ग्रैंड पैरेंट्स डे – रश्मि सिंह

शिवि-मम्मा कल ग्रैंड पैरेंट्स डे है, सबके दादा-दादी आएँगे। दादी को बुलाया गया है। शिखा-रुको अभी समीर (शिखा का पति) को फ़ोन कर कहती हूँ कि गाँव से मम्मी को लेते आएँ। शिवि-मम्मी अबकी बार दादी आएगी तो उन्हें यही रोक लेंगे। शिखा-नहीं बेटा उनको यहाँ अच्छा नहीं लगता है गाँव में रहने की आदत … Read more

प्रेरणा – कंचन श्रीवास्तव 

मनीष के द्वारा पकड़े कागज के पुलिन्दे  ने मेरे होश उड़ाए दिए। “सब कुछ संभला रहे तो पुरुष की वाह वाही जरा सा कुछ बिगड़ जाए तो ……………।” इन्हीं दो पाटों के बीच जिंदगी पिस कर रह जाती है  हां यही तो सुनती आ रहीं हूं वर्षों से,मुझे याद है जब भाई (रमेश) हाईस्कूल की … Read more

दिखावा – दीपा माथुर

वाह, मम्मी आज तो आपकी बहु रानी ने आपको स्टेटस पर सबसे पहले बधाई दी है। वान्या ने अपनी मम्मी निर्मला जी को छेड़ते हुए कहा। निर्मला जी हिंदी विषय की व्याख्याता है। स्वभाव में एकदम सरल,वाणी में तो  माधुर्य घुला हुआ और अपनापन ऐसा की हर रिश्ते में उनकी धाक रहती है। सभी प्रयासों … Read more

ये दिखावा है या प्यार …? – रश्मि प्रकाश

कभी कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है कि सामने  मनपसंद दृश्य देख कर भी दिल भयभीत हो उठता है… मन घबरानेलगता है ऐसा लगता है मानो ना जाने अब कौन सी गलती हो जाएगी और ……राशि सामने का दृश्य देख कर यही सब सोच रही थी किउसके पति निकुंज ने झकझोरते … Read more

पकौड़े – नीलिमा सिंघल

रामचरणबाबू यों तो बड़े सज्जन व्यक्ति थे. शहर के बड़े पोस्ट ऑफिस में सरकारी मुलाजिम थे और सरकारी कालोनी में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सुख से रहते थे. लेकिन उन्हें पकौड़े खाने का बड़ा शौक था. पकौड़े देख कर वे खुद पर कंट्रोल ही नहीं कर पाते थे. रविवार के दिन सुबह नाश्ते … Read more

जो बंधन तोड़े न जा सके उनकी टीस ज्यादा दर्द देती है – संगीता अग्रवाल

सलोनी यूँही बैठी फेसबुक पर दोस्तों की पोस्ट देख रही थी अचानक उसे किसी पेज पर लिखी पंक्तिया दिखाई दी । “यूँ तो टूटे हुए रिश्तो की आह सर्द होती हैपर जो बंधन तोड़े ना जा सके उनकी टीस ज्यादा होती है। कितना सही लिखा है लिखने वाले ने किसी बंधन का टूटना इंसान को … Read more

एक सा कुछ नही रहता – स्नेह ज्योति

राम कुमार जी ने अपना सारा जीवन बीमा कम्पनी में काम करते हुए गुज़ार दिया ।आज वो रिटायर है ऑफ़िस से भी और घर के कामों से भी ,अब उनके घर की और उनकी ज़िम्मेदारी उनके बेटे मनोज ने ले ली हैं । मनोज को मेरी नौकरी पसंद नही थी । वो कहता था कि … Read more

माफी – पुष्पा पाण्डेय

गरीब घर की बेटी धनाढ्य घर की बहू बन जाए तो उसकी किस्मत से बहुत लोग ईर्षा करते हैं। माता- पिता को छोड़ अपने भाई- बहन भी उसकी तकदीर पर हैरान रहते हैं। हेमा के साथ भी ऐसा ही हुआ। हेमा एक बहुत बड़े व्यापारी घर की बहू बन गयी। हेमा की शालीनता और उसका … Read more

शक – गीता वाधवानी

नीरज बहुत गुस्से में चिल्लाया-“अनु यार बस करो, कितने सवाल पूछोगी? आधा घंटा हो गया ,जब से आया हूं सवाल पर सवाल पूछे जा रही हो। एक गिलास पानी का भी दिया नहीं है तुमने अब तक। शक करने की भी कोई हद होती है। ”  अनु-“मुझे लग रहा है तुम सच नहीं बता रहे … Read more

बावर्ची – संगीता त्रिपाठी

मालिनी का रो -रो कर बुरा हाल था, मयंक की कुछ खबर नहीं…, कल रात से मयंक गायब था,जाने कहाँ चला गया, किसी को भी कुछ बता कर नहीं गया…सुबह.,उसके दोस्तों से पूछा उनको भी कुछ पता नहीं..।     मालिनी और अवध जी.. पहली संतान पुत्र मयंक को पाकर फूले ना समाते, उनकी आँखों में बेटे … Read more

error: Content is protected !!