एक फैसला – संगीता अग्रवाल
दिवाकर जी अपने घर के बरामदे मे बैठे वहाँ लगे आम के पेड़ो को देख रहे थे उनकी आँखे भरी हुई थी । एक अटूट रिश्ता था इस पेड़ो से और अब दोनो बेटे और एक बेटी घर का बंटवारा चाहते थे और ये पेड़ उस बंटवारे मे रोड़ा बन रहे थे तो तीनो बच्चे … Read more