बाबूजी – पूजा मनोज अग्रवाल

अरे साहब चलो ना  ! ,,, मेरा  रिक्शा खाली है ,,,मैं ले चलूंगा आपको ,,।  नहीं भाई नहीं ,,,! तुम्हारे हाथ में चोट लगी है , और मुझे समय पर पहुंचना है,, तुम रिक्शा धीरे चलाओगे तो मुझे देरी हो जाएगी । बाबूजी ,,, मैं आपसे विनती करता हूं  ,,,आप मेरी रिक्शा में बैठ जाइए … Read more

प्यार से बंधी रिश्तों की डोर” – कविता भड़ाना

“हाय कितनी गर्मी हो रही है” पसीने को पोंछती हुई माही बड़बड़ाते हुए बोली…दोपहर के 2 बजे अप्रैल माह की चिलचिलाती गर्मी में माही अपनी 10वर्षीय बेटी परी को लेने घर से थोड़ी दूर बस स्टॉप पर आई थी, उसके जैसे और भी कई पैरेंट्स अपने अपने बच्चों को लेने आए थे, गर्मी से सबका … Read more

दर्द – गीता वाधवानी

अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी मृदुल स्वभाव वाली संध्या को कहीं ना कहीं यह आभास था कि उसका जीवन अब शेष नहीं है।  बिस्तर पर पड़े पड़े, उसे कुछ दिन पूर्व की बात स्मरण हो आई, जिस दिन उसके पति से उसकी छोटी सी बात पर कुछ कहासुनी हो गई थी और वह गुस्से में … Read more

माँ – कमलेश राणा

क्यों आज इतनी जल्दी खाना क्यों बन रहा है शुभा। वो क्या है न माँ निधि के घर टी वी आया है तो उसने मुझे बुलाया है चित्रहार देखने इसीलिए जल्दी जल्दी काम निपटा रही हूँ वैसे आप भी चलो न इन दिनों उसकी दादी आई हुई हैं गांव से उनसे भी मिलना हो जायेगा। … Read more

दूर के ढोल सुहाने होते हैं – के कामेश्वरी

वेंकट लिफ़्ट में चढ़े देखा कि सेकंड फ़्लोर में रहने वाले जीवन जी अंदर हैं दोनों ने एक दूसरे को हेलो कहा ।  जीवन ने कहा— वेंकट जी आपका बेटा कैसा है कहाँ रहता है ।  वेंकट ने कहा कि— जीवन जी वह तो ठीक है और हमारे साथ ही रहता है ।  ग्राउंड फ़्लोर … Read more

 शिवन्या – मीनाक्षी सिंह

कहानी नंबर 1 गांव में चारों तरफ पापड़ ,गुजिया ,मठरी विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनना शुरू हो गए थे ! न्नही शिवन्या  का भी मन ललचा रहा था ! दौड़ती हुई अपनी अम्मा (माँ ) के पास आयी और बोली – अम्मा ,तुम पापड़ और गुजिया क्यूँ नहीं बनाती कभी ! ना ही नये कपड़े … Read more

दस्तक – अभिलाषा कक्कड़

हर रोज़ की तरह आज भी जब केतकी प्रात का स्नान करके जैसे ही बाथरूम से बाहर निकलने लगी अचानक से पैर अपने ही लापरवाही से गिराये एक छोटे से साबुन पर आ पड़ा । अचानक से शरीर का सन्तुलन बिगड़ गया, झटके से पैर फिसला और हादसे ने सम्भलने का मौक़ा भी नहीं दिया … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी  –  उमा वर्मा 

मेरा बेटा बंटी आजकल कुछ खोया खोया सा रहता है ।एक दम चुप सा हो गया है ।मुझे बहुत चिंता हुई आखिर क्या बात है? बहुत पूछने पर बताया कि किंजल बहुत अच्छी है मम्मी ।मुझे उसकी बहुत चिंता होती है ।” कौन किंजल?” किसकी बात कर रहा है तू? मेरे आफिस में है।मेरी सीनियर … Read more

गोद लेने की सजा  –  के कामेश्वरी

मोहन और अपर्णा की शादी हुए दस साल हो गए थे लेकिन उनके बच्चे नहीं हुए थे। उन दोनों ने मिलकर कई डॉक्टरों के चक्कर काटे परंतु कोई फ़ायदा नहीं हुआ तब दोनों ने मिलकर यह फ़ैसला किया था कि वे एक बच्ची को गोद लेंगे । मोहन को लड़कियाँ पसंद थी इसलिए उनके घर … Read more

‘ पहल तो करें ‘ – विभा गुप्ता

   ” ये तू क्या कह रही नैना, विधवा का विवाह!जगहँसाई करानी है क्या? पिछली होली पर तुम लोगों ने उस पर रंग डाला,मैंने कुछ नहीं कहा,पर अब शादी..।हर्गिज़ नहीं।” अयोध्या बाबू तीखे स्वर में अपनी बेटी से बोलें तो नैना ने कहा, ” लेकिन पापा इसमें हर्ज़ ही क्या है? आखिर भाभी की अभी उम्र … Read more

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