घमंड हुआ चकनाचूर – स्नेह ज्योति : moral stories in hindi

आज कल्पना अपनी स्कूल की दोस्त बानी से बारह वर्ष उपरांत मिल रही थी । उसका इंतज़ार करते करते कल्पना को अपने पुराने दिन याद आ गए । कैसे हम स्कूल में शैतानियां किया करते थे और बानी उसे आकर हर बार मुसीबत से बचा लिया करती थी । कभी वो बहुत अच्छे दोस्त हुआ … Read more

    साँवली हूँ तो क्या… – विभा गुप्ता 

   ” छोटी भाभी, समझाइये अपनी बेटी को।इसे रेडियो-वेडियो में तो कोई काम मिलने से रहा।मेरी रश्मि की बात कुछ और है।हमारी रश्मि तो सुंदरता की मूरत है और उसके पापा के पास धन की भी कमी नहीं है पर आपकी ज्योति तो साँवली है और फिर कोर्स की फ़ीस के लिये मोटी रकम भी चाहिये … Read more

 “अहंकार की आग”- डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

करीने से सजी हुई मिठाई की टोकरियों में से मोनू ने धीरे से एक मिठाई निकाल ली। छोटे भाई ने देखा तो वह भी धीरे-धीरे टोकरियों के पास सरकते हुए गया और जैसे ही एक टोकरी में हाथ डाला माँ कमरे में से चीखते हुए आई-” नालायक कहीं का….बोली थी न कि ये मिठाइयां मामा … Read more

उसे नाज़ कहते हैं, घमंड नहीं – रोनिता कुंडू

 क्या हुआ..? इतने परेशान क्यों लग रहे हैं..?  रानी ने अपने पति राकेश से कहा…  राकेश:   क्या करोगी तुम सुनकर..? कौन सा तुम मेरा कर्ज चुका दोगी…?  रानी: कितने चुकाने है…?  राकेश:   जाओ और अपना काम करो…! माना कि मेरी हालत अभी ठीक नहीं है… पर तुम्हारी भी इतनी कमाई नहीं है कि … Read more

अभिमान जरूरी या अपनों का प्यार ..!! – अंजना ठाकुर 

पापा ये आपके लिए स्मार्ट मोबाइल लाया हूं इसमें आप बहुत कुछ देख सकते हो नीरज अपने पापा बिपिन को मोबाइल देते हुए खुश था उसे लगा पापा खुश हो जायेंगे अपनी पहली कमाई से पापा के लिए मोबाइल लाया था विपिन जी खुश होने की बजाय गुस्सा होते हुए बोले मुझे छोटा महसूस कराना … Read more

खोखली होती जड़ें -लतिका श्रीवास्तव

आज संगम लाल के घर पार्टी में चलना है टाइम से तैयार हो जाना साथ में चलेंगे…दिवाकर ने जैसे ही कहा रत्नेश ने तुरंत मना कर दिया “अरे नही आज शाम को तो मैं कहीं नहीं जा सकता दोपहर में मेरा बेटा अजीत आ रहा है तीन सालों के बाद आ रहा है उसकी पढ़ाई … Read more

पहली पोस्टिंग – कंचन श्रीवास्तव : hindi kahani

सुनों अम्मा ने आज सफेद वाली रोटी और सफेद वाला भात बनाया है लगता है कोई मेहमान आने वाला है वो भी खास,वरना वो कहां ऐसे भोजन बनाती है,पर कौन ये पता नहीं और हां सुनों आज दाल भी बनी है। कहते कहते चिंकी का मुंह लटक गया,जिसे पास बैठी रानी से समझ गई ,पर … Read more

एक नई सुबह – नरेंद्र शुक्ल

‘टू राकेश चैधरी  ,  सी बलाक्स काटेज़ ,  टोरेंटो कनाडा ।‘   भारतीय डाक से आये पत्र के लिफाफे पर अपरिचित सी राइटिंग देखकर वह हैरान हो गया । साफ पता चल रहा था  कि  किसी बच्चे की राइटिंग है ।  ‘ पर  , इंडिया में तो वह किसी बच्चे को नहीं जानता ! उसे कौन … Read more

बड़े घर की बेटी – रश्मि प्रकाश

“बिटिया क्या तुम सच में अपने ससुराल जा रही हो…. ?” शकु ताई ने नीति से पूछा  “ हाँ ताई…आप अपना ख़्याल रखना और ये चिट्ठी… मम्मा जब घर आए उन्हें दे देना ।” कहते हुए नीति अपना सामान पैक कर कार में बैठ घर से निकल गई  एक ही शहर में मायका ससुराल है … Read more

समय का पहिया – आरती झा

माँ.. मैं नहीं जाऊँगी ससुराल अब.. पहली बार विदाई के बाद ससुराल से आई सुहाना की जेठानी की बेटी मालिनी की बात सुनकर सब अवाक रह गए। जेठ जी तो कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे.. मानो वज्रपात हुआ हो उन पर।  पर क्यूँ.. जेठानी ने ही पूछा।  क्यूँ जाऊँ मैं.. वहाँ सब कुछ … Read more

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