वो गोद ली हुई है सिर्फ इसलिए उसका तिरस्कार सही है ? – संगीता अग्रवाल 

” श्रेया…. शीना को दो ये गुड़िया क्यों रुला रही हो उसे !” मानसी अपनी बड़ी बेटी से चिल्ला कर बोली। ” पर मम्मा शीना के पास कितने सारे टॉयज हैं मेरे पास तो बस यही एक गुड़िया है।” सात साल की नन्ही मासूम सहम कर बोली। ” छोटी है वो और तुम इतनी बड़ी … Read more

प्रेम की डोर – सोनिया निशांत कुशवाहा

देखते ही देखते 30 बरस की हो चली थी वो।उसकी हमउम्र लड़कियाँ शादी करके मातृत्व का रसपान कर रही थी लेकिन सोनाली, शादी और प्यार में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी उसकी। या यूँ समझिये कि कभी कोई ऐसा मिला ही नहीं था जिसे देखकर दिल की धड़कनें तेज़ हो गई हों।स्कूल कॉलेज के दिनों … Read more

खुद के लिए जीना गुनाह है क्या? – सुषमा तिवारी

फोन की घंटी लगातार बजे जा रही है और उसके साथ ही सुमन की घबराहट, “क्या करूँ उठाऊं कि नहीं, नहीं उठाऊंगी, नहीं दे पाऊँगी अब और जवाब, क्या जाने अंजलि क्या सोच रही होगी मेरे बारे में”! ये सब सोचते हुए आंसुओं की धार बह चली और सुमन पछताने लगी अपने कृत्य पर| हाँ … Read more

तलाक हमेशा बुरा नहीं होता है’ – प्रियंका सक्सेना

पड़ोस के घर से आती रोज़ रोज़ की मार-पीट चीखने रोने की आवाज़ों से गरिमा बहुत परेशान हो चुकी थी। माॅ॑ के मना करने पर भी आज उसने पड़ोसियों का दरवाजा खटखटा दिया। गरिमा के पापा का स्थानांतरण इस शहर में हुआ है। कुछ ही दिन हुए हैं उन लोगों को इस घर में शिफ्ट … Read more

मैं अपनी बहू का तिरस्कार नहीं कर सकती –  सविता गोयल

” वाह, सुधा भाभी, तुम्हारे जैसी मां तो मैंने आज तक नहीं देखी । जिस बहू के कारण बेटा चार महीने से बिस्तर पर पड़ा है उसी बहू को इतना सर पर चढ़ा रखा है। पति खाट में पड़ा है और ये सज धजकर व्रत पूजा का ढोंग कर रही है। ,,  नैना को तैयार … Read more

स्वाभिमान का बदला – गीता वाधवानी 

मन में पश्चाताप और आंखों में आंसू लिए जय, जब 3 महीने से पागल खाने में इलाज करवा रही अपनी पत्नी सुधा से मिलने आया, तब सुधा ने उसे पहचाना ही नहीं।  सुधा सिर्फ बोलती जा रही थी। मैं हर दिन तिरस्कार सहने वाली कमीनी औरत हूं और खुद को मां बहन की गालियां दे … Read more

माता-पिता का तिरस्कार – के कामेश्वरी 

प्रभा अपनी क्लास ख़त्म करके स्टाफ़ रूम में आई थी क्योंकि नेक्स्ट उसका फ़्री पीरियड था।  बच्चे पीछे पीछे क्लास वर्क लाकर उनकी जगह पर रख कर चले गए । प्रभा थोड़ा सा पानी पीकर अपनी जगह पर आकर बैठ गई। उसकी आज सुबह से चार क्लासेस लगातार थे । अब जाकर उसे फ़ुरसत मिली … Read more

हम सफर के साथ न होने का दर्द कोई नहीं बाँट सकता है – के कामेश्वरी 

यह बात बिल्कुल ही सही है कि हम सफर के साथ न होने का दर्द कोई नहीं बाँट सकता है । हम सफर चाहे पति हो या पत्नी दोनों को ही एक दूसरे का साथ ज़रूरी होता है । किसी एक के भी न होने पर उसके दर्द की कोई सीमा नहीं होती है । … Read more

” तिरस्कार का बदला ” – डॉ. सुनील शर्मा

तिरिस्कृत और हताश, सुधाकर हाउसिंग सोसायटी से बाहर निकल कर अपनी बाईक के पास ही बैठ गया. हाथों में सर थामे तेज़ होती बारिश में वह सुबक सुबक कर रोने लगा.  गांव से शहर आकर वह एम बी ए कोर्स में किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन के लिए पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रहा था. … Read more

तिरस्कार – भगवती सक्सेना गौड़

दरवाजे पर कॉल बेल बज रही थी, जाकर रीना ने जल्दी से दरवाजा खोला।  सामने महिमा पुलिस की वर्दी पहने खड़ी थी, आई.पी.एस का बैच लगाए। आज उसको पहली बार वर्दी मे उंसकी आँखे भर आयी। रीना ने खुश होकर कहा, “वाह, तुम्हे यूँ देखकर मैं प्रसन्न हो गयी, सरप्राइज विजिट, घर मे सब ठीक … Read more

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