मां मैं तेरी ही परछाई – रश्मि पीयूष 

जब मैं बहुत छोटी थी,मां को हमेशा पढ़ते देखा । जब भी उन्हें काम से फुर्सत मिलती, उनके हाथों में कोई पत्रिका, कोई उपन्यास,या कभी और कुछ नहीं तो अख़बार ही होती। कभी कभी उन्हें लिखते हुए भी देखती । एक बार मैंने चुपके से उनकी डायरी पढ़ी। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि मेरी … Read more

अपने जिगर के टुकड़े को किसी को सौंपने से पहले सौ बार सोचिये – संगीता अग्रवाल 

पराया देश पराए लोग पर फिर भी काव्या खुश थी क्योंकि जिसके लिए इतनी दूर सात समुन्द्र पार आईं थी वो पराया नहीं था बल्कि वो तो उसका सुहाग मिहिर था। काव्या जिंदगी को भरपूर जीने वाली लड़की घर भर की लाडली काव्या। ” शालिनी काव्या के लिए एक रिश्ता आया है एनआरआई लड़का है … Read more

अन्याय – पुष्पा पाण्डेय

सरिता से फोन पर बात करने के बाद कमला चाची का मन थोड़ा हल्का हो जाता था। मन की भड़ास निकल जाती थी। इतनी बड़ी दुनिया में एक सरिता ही थी जिससे वह अपना दुख-दर्द साझा कर सकती थी। कमला सरिता की चाची थी और धीरे-धीरे वह सबकी चाची बन गयी। बड़ी मन्नतों के बाद … Read more

अन्याय न करना चाहिये न सहना चाहिये – बीना शुक्ला अवस्थी

आज करीब बीस दिन बाद नीलिमा मायके आई है। बीस दिन पहले चेन्नई जाने के चार दिन पहले माँ से मिलकर गई थी। जाने वाले दिन फोन पर बात करने का बहुत प्रयत्न किया था, परन्तु पता नहीं क्यों किसी का भी फोन लगा ही नहीं। अमर से कहा भी-” बहुत प्रयत्न कर रही हूँ, … Read more

रिटर्न गिफ्ट – अनुज सारस्वत

“मम्मा मेरा बर्थ-डे आ रहा है सब लोग आयेंगे मैं केक काटुंगी ,मुझे गिफ्ट मिलेंगे सब क्लिपिंग करेंगे येएएएएए” 5 साल की प्राक्षी ने रात को सोते हुए अनामिका से कहा “हाँ हाँ बेटा चल अब नीनी करलो कल आपका बर्थ-डे है ना जल्दी उठने है मंदिर जाना है फिर अच्छी अच्छी डिश बनेंगी।” अनामिका … Read more

भ्रम…. घर की मालकिन हो तुम…..!! – भाविनी केतन उपाध्याय 

नए घर की नेम प्लेट पर अपना नाम देखकर खुशी से झूम उठी गरिमा…. पर ये खुशी चंद सैकड़ों तक ही सीमित रही…. जैसे ही गरिमा सपनों की पंखों को बंद कर वास्तविकता की धरातल पर उसने क़दम रखा उसके सपने चूर चूर हो गए। आंखों में आसूं लिए अपने नाम पर हाथ फेरते हुए … Read more

हम नहीं चाहते … – कंचन श्रीवास्तव 

कुछ दिनों , नहीं नहीं कई सालों तक यानि यही कुल तीन चार साल तक शब्बो ने देखा ,बहू सबके लिए चाहे वो खाना हो या नाश्ता सब कुछ बराबर से परोस देती है  ‘ और ये कहकर की हम बाद में का लेंगे ‘ खुद के खाने को टाल जाती है। फिर कभी कम … Read more

नियति का न्याय – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज अपराजिता को उसके ही नाम पर लिखी पुस्तक की एक समाचार पत्र में काफी प्रशंसा पढ़ने को मिली। जिसे पढ़कर वो अपने आप को नहीं रोक पाई, उसने तुरंत अमेजन से पुस्तक को डाउनलोड किया और रात के खाने के बाद पढ़ने बैठ गई। लिखा तो उस पुस्तक को किसी अज्ञात लेखक ने था … Read more

” अन्याय में न्याय की जीत ” – गोमती सिंह

वह कुशाग्र बुद्धि की लड़की थी, अध्ययन में उसकी अत्यधिक रूचि थी।  उच्चतर माध्यमिक की पढ़ाई के समय से ही वह विज्ञान विषय पर विद्या अध्ययन कर रही थी । कक्षा बारहवीं की परीक्षा उसने 80% अंक से उत्तीर्ण किया । अब उसकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला लेने का समय आ गया था , … Read more

नफरत –  अंतरा

शहर में एक बहुत खूबसूरत ऊँची सी इमारत थी …इतनी  ऊंची के निगाह उठा कर देखो तो सर  की टोपी जमीन पर गिर जाए…. इतनी खूबसूरत कि एक बार में खूबसूरती निगाह में ना भर पाए…. जब रात में उस में रोशनी होती थी तो आंखें  चौंधिया जाती थी ।  इतनी खूबसूरती के बाद भी … Read more

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