रहे हैंगे ,खातिर दारी में कोई कसर ना … Read more

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