“कर्म का हिसाब” – प्रतिभा भारद्वाज ’प्रभा’
“अब क्या हुआ, अब क्यों रो रहे हो आप… निकाल लीजिए अपने बेटे के सभी अंग और बेच दीजिए अच्छी कीमतों पर…आप तो बहुत होशियार सर्जन हैं… कोई तकलीफ भी नहीं होगी आपको…” अपने 10 वर्षीय बेटे के शव पर विलाप करती मधु चीख-चीखकर अपने पति डॉ. मयंक से कह रही थी। वह शब्द नहीं … Read more