अन्याय – उमा वर्मा
तुम्हारे जाने की खबर मिलते तो मैं दौड़ती गई थी ।न कपड़े का होश था न सामान का।किसी तरह फ्लाइट का टिकट मिला था ।जल्दी में और कुछ उपाय भी तो नहीं था ।पहुँची तो होश खो बैठी थी ।तुम्हे जमीन पर लिटा दिया गया था ।तुम तो चिर निद्रा में लीन थी।यह मै क्या … Read more