सोच का दायरा – अंजना ठाकुर : Short Stories in Hindi
मांजी आज ये अभी तक नही आए और फोन भी नही लग रहा निकिता की निगाहे दरवाजे पर लगी थी अमर अभी तक आया नही था वैसे आठ नौ बजे तक आ जाता है आज दस बज चुके थे चिंता मैं निकिता अंदर बाहर हो रही थी निर्मलाजी बोली चिंता मत कर कही फस गया … Read more