बहु की सहेलियां

रूपल और दिनेश की शादी हुए तीन साल बीत चुके थे. रूपल का ससुराल मारवाड़ी परिवार से था तो उनका खुद का बर्तन का व्यवसाय था. ऐसे में रूपल और उसकी देवरानी को घर में कोई काम नही होता था. घर में ज्यादातर काम करने के लिए नौकर चाकर थे. उनको बस सुबह शाम के … Read more

हैसियत

खन्ना परिवार में चार बहुएं थी. सबसे छोटी बहू रमा, उसके बाद काजल, उसके बाद तीसरे नंबर का बेटा जितेन और उसकी बीवी भानु, और चौथा और सबसे बड़ा बेटा निकेत और उसकी पत्नी माया. चारो ही दिखने में काफी खूबसूरत थी. और तीनों ही पढ़ी लिखी समझदार थी. ऐसे में खन्ना परिवार की चार … Read more

टू स्टेट

राधिका और कुशल की एक लव मैरिज शादी हुई थी. राधिका राजस्थानी परिवार से थी और वहां अपनी पत्रकारिता  की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली आई हुई थी. और कुशल का परिवार एक पंजाबी परिवार था. ऐसे में कुशल और राधिका एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और वही उनको एक दूसरे से प्यार हो … Read more

घूंघट

“देखो हम जा तो रहे है लेकिन ज्यादा दिन वहां नही रुकेंगे, और अगर रुकना भी हुआ तो मैं वापिस आ जाऊंगा तुम रुक जाना!” जियान अपनी पत्नी कामिनी से बोला. “पर जी वहां इतने सारे मेहमान होंगे और आप भी तो घर के दामाद होंगे हो तो शादी के सारे रस्मो रिवाज़ में आपका … Read more

“मां!” – आरती श्रीवास्तव

अपनी शादी के सिर्फ़ छह महीने के बाद मुझे अपनी बुआ के बेटे नैतिक भैया की शादी में जाने का मौका मिल रहा था। मेरी शादी के बाद मायके की यह पहली शादी थी जिसमें शामिल होने के लिए मैं खासी उत्साहित थी।  कुछ ही समय पश्चात् हम ट्रेन के द्वारा रांची से पटना बुआ … Read more

तारीख   –  ऊषा भारद्वाज

आज सुबह से मन्टूअपनी दादी को देख रहा था कि उसकी दादी अपने कपड़े तह करके अपने ब्रीफकेस में रख रहीं थी । अपनी जरूरत का सारा सामान धीरे-धीरे छोटी सी बैग में रखा । मंटू दादी के पास आया और उनसे पूछा – “दादी आप कहीं जा रही हो?” सावित्री देवी ने बड़ी मायूसी … Read more

मेरा गुलाब  – दीप्ति सिंह

अभी स्कूल बस आने में देर थी । आरव तैयार था बस करुणा को बालों में कंघी करनी थी। अचानक उसकी नजर बरामदे में रखे गमले के अधखिले लाल गुलाब पर गयी। उसके चेहरे पर मुस्कान के साथ एक याद भी तैर गयी। ” आप मुझे गुलाब नही देंगे क्या?” उसने अरुण से पूछा था। … Read more

प्यार की निशानी –  डा.मधु आंधीवाल

अवनी पंलग पर रखे टैडी वीयर को अपलक देख रही थी । वह उसे किसी को देकर भी उन यादों से पीछा नहीं छुटा सकती थी । ये उसकी छोटी बहन नेहा का था । इस टैडी वीयर को नेहा किसी को छूने नहीं देती थी पर अवनी को उसे छेड़ने में ही मजा आता … Read more

जाएं तो जाएं कहाँ – कमलेश राणा

 अभी कुछ दिनों पहले ईश्वर की असीम अनुकंपा से हमारे घर में पोती का अवतरण हुआ है। परंपराओं के अनुसार उसके नामकरण संस्कार के लिए मैं पंडित जी के पास गई जो शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषी भी हैं। काफी लोग अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे थे अतः मैं भी बैठ गई और समय … Read more

पहले सहेली फिर बहू बनी – गुरविंदर टूटेजा 

  नन्दिता बहुत खुश थी…क्योंकि आज भतीजें अनय का रिश्ता एक घर छोड़कर रहने वाली रूही से हो रहा था…!!!! वैसे तो घर कि खुशी में खुश थी पर वो ज्यादा खुश इसलिए थी कि पूरी कॉलोनी की प्यारी रूही दीदी जिसमें हर गुण हैं…हर उम्र से अलग ही रिश्ता बनाती है सच उसमें अलग ही … Read more

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