फैसला – माता प्रसाद दुबे

पोस्टमैन! शम्भु नाथ जी के घर के बाहर खड़े डाकिये ने आवाज दी। अभी आती हूं?”कहते हुए शम्भु नाथ जी की पत्नी गायत्री दरवाजा खोलते हुए बोली। गीता देवी! पोस्टमैन बोला।”हा हमारी बहू का नाम है?”गायत्री पोस्टमैन से बोली।”गीता देवी को बुलाइये?”पोस्टमैन बोला। गीता! बाहर आओ.. तुम्हारा लेटर आया है?”गायत्री जोर से बोली। गीता ने … Read more

आखिर कब तक?? – प्रियंका मुदगिल

“अभी भी समय है..अभी भी देर नहीं हुई है…अब भी अगर आप चाहो तो अपने सपने को पूरा कर सकती हो मम्मा..” 16 वर्षीय निक्की ने अपनी मां रागिनी से कहा “नहीं बेटा!सब क्या सोचेंगे…?” “सब क्या सोचेंगे ….सब क्या कहेंगे…अब तक ये सोच सोचकर आप अपना मन ,अपनी इच्छाओं को मारती आई हो मम्मा….आखिर … Read more

मर्यादा – नताशा हर्ष गुरनानी

स्नेहा कहा जा रही हो? मम्मा अदिति से मिलने जा रही हूं इस समय जाने की जरूरत नहीं स्नेहा किससे बात कर रही हो? मम्मा मानसी से  बस बहुत देर बात कर ली अब बन्द करो मोबाइल स्नेहा फ्राक के साथ लेगी पहनो हां मम्मा चलो रसोई में खाना बनाने में मेरी मदद करो राहुल … Read more

“सफरनामा” – कविता भड़ाना

चित्रा जी ने देखा उनका सामान  बेटे ने कार में रख दिया है और ड्राइविंग सीट पर बैठा उनका ही इंतजार कर रहा है, नम आंखों से उन्होंने अपने घर को नजर भर के देखा, जाने कितनी खट्टी- मीठी यादें आंखों के सामने चलचित्र की भांति चलने लगी थी। दुल्हन बनकर आई थी वो इस … Read more

मर्यादा – बीना शुक्ला

( 1 ) यह कहानी किसी धार्मिक ग्रन्थ या पौराणिक प्रसंग से  सम्बन्धित नहीं है, यह मात्र एक काल्पनिक प्रेम कहानी है जो पौराणिक पात्रों को आधार बनाकर लिखी गई है। प्यार की हर कहानी एक सी होती है और एक दूसरे से अलग भी, है ना कितनी विचित्र बात? एक इसलिये कि सबके अन्तस … Read more

कर्जदार – विनय कुमार मिश्रा

“सरिता! वो कपड़े की दुकान वाले भाई साहब ने उधार देने से मना कर दिया।कहा कि अभी शादी की खरीदारी के ही थोड़े पैसे बाकी हैं” मैंने मायूस होकर धीरे से कहा।दामाद बाबू दूसरे कमरे में थे। शादी के बाद पहली बार नीरू को लेकर आये हैं। बड़े साधारण तरीके से शादी निपटाई फिर भी … Read more

खेल खेल में -कहानी-देवेंद्र कुमार

अंजू नाराज है और उदास भी। नाराज इसलिए कि रमा ने एक सप्ताह की छुट्टी देने से साफ़ मना कर दिया और कह दिया कि कहीं और काम देख ले। अंजू की माँ गाँव में बीमार है। छुट्टी के साथ वह कुछ एडवांस भी लेना चाहती थी लेकिन अब… अब क्या करेगी अंजू। वह जल्दी … Read more

जगह बदलने से मर्यादा व संस्कार नहीं बदलते – श्रद्धा खरे 

मिश्रा जी व  दीक्षित जी पड़ोसी थे। जहां दीक्षित जी सरकारी विभाग में कार्यरत थे। वही मिश्रा जी पंडिताई करके अपना जीवन यापन कर रहे थे दोनों के परिवारों में बहुत घनिष्ठता थी । दीक्षित जी की बेटी मानसी मिश्रा जी के पास  बैठ कर वेद ज्ञान मंत्र उच्चारण आदि का पाठ करती जो उसी … Read more

नित्या को मिली अम्मा – नीरजा नामदेव

          नित्या और नमन नवविवाहित जोड़ा मध्य भारत से पहुंच गया सुदूर दक्षिण भारत के महानगर में अपनी नई गृहस्थी बसाने। नमन वहां एक कंपनी में काम करता था। वहां की संस्कृति, भाषा सब अलग थी।फिर भी धीरे-धीरे उन्हें अच्छा लगने लगा। घर व्यवस्थित करने के बाद नित्या कुछ देर के लिए बाहर निकल कर … Read more

कहां लिखा है कि नौकरी वाली लड़कियां अपनी मर्यादा भूल जाती हैं – गीतू महाजन

शालिनी सुबह से ही रसोई में लगी थी।आज उसके पति सुरेश की नंदिनी मौसी आने वाली थी।मौसी को उसके हाथ की बनी आलू की सब्ज़ी और कचौड़ियां बहुत पसंद थी।मांजी ने उसे साथ में हलवा बनाने को भी बोल दिया था तो बस.. इन्हीं सब की तैयारी में शालिनी  आज जल्दी उठकर काम निपटा रही … Read more

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