होली – मधु झा

आइये हम सभी एक मन और नेक मन से होली खेलें,,  होली अर्थात हो लें,,हम सब एक दूसरे के हो लें,,। जब भी होली आती सुहानी को ये शब्द और सुभाष की याद दिला जाती है,,। वैसे तो सुभाष को जीवन में एक पल को भी नहीं भूल सकती मगर होली के समय उसकी याद … Read more

यहां डरने से नहीं डटने से काम चलता है –  सविता गोयल

“क्या हुआ सपना, इतनी अपसेट क्यों लग रही हो?,,  अपनी पत्नी को उदास देखकर रोहित ने पूछा   ।     “कुछ नहीं सोंच रही हूँ ये जाॅब छोड़ दूं  । ,,      “क्यों क्या हो गया  ? कितनी मेहनत से तुम्हें ये जाॅब मिली है । आफिस भी ज्यादा दूर नहीं है । फिर क्यों छोड़ना चाहती … Read more

इन्हें भी इज़्ज़त से जीने दो… – रश्मि प्रकाश 

“ लो आ गई महारानी… जग हंसाई करवा कर.. पूरे मोहल्ले में हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला कर रख दिया है इसने.. जब देखो तब बसइसकी शिकायतें सुनने को मिलती हैं … घर में बैठ कर पल भर ना रह सकती ।” अपने कमरे से दादी सुनंदा जी की आवाज़ सुन बारहसाल की दीया राशि … Read more

भक्ति का शोषण – लतिका श्रीवास्तव 

सुनंदा ने सुबह सुबह जैसे ही दरवाजा खोला …अचानक पैर किसी चीज से टकराया …नीचे देखा तो जमीन पर एक नारियल लाल सिंदूर,कुछ चावल के दाने, काला तिल लाल रंगव का कपड़ा और कुछ लाल फूल बिखरे थे…ये क्या है पड़ा है जमीन पर…लगता है किसी का पूजा का सामान जल्दी जल्दी में गिर गया … Read more

गति और यति – कमलेश राणा

कल रात बेटी स्वाति अपनी सहकर्मी बुलबुल की बर्थडे पार्टी में गई वह उसकी बहुत अच्छी मित्र भी है साथ में स्टाफ के और लोग भी थे। वापस आते आते रात के 10 बज गये। आते ही स्वाति सीधे अपने कमरे में चली गई मुझे कुछ अजीब सा लगा क्योंकि उसकी आदत है कि कहीं … Read more

” भुखली” – उमा वर्मा

अम्मा बहुत बीमार रहने लगी थी ।उनको देखने के लिए मै अपने बेटे बहू के साथ जा रही थी ।करीब दस किलोमीटर दूर वे बेटे बहू के साथ रहती थी ।वैसे तो हमेशा उनसे मिलने हमलोग जाते रहते थे ।लेकिन दो दिन से तबियत कुछ अधिक ही खराब थी तो जाना जरूरी हो गया ।थोड़ी … Read more

मर्यादा क्या सिर्फ स्त्री की – ऋतु अग्रवाल

“शोभित! क्या बात है? तबीयत तो ठीक है ना तुम्हारी। तुम तीन दिनों से ऑफिस भी नहीं जा रहे। चलो, डॉक्टर को दिखा लेते हैं।” मुग्धा ने शोभित के माथे को छूते हुए कहा।         “नहीं! नहीं! मैं ठीक हूँ। तबीयत ठीक है मेरी, बस मन सा नहीं कर रहा कहीं जाने का।” शोभित अन्यमनस्क सा … Read more

कुंडली भाग्य – कमलेश राणा

हाय माधुरी, क्या बात है? आजकल तो ईद का चाँद हो गई हो, नजर ही नहीं आती।  क्या बताऊँ यार ! गृहस्थी की जिम्मेदारियों से फुर्सत ही नहीं मिलती। मैं तुम्हारे जैसी भाग्यशाली कहाँ हूँ। तुम्हारी तो बहुओं ने सारी जिम्मेदारी उठा ली है। मजे तो बस तुम्हारे ही हैं, सातों सुख भोग रही हो  … Read more

मां का अक्स – डा. मधु आंधीवाल

दीपा किस मनोदशा से गुजर रही थी कोई नहीं समझ पा रहा था । पूरी जिन्दगी औरत क्या दूसरों के लिये ही जीती है। अपनी शायद कोई इच्छा कोई भावना नहीं होती । अजय से जब शादी होकर इस घर में आई तब वह केवल 17 साल की थी । घर में दो देवर दो … Read more

“अपग्रेडिंग बुढ़ापा” (एक कदम साहस भरा) – कविता भड़ाना

क्या???? ये क्या सुन रहे है हम मां… क्या कह रही हो आप?? ऐसा भी कही होता है क्या… रेवती जी की बात सुनने के बाद दोनों बेटों और बहुओं के मुंह आश्चर्य से खुले रह गए…  क्यों बच्चो ऐसी क्या अनोखी बात कह दी मैने जो तुम लोग इतना हैरान हो रहे हों… आज … Read more

error: Content is protected !!