सुकून – सीमा पण्ड्या

प्रिंसिपल साहब के कक्ष में सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर एक बैठक चल रही थी। बैठक में छात्रसंघ के पदाधिकारी, कुछ लेक्चर्स और प्रोफ़ेसर्स सम्मिलित थे। प्रिंसिपल साहब के पास एक फ़ोन आया उन्होंने कहा – “ ओह नो, बहुत ही दुखद”! सभी जिज्ञासु दृष्टि से देखने लगे वे बोले- “राजमल जी नहीं रहे”। “ओह”- सभी … Read more

इज्जत का मापदंड – संगीता त्रिपाठी

शिखा गुस्से में उबल रही थी, सारी जिंदगी बीता दी, इनलोगो की खुशी में, उसका आज ये सिला मिला.., “आप बैकवर्ड हो, पढ़ी -लिखी होकर भी इतने दकियानूसी विचार धारा… अरे मॉम दुनिया चाँद पर पहुँच गई और आप अभी तक जांति -पाति के बोझ को ढो रही हो,”बेटे की बात रह -रह कर शिखा … Read more

परवरिश – के कामेश्वरी

चित्रा एक अधेड़ महिला के साथ कॉफी हाउस में बैठी थी । ऐसा लग रहा था कि दोनों इस बात का इंतज़ार कर रही थी कि कौन बातचीत का सिलसिला पहले शुरू करेगा। अधेड़ महिला जिसका नाम सुगुणा था उन्होंने ही चुप्पी तोड़ते हुए कहा— हाँ तो तुमने अपना नाम क्या बताया था ।  चित्रा … Read more

इज्जत से – गीता वाधवानी 

जिंदगी एक पहेली है और हम सब इसका उत्तर ढूंढते ढूंढते कहीं खो जाते हैं। शायद ही किसी को इसका सही उत्तर मिल पाता है। ऐसे ही पहेली से उलझता जिंदगी के चक्रव्यूह से निकलने की कोशिश करता बिरजू एक दिहाड़ी मजदूर था। जब से होश संभाला था खुद को अकेला ही पाया था। थोड़ा … Read more

पंखों की उड़ान  – पुष्पा जोशी

आज निशा ने कई दिनों ,या यूँ कहैं ,कि कई वर्षों के बाद घर से बाहर कदम रखा था |जब से ब्याह कर आई  ,उसकी दुनियाँ इस चार दिवारी में सिमट कर रह गई  थी |उसनें अपनी खुशियाँ अपने परिवार में ढूंढी |सबकी ख्वाइशें पूरी करने में उसे सुकून मिलता |माँ(सास) की दवाइयों का,भोजन का … Read more

अनमोल रिश्ता – संगीता श्रीवास्तव

कांति का घर मौली के घर के पास ही था। उसका भी अपना खुशहाल ‌परिवार था। अपने 2 साल के बेटे और पति के साथ रहती थी। उसका पति ठेले पर खाने पीने का सामान बेचता था। दशहरे के मेले में अपना ठेला लगाया हुआ था। कांति भी बेटे के साथ गई थी।अचानक मेले में … Read more

प्रायश्चित..! – कामिनी सजल सोनी

देखो जी मैं कहे दे रही हूं बड़े भैया आ तो रहे हैं लेकिन अगर कुछ पैसों की मदद मांगे तो साफ मना कर देना मैंने सुना है कि इस बार गांव की फसल अच्छी नहीं हुई है…!! राघव के बड़े भाई सुरेंद्र जी  के आने की खबर सुनकर शीतल का मूड सुबह से ही … Read more

दृष्टिकोण – दीपा माथुर

राधेश्याम जी हाथ को पीछे किए लोन में चक्कर काटे जा रहे थे और मन ही मन बड़बड़ाने का सिलसिला जारी था। तभी उनकी पत्नी  मृदुला जी पानी का गिलास लेकर पहुंची ” ये लीजिए कम से कम कुल्ला तो कर लीजिए।” हो सकता है ट्रेन लेट हो। राधेश्याम जी ने घड़ी देखी फिर बोले … Read more

“इज्ज़त” – चंद्रमणि चौबे

पिता जी जिला कैमूर में सिविल सेवा  सर्विस से   रिटायर हो घर आ चुके हैं घर में तीन बहू, बेटे  और दो उनकी बेटियां है। काफी  खुशहाल परिवार है। मैं घर की सबसे बड़ी बहू होने के नाते मेरा उत्तरदायित्व भी बड़ा है। सासू मां के नही होने के कारण घर की इज़्ज़त हाल … Read more

ओहदा – मीनाक्षी सिंह

बीटिया आ रही  हैँ पूरे एक साल बाद ! ए रे कल्लू ,ज़रा वही गर्मागरम गुलाब जामुन दे दे एक किलो ! हाँ जी वर्मा जी ,हम जानते हैँ हमारी बीटिया को कितने पसंद हैँ ! तुम नहीं भी ले ज़ाते तो  अपने नाती को देखते ही घर भिजवा देता ! भई अब तो लोग … Read more

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