एक जिम्मेदारी यह भी  –  पूजा मनोज अग्रवाल

भाभी,,,!! जल्दी से नीचे आइए,,,देखिए ये क्या हो गया ,,,!! एकाएक देवर जी और देवरानी की आवाज सुन कर मेरा मन घबराया और मैं दौड़ कर सीढ़ियों से नीचे वाले फ्लोर पर आई ।  अमावस का दिन था तो उस दिन घर पर वैसे ही बहुत काम था तो सासू मां ,में और मेरी देवरानी … Read more

सपनों के इन्द्रधनुष – डॉ पुष्पा सक्सेना

  उस पहाड़ी कस्बे में पापा की नियुक्ति होते ही आस-पास के बंगले वाले स्वागत-सत्कार में जुट गए थे। रोज ही नई सौगातों, पार्टियों का तांता लग गया था। छोटी जगहों में पुलिस अधिकारी का दबदबा ज़रा अधिक ही होता है। पापा को जो कोठी मिली थी उसके बाई ओर मानिकराम की लांड्री थी। पूरे कस्बे … Read more

 ईमानदार कोशिश – लतिका श्रीवास्तव

आज फिर भोजन कक्ष में हंगामा बरपा था…भोजन से भरी थालियां जमीन पर औंधी पड़ीं थीं  दाल से भरे गंज में तिलचट्टे तैर रहे थे सब्जी से दीवाल पर चित्रकारी की गई थी   और रोटियां तो टेबल मैट बन गई थीं…..मृदुला जी जब तक वहां पहुंचीं खाना पकाने वाले त्रस्त होकर भाग चुके थे … Read more

ये कैसी जिम्मेदारी है… – संगीता त्रिपाठी

“जिम्मेदारी..”ये शब्द अपने में अनेक भार लिये हुये है, कुछ हँस कर निभाते है कुछ मज़बूरी में निभाते है..। किसी को समय पर जिम्मेदारी मिलती है तो किसी को असमय….।      जिम्मेदारी से मुझे अपने पड़ोस में रहने वाली सुषमा दीदी याद आ गई…। एक सुबह जब मेरी ऑंखें खुली तो सामने के घर में ट्रक … Read more

ज़िम्मेदारी नहीं फ़र्ज़ है। – रश्मि सिंह

रागिनी-पापा कितना टाइम और लगेगा, हमनें सब तैयारियाँ कर ली है, और पापा, नानी भी हमारे साथ अभी चलेंगी। शेखर (रागिनी के पापा)-बेटा आवाज़ नहीं आ रही है, कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम है, बस एक घंटे में पहुँचने वाला हूँ। रागिनी- ठीक है पापा जल्दी आइए साथ में ख़ाना खाएँगे। ये है रागिनी, शेखर और उमा … Read more

एक बदलाव – रीमा महेन्द्र ठाकुर

प्रगति  प्रगति,””””  दरवाजे पर कबसे दस्तक दे रही थी अणिमा “ ये कौन  सुबह सुबह दरवाजा पीट रहा है” नीदं मे खलल होने से” मन ही मन बडबडायी प्रगति “ प्रगति  प्रगति “” ये पक्का अणिमा होगी “गजब की लडकी है” संस्कारों की देवी “अपने बालो को पोनी मे तब्दीली करती हुई  प्रगति बेड से … Read more

दो सहेलियां  – गीता वाधवानी

नीतू और गीतू दोनों पक्की सहेलियां, मानो दो जिस्म एक जान। एक ही मोहल्ले में आसपास दोनों के घर। नर्सरी से कॉलेज तक एक साथ पढ़ाई की। जब शादी की उम्र हुई, तब दोनों को यह चिंता सताने लगी कि कहीं हम बिछड़ ना जाएं। दोनों ने एक दूसरे को वचन दिया कि हम दोनों … Read more

ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बड़े भाई की है – के कामेश्वरी

फोन की घंटी बज रही थी । सुषमा रसोई में खाना बनाने में लगी थी क्योंकि सबको टिफ़िन बॉक्स देना था । देव नहाने गए थे । बच्चे दोनों भी कॉलेज के लिए तैयार हो रहे थे ।  अपने कमरे में से सास चिल्ला रही थी कि कोई तो फ़ोन उठाओ । वह बार बार … Read more

हाँ हम भी इंसान हैं – स्नेह ज्योति

सैम स्कॉट लैंड मैं अपने परिवार के साथ एक खुशहाल जीवन जी रहा था । तभी खबर आयी कि एक हादसे में सैम की माँ और पिता का निधन हो गया है । सैम की दुनिया वीरान और बेरंग हो गयी…..खुद को सम्भालने के लिए उसने पढ़ाई में अपने आपको व्यस्त कर लिया ।अब उसका … Read more

उसके हिस्से का पुरूष – डॉ पुष्पा सक्सेना

”सुप्रिया आई है………….।“ गूँज बनकर बात पूरे आफिस में फैल गई थीं। सभी उसे देखने, उससे बात करने को उत्सुक थे। अधिकांश के हृदय में भारी उत्कंठा थी- देखें उसकी प्रतिक्रिया क्या है? पत्नी की तरह ढाढ़ें मारके रोएगी, प्रेमिका की तरह रूमाल में सिसकी पोंछेगी या स्तब्ध रह जाएगी। सुप्रिया और मानस का प्रेम … Read more

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