अलौकिक शक्ति – सुषमा यादव

मेरा हरिद्वार शांति कुंज के गुरु श्री राम शर्मा आचार्य जी पर अगाध श्रद्धा है। मैंने उन्हें देखा नहीं था,,जब मैं अपने पिता जी, और अपनी मां के साथ गई थी तो परम वंदनीय माता जी से ही गुरु दीक्षा ली थी,उस समय गुरु जी किसी अज्ञात स्थान में गायत्री मां की आराधना में लगे … Read more

जी भर के रो भी ना पाये, जिम्मेदारियां निभाने में, – सुषमा यादव

 इंदौर के अपोलो अस्पताल में वेंटिलेटर पर लेटे हुए राज ने अपनी पत्नी मीनू को बेबसी और लाचारी भरी डबडबाई आंखों से देखा, वो कुछ कहना चाहते थे,पर कह नहीं सके,मीनू यानि मैं उनका आशय समझ गई, मैंने उनका हाथ अपने हाथों में लेकर उन्हें विश्वास दिलाया कि जो आप कहना चाहते हैं, मैं समझ … Read more

अपना हिस्सा – ऋतु गुप्ता

 शरद ने अपनी पत्नी शुभी से कहा यह तुम क्या कह रही हो कि मैं गांव जाकर बाबूजी से मकान व दुकान में अपने हिस्से की बात करूं, उनसे कहूं कि यह घर मेरा भी है,क्योंकि कानूनन मेरा भी हक बनता है कि मैं भी अपने भाई के साथ बराबर का हिस्सेदार हूं,उस घर व … Read more

अब टिकेट कैंसिल नहीं कराऊंगा – मीनाक्षी सिंह

बिन्दू मैने टिकेट करा ली हैँ ,अब कोई भी काम आ जायें ,मैं जाकर रहूँगा ,अबकी बार कैंसिल नहीं कराऊंगा ! 65 वर्षीय राकेशजी पूरे जोश में बोले ! तुम सुन रही हो कि नहीं बिन्दू ,छोड़ों ये कपड़े तह करना ! हाँ हाँ ,सुन रही हूँ ! बहरी नहीं हूँ ! कहाँ की टिकेट … Read more

मोक्ष धाम – नरेश वर्मा

शकुंतला देवी की गर्दन उस मुर्ग़े की गर्दन की तरह तनी रहती जिसके हरम में कई सारी मुर्ग़ियाँ हों। शकुंतला देवी की तनी गर्दन का राज उनके अपने पाँच चूज़ों से जुड़ा था।शकुंतला देवी के पति धर्म दास रेलवे दफ़्तर में बड़े बाबू थे।वह रेलवे की लेट चलने वाली ट्रेनों का हिसाब अपने रजिस्टरों में … Read more

मैं हूँ ना –  विभा गुप्ता

 ” भईया, रुनझुन की शादी कैसे होगी?लड़के वालों की डिमांड तो कुछ भी नहीं है, फिर भी खाली हाथ बेटी को कैसे विदा कर दूॅं।जेठ जी ने तो पल्ला झाड़ लिया है।रुनझुन के पापा रहते तो मुझे कोई चिंता ही नहीं रहती लेकिन….।” कहते हुए देवकी रोने लगी तो नारायण बाबू बहन के कंधों पर … Read more

“थप्पड़ की गूंज ” – कविता भड़ाना

“सुमन बाहर निकल” डर मत तु, देख ये में हूं स्वाति… मैं हूं तेरे साथ , तू दरवाजा तो खोल…स्वाति ने बाथरूम का दरवाजा जोर जोर से खटखटाते हुए तेज आवाज में कहा.. डरी सहमी सुमन ने बाथरूम का दरवाजा खोला और बाहर अपनी प्रिय सहेली को देख,  उसके गले लगकर रोने लगी.. स्वाति ने … Read more

जिम्मेदारी – डाॅ संजु झा

कुछ समय पहले  अचानक  से पूरे विश्व  में कोरोना नामक महामारी का तांडव  मच गया था।कोरोना ने बहुत-से परिवारों के सुखद भविष्य  को दुख के अथाह सागर में डुबो दिया।ऐसे समय  में सबसे कठिन  परीक्षा डाक्टरों की थी,जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन करते हुए  अपने कर्त्तव्य  को सबसे ऊपर रखा।कितने ही डाॅक्टरोंने अपने फर्ज  निभाते … Read more

हमसफ़र – आरती झा आद्या

श्रमजीवी एक्स्प्रेस ट्रेन दिल्ली से पटना जा रहे मलय के कोच में बनारस स्टेशन पर आधी रात में चढ़ने वाली महिला के बर्थ पर बैठते ही उसकी हैलो की आवाज सुन झटका लगा… सलोनी…। उसने बोलने वाली के चेहरे को देखना चाहा.. लेकिन चेहरा दूसरी ओर घूमे होने के कारण देख नहीं पा रहा था। … Read more

एक निर्णय ऐसा भी  – पूनम अरोड़ा

“आज सौजन्य  आ रहा है” —— प्रोफेसर गरिमा को उसके आने का इंतज़ार तो था ही, साथ ही इस बात की व्यग्रता भी कम नहीं  थी कि  वह उसके समक्ष अपने जीवन के इस नए अध्याय को कैसे अनावृत करेगी ——- जानने के बाद उसकी प्रतिक्रिया कैसी होगी—–  सबसे ज्यादा  महत्वपूर्ण  कि उसका निर्णय  क्या … Read more

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