बीते हुये लम्हें – डा. मधु आंधीवाल
दामिनी पार्क की बैंच पर आज इन नवयुवक युवतियों की टोलियों को देख रही थी । उनकी बातों से पता लगा कि आज ” रोज डे ” है। ये सब नये जमाने की पाश्चात्य संस्कृति में रंगी पीढ़ी है। दामिनी सोच रही थी। क्या हम कभी जीवन की इस आयु से नहीं गुजरे । प्यार … Read more