शादी का सफल मंत्रा – डॉ पारुल अग्रवाल

आज ऑफिस में लंच टाइम में जब सोनाक्षी और उसकी दोस्त श्रेया मिले तो सोनाक्षी को श्रेया कुछ अनमनी सी लगी, वैसे तो वो सुबह से ही नोटिस कर रही थी कि श्रेया कुछ परेशान सी है पर आज काम भी कुछ ज्यादा ही था इसलिए दोनों को ही बात करने का समय नहीं मिला … Read more

हम और हमारी हिंदी – आरती झा आद्या

हाई आंटी.. लतिका के बेटे सौरभ ने सीमा के घर में दाखिल होते हुए कहा। वही सीमा के बेटा नकुल ने लतिका के पैर छूते हुए प्रणाम किया। अरे अरे आजकल ये सब कौन करता है… हम अभी बूढ़े थोड़े न हुए हैं… क्यूं सीमा…नकुल के झुकने पर हड़बड़ाती हुई लतिका ने कहा। नकुल बेटा … Read more

शंका – माता प्रसाद दुबे

अविनाश के देर से घर आने पर उसकी पत्नी रजनी ने उस पर सवालों की बौछार कर दी”आज आपको इतनी देर कहा लग गई.. बिट्टू आपकी राह देखते हुए बिना खाना खाए ही सो गया?”रजनी अविनाश की ओर देखते हुए बोली। अविनाश कुछ देर तक शांत बैठा रहा फिर बोला।”रजनी! मैं कल भी कुछ देर … Read more

कैसे माफी दे दूँ? – उमा वर्मा

 मै नेहा,शादी हुए छः महीने ही हुए हैं ।अपने ससुराल के बारे मे बहुत कुछ जान चुकी हूँ इतने दिन में ।सासूमा बहुत सीधी सादी थी ।शादी तय हुई तो घर वालों को रिशता पसंद नहीं आया ।कहा गया कि लड़की कोई खास पढ़ी लिखी नहीं है, बहुत साधारण रहन सहन है, कोई तरीका नहीं … Read more

तमन्ना अधूरी रही – ऋतु गर्ग

लतिका ने शादी के बाद स्वयं को खुश रखने की काफी कोशिश की। क्योंकि जिस वातावरण में वह पली-बढ़ी थी यहां एकदम उसके विपरीत था। आज फिर कुछ अतीत के पन्ने पलटने के लिए विवश थी। उसने तो रोहित को अपना सभी कुछ मान लिया। रोहित को पति के रूप में पाकर स्वयं को धन्य … Read more

रिश्तों में बंधा स्वार्थ या स्वार्थ में बंधा रिश्ता – शुभ्रा बैनर्जी

आज संध्या को मां की बात रह -रह कर याद आ रही थी।कैसे वह भी अनुज के आगे-पीछे दौड़ती रहती है,उसके काम पर जाने से पहले और काम से आने के बाद।बचपन में मां का पापा के आगे-पीछे घूमना उसे बिल्कुल पसंद नहीं था।कभी चैन से बैठे नहीं देखा उन्हें।टोकने पर हंसकर हमेशा यही कहती”संधू,पति … Read more

माफ़ी – किरण केशरे

राजवीर आज बहुत ही दुखी और अपमानित होकर काॅलोनि में बने छोटे से पार्क में आकर बैठ गया था  ,बीता हुआ समय चलचित्र की भाँति आँखों से गुजरने लगा ; पत्नी लता के साथ माता-पिता की मर्जी से विवाह किया था, जो साधारण  पर सुसंस्कृत परिवार से थी।  लता घर में आते ही सबमें घुलमिल … Read more

बेजोड़ अदाकारा – लतिका श्रीवास्तव

…..वो कोई अदाकारा नहीं है ना ही कहीं से उसने अभिनय की ट्रेनिंग ली है लेकिन उसका हर अभिनय बेजोड़ है कोई भी रोल दे दो बेहतरीन तरीके से निभाना आता है उसे…कभी भी किसी भूमिका को निभाने से इंकार नहीं किया उसने बल्कि अन्य किरदारों की भूमिका भी निभाने को सहर्ष निःशर्त  तैयार रहती … Read more

दो बोल प्यार के –  पुष्पा जोशी

   ‘रजनी जल्दी उठो मुझे बहुत तकलीफ हो रही है’ शेखर बाबू ने कराहते हुए कहा। सुबह की ५ बजी थी। रजनी ने उठकर देखा शेखर से बैठा भी नहीं जा रहा था। उसने उसे तकिये का सहारा लेकर बिठाया और बेटे को आवाज दी  ‘रानू  ! देखो तुम्हारे पापा को क्या हो रहा है?’रानू उनका … Read more

दोहरा मापदंड – डॉ. पारुल अग्रवाल

सुमित्रा जी बड़े बेटे रचित के प्राची से शादी करने से इस कदर नाराज़ हो गई थी कि वो अपना दिल्ली वाला घर छोड़कर अपने छोटे बेटा बहु के पास हैदराबाद आ गई थी। यहां भी पूरे समय उनके मन में प्राची के लिए गुस्सा ही भरा रहता। बीच-बीच में बाकी रिश्तेदार भी उनको फोन … Read more

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