विश्वासघात – बिमला रावत जड़धारी
राधिका जी शाम की चाय पी रही थी कि तभी गेट की घंटी बजी, देखा तो श्यामा जी थी। राधिका जी ने श्यामा जी का बडे गर्मजोशी से स्वागत किया। करती भी क्यों नहीं, दोनों की दोस्ती पचास साल पुरानी थी। राधिका जी ने श्यामा जी से कहा, ‘तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय बना … Read more