आँसुओं का पश्चाताप – सीमा श्रीवास्तव
“नाटक मत कीजिए भैया!” नंदिनी की आवाज़ अचानक तेज़ हो गई। “पिताजी का यह मकान करोड़ों का है। आपने मुझे एक मामूली सी शादी देकर घर से विदा कर दिया और पूरी जायदाद पर कुंडली मारकर बैठ गए। विकास का बिज़नेस डूब रहा है और उन्हें पैसों की सख्त ज़रूरत है। मुझे इस घर में … Read more