अम्मा की वापसी – नीरजा कृष्णा

वो कई दिनों से देख रहे थे…अम्मा बहुत चुप चुप सी रह रही हैं। गोलू को तो कभी कभी कुछ टोक भी देती हैं..हल्का फुल्का डाँट भी लेती हैं पर उनके और मनीषा के मामले में एकदम शान्ति।  रवि इस बात को आत्मसात नहीं कर पा रहे थे…एकदिन पत्नी से पूछ ही बैठे,”ये अम्मा को … Read more

‘ ममता ‘ – विभा गुप्ता

  ” सीमा, तुम्हारा टेस्ट पाॅज़िटीव आया है,तुम माँ बनने वाली हो।” सुनकर उसे समझ नहीं आया कि ये खुशी की बात है या दुख की।उसके अंदर एक जीव पल रहा है, इस अहसास से वह आनंदित हो रही थी तो यह सोचकर कि कोई अपनी हवस बुझाकर निशानी उसकी कोख में छोड़ गया है, उसे … Read more

टमाटर के 10 फायदे – Tomato Benefits and Side Effects in Hindi

मुझे कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की जानकारी अपने बाबू जी से विरासत में मिली है। वे आयुर्वेद विशारद की उपाधि से विभूषित थे।।  उनके ही मदद से मैंने कुछ रोगों में अनुभव सिद्ध प्रयोग किए और आशातीत सफलता मिली,, वैसे तो हम सब इसके फायदे के बारे में बखूबी जानते हैं,,पर फिर भी चलिए एक … Read more

मेरी “बहू” नहीं झेलेगी !! – मीनू झा

एक एक करके सारा पुराना समान हटाती जा रही है,पुराना फर्नीचर,पुराने बर्तन,पुराने कपड़े… मुझे तो डर है कहीं एक दिन पुरानी समझ मुझे भी बाहर ना फेंक दें मेरी बहू–सासु मां श्यामावती देवी अपनी सखी को अपनी बहू देवकी के बारे में बता रही थी धीरे धीरे। घर में जगह बना रही होगी..श्यामा…उसकी भी तो … Read more

मर्यादा रिश्तों की – कुमुद चतुर्वेदी

   महिमा का ससुराल में पहला दिन था।वह वैसे भी डरी हुई थी क्योंकि उसने सुना था कि उसकी सास बहुत कठोर अनुशासन वाली हैं।वह चुपचाप सिर पर पल्लू डाले सिर झुकाये सास के कहे अनुसार सारे रस्मोरिवाज़ निभाये जा रही थी।अब तक वह बहुत थक चुकी थी और मन ही मन चाह रही थी कि … Read more

जवाब – विनय कुमार मिश्रा

आँखों में आँसू और दिल में ढाढ़स लिए जब माँ ने उंगली आसमान की तरफ कर के टिमटिमाते तारों को दिखाया था और कहा था “वो तुम्हारे पापा हैं” मैंने मान लिया था। पापा तारों में हैं और माँ मेरे पास! ज़िन्दगी उतनी मुश्किल से नहीं कट रही थी। माँ ने तब इतना प्यार दिया … Read more

अतीत – विनय कुमार मिश्रा

“माई! सरदार जी आये हैं, तुम्हें ढूंढ रहे हैं” “कौन सरदार जी?” “वही गुरुद्वारे वाले, जो कभी कभी भंडारा रखते हैं” इतने बड़े आदमी को मुझ गरीब औरत से क्या काम आन पड़ी, या कुछ गलती हो गई हमसे। मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। “अच्छा सुन तू ये भात उतार लेना, मुन्ना … Read more

 सागर की लहर जैसा होना भी जरूरी कभी तेजी कभी शान्त•••••• – अमिता कुचया

नीता बिल्कुल हताश चुकी थी। क्योंकि हर समय घर की जिम्मेदारी के साथ  कहीं कुछ ग़लत हो जाए तो उसे ही दोषी ठहराया जाना, कहीं कुछ हो उसे ही सुनाया जाता। हर समय अपमान नहीं सह सकती थी।अब उसे लगा कि बहुत हुआ। एक दिन की बात है बहुत समय  बाद  नीता  की फोन पर … Read more

एकाकीपन…… – विनोद सिन्हा “सुदामा”

आज तुम्हें गए पूरा एक वर्ष हो गया…बस में होता तो शायद रोक लेती तुम्हें,लेकिन मैं जानती हूँ ..चाहकर भी नहीं रोक सकती थी तुम्हें…..और सच कहूँ तो कभी सोचा भी नही था कि ऐसे जाओगे तुम…साथ अपने इतना दर्द इतनी वेदना लेकर और मुझे दुनिया जहाँ का दर्द देकर… जाना अपने आप में एक … Read more

वो अनमोल खाना – ज्योति अप्रतिम

अरे सुरेश बात सुन !हेड ऑफिस से अभी अभी एक सर्कुलर आया है।हम दोनों को एक मीटिंग अटेंड करनी है भोपाल में। मैंने अपने कलीग से कहा। भोपाल में ! इतनी दूर ! कब जाना है? सुरेश ने बहुत परेशान होते हुए कहा। हाँ भाई ,तूने सही सुना है।भोपाल ही जाना है  वह भी कल … Read more

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