सौतेली माँ – पूनम अरोड़ा

आरव जब छैः वर्ष का था तो दुर्भाग्यवश  उसकी माँ  का देहांत  हो गया। वह छोटा था किन्तु  माँ  के विछोह का दर्द  उसमें  उन सबसे कहीं  ज्यादा था जो उसकी माँ  के लिए शोक व्यक्त  करते थे। वे शोक  करने से अधिक उसके लिए अधिक संवेदना  प्रकट करते थे। “अब इस बेचारे  का क्या … Read more

माफी – नीलिमा सिंघल

शिल्पा के पति को गुजरे दो ही महीने हुए थे। लेकिन दो महीने में ही उसके बेटा और बहू का उसके प्रति रवैया एकदम बदल गया था। पहले जो बेटा-बहू मम्मी-मम्मी कहते नहीं थकते थे, हर बात में उसकी राय लेते थे, उसका ख्याल रखते थे, पति के जाने के बाद उन्हीं बेटा-बहू के लिए … Read more

खामोशी –  नीलिमा सिंघल

लगभग 12/13 वर्षों के बाद गांव लौटा था। कुछ खास बदलाव नहीं था। हां,कुछ पक्के मकान अवश्य बन गए थे। बाजार जो पहले छोटा हुआ करता था,अब थोड़ा बड़ा हो गया है। हमारी पुरानी हवेली नुमा घर की शक्ल थोड़ी बदली बदली सी लग रही थी। परिवार के लोगों के चेहरों में कुछ कुछ परिवर्तन … Read more

माफ़ी गलती की होती है गुनाह की नही – संगीता

निकिता अपने कमरे मे गुमसुम उदास सी बैठी थी और अपने गुजरे दिनों के बारे मे सोच रही थी। कहने को निकिता ने जो जिंदगी से चाहा वो उसे मिला पर आज उसका दामन बिल्कुल खाली था । आज उसे खुद पर अफ़सोस हो रहा था। अपनी चाहत मे वो इतनी अंधी हो गई थी … Read more

कहीं हमारी बहू भी इस मौके की तलाश में ना रहे – सविता गोयल

तड़ाक से कांच टूटने की आवाज़ सुनकर दामिनी जी भागती हुई हाॅल में आई , ”  क्या तोड़ दिया बहू ?? ,, ” वो….  मम्मी जी ,  सफाई कर रही थी तो ये फ्लावर पॉट हाथ से छूट गया। ,, थोड़ा घबराते हुए मानसी बोली। ” हे भगवान, कितना सुन्दर पाॅट था … तुम्हें पता … Read more

छोटा सा त्याग – सुभद्रा प्रसाद

 ” दीपक, तुम अपनी गुल्लक क्यों तोड़ रहे हो? ” मम्मी ने अपने ग्यारह वर्ष के बेटे से पूछा |         “मैं छोटा सा त्याग करना चाहता हूँ |”         “क्या मतलब? ठीक से बताओ |”          “मम्मी, आज मेरे दोस्त आनंद का जन्मदिन है |वह अपना जन्मदिन मनाना चाहता है, पर उसके पापा नहीं हैं और उसकी … Read more

जिम्मेदारियाँ – गुरविंदर टूटेजा

सिविल लाईन एक कॉलोनी पास-पास रहने वाले दो परिवार पर जिम्मेदारियों के रूप अलग रूप है…  …..1…निधी भैया-भाभी छुट्टीयों के लिए पाँच दिन बाद आ रहे हैं..!!   अच्छा कितने दिन के लिए..?? पन्द्रह दिन के लिए हर बार तो आतें है तुम्हें पता तो है फिर क्यों पूछ रही हो..??   मैं इसलिए पूछ रही हूँ … Read more

अपना कोना – उमा वर्मा

मेरे जाने की खबर सुनते ही बेटा और बहू निकल पड़े हैं ।शाम की फ्लाइट पकड़ने के लिए ।कैब में मै भी उनके पास आकर बैठ गयी हूँ, लेकिन उन्हे  कुछ पता नहीं है ।मैं सबकुछ देख सुन रही हूँ लेकिन वे मुझे न देख रहे हैं न महसूस कर पा रहे हैं ।नियति का … Read more

दादी, मैं भी चलूँगी आपके मायके – मीनाक्षी सिंह

दादी ,मैं भी चलूँगी आपके साथ आपके मायके ! आप कभी नहीं ले जाती ,इस बार तो मेरी छुट्टी भी हो गयी हैँ स्कूल की ,मुझे नहीं पता ,मैं अबकी बार मम्मी के मायके नहीं जाऊंगी ,वहाँ तो हमेशा जाती हूँ ! 7 साल की दिव्या अपनी दादी से हठ करते हुए बोली !  प्रेमलताजी … Read more

स्मृति “” खुद की माफी – रीमा महेन्द्र ठाकुर

स्मृति कुछ दिन पहले ही अपने ससुराल से आयी थी; पर उसके चेहरे के भाव से लग रहा था  की कही कुछ तो गडबड है! उसके चेहरे पर नयी दुल्हन जैसा कोई भाव न था! इस बात को सबसे पहले नोटिस कियाम्  मृदुला, ने” मृदुला और स्मृति दोनो एक दूसरे  के पडोसी थे! साथ साथ … Read more

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