कलह – सुनीता परसाई’चारु’ 

आज ही सुशील की बारात घर लौटी थी।  सुशील की माँ अमली दौड़-दौड़कर सबका ध्यान रख रही थी। चाय नाश्ता चल रहा था ।पड़ोस की बिट्टो चाय बना रही थी । वह सुशील की मुंँह लगी छोटी बहन थी। पिछले साल ही उसकी शादी हुई थी। सुशील उसे अपनी शादी के लिये लेने गया था। … Read more

कलह – रेखा जैन

सुबह के 8 बजे थे और मीना रसोई में नाश्ते की तैयारी कर रही थी।  उसने सुबह पहले अपने बेटे का टिफिन बना कर बेटे को स्कूल भेज दिया था। अब घर के सब लोगों का नाश्ता बना रही थी और साथ में पति का टिफिन भी बना रही थी क्योंकि उसके पति अजय टिफिन … Read more

कलह – के आर अमित

घर में हँसी नहीं थी बस चिंता चिल्लाहट और अशांति थी।और चिंता चिता समान होती है। धीरे-धीरे जीविन को जला डालती है एक सुबह भोर का उजाला मुर्गे की बाँग सब सामान्य भोलू खेत जाने को उठा  पर उसने अपने सीने पर हाथ रख लिया साँस तेज़ होने लगी कपकपी कदम डगमगाए और हाय हाय … Read more

अस्तित्व – लतिका श्रीवास्तव

प्रतिदिन की भांति फिर थानेदार साब अपने कई साथियों के साथ डंडा फटकारते आ गये। ओए रामू …सबको पेशल चाय दे और सब जगह सलोनी लगा रौबदार आवाज कानों में जाते ही यंत्रवत रामू के कांपते हाथ चाय के पतीले की ओर बढ़ गए थे। जल्दी चाय बना एक काम भी ढंग से नहीं होता।तब … Read more

जब घी सीधी उंगली से नहीं निकलता तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती हैं !! – स्वाती जैंन

बहु , यह कैसा बेढ़ंगा खाना बनाया हैं तुमने ?? दाल- सब्जी में तो कुछ स्वाद ही नहीं हैं , दाल में नमक कम हैं और सब्जी में मिर्च ज्यादा हैं !!मेरे बेटे सन्नी को तो मेरे हाथो का खाना बहुत स्वाद लगता हैं , तुम्हारे हाथों में वह स्वाद नहीं !! अब क्या करूं … Read more

दूरियां नज़दीकियाँ बन गई – संगीता अग्रवाल

” मां मैं सोच रहा हूं एक घर खरीद लूं।” संदीप ऑफिस से आते ही अपनी मां जया जी से बोला। ” पर बेटा ये घर है तो सही फिर दूसरे घर की क्या जरूरत है?” जया जी हैरानी से बोली। ” वो मां बात ऐसी है की शालिनी ( संदीप की पत्नी ) को … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं –  सुनीता माथुर

प्रगति, जागृति, रचना तीनों ही लड़कियों के कारण ज्योति को घर में सास के बहुत ताने सुनते पड़ते थे सास हमेशा यही ताने मारती कि——– एक बेटा होता घर का बारिस होता कम से कम—– वंश का नाम तो——- बना रहता! लेकिन——— बहू के तो तीन लड़कियां हो गईं यह सब सुनकर ज्योति दुःखी तो … Read more

मिताली – गीता अस्थाना

——— शिवेंद्र ने ट्रेन के कोच में भरी पैसेंजर के बीच तेज़ आवाज़ में कहा, ‘ कब तुमने मुझे रुपए दिए ‘ उनकी तेज़ आवाज़ से भयभीत सी होकर नीचे देखने लगी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। रात्रि का सफर था, सो वह अपने बर्थ पर जाकर लेट गई। काफी देर तक वह जागती … Read more

गर्व – खुशी

नीला एक जिम्मेदार और लाडली बेटी थी पिता आशय और आरजू दोनो की मुराद मांगी बेटी जिस पर दोनों जान छिड़कते थे।नीला का जन्म शादी के 12 साल बाद हुआ।आशय और आरजू दोनो कॉलेज में प्रोफेसर थे।आशय हिंदी पढ़ाते थे और आरजू pshycology । आरजू और आशय की लव मैरिज थी दोनो एक ही कॉलेज … Read more

तू बेमिसाल है – विभा गुप्ता 

 ” बस..बहुत हो चुका तेरा गाना-बजाना..स्कूल से आकर चुपचाप रसोई में जाकर अपनी माँ से खाना पकाना सीख… रंग देखकर तो कोई भी लड़का तुझे पसंद नहीं करेगा,कम से कम घर का कामकाज सीख लेगी तो शायद कोई ढ़ंग का परिवार मिल जाए…।” निधि के घर में घुसते ही उसकी दादी उस पर फट पड़ी … Read more

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