हमारी नयका : एक अव्यक्त प्रेम कहानी(भाग-4) – साधना मिश्रा समिश्रा : hindi stories with moral

hindi stories with moral : भंवरजाल… आज यह कैसा भाव जाग रहा है मन में। क्या यही प्रेम है जो न जीने दे रही है न मरने दे रही है। उफ…कैसा भवंर जाल है। जितना भी ऊबरने का प्रयत्न करो और गहरे धंसते जाते हो। अब तो अंतिम परिणिति मर कर ही मिलेगी… नयका की … Read more

हमारी नयका : एक अव्यक्त प्रेम कहानी(भाग-3) – साधना मिश्रा समिश्रा : hindi stories with moral

hindi stories with moral : शर-शैय्या… आंगन में बाध की खाट पर लेटे हुए खांसते हुए पिता को नजरअंदाज करते हुए रघु मां-मां कहते हुए घर में प्रविष्ट हो गया। नयका रसोई में छोटी सी प्यारी गुदबुदी सी बहू के साथ रोटी-पानी में व्यस्त थी। एक वर्ष पहले ही रघु का ब्याह कर दिया था। … Read more

हमारी नयका : एक अव्यक्त प्रेम कहानी(भाग-2) – साधना मिश्रा समिश्रा : hindi stories with moral

hindi stories with moral : आज का पूरा दिन ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। नयका को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस व्यक्ति के साथ वह सुखपूर्वक पिछले पंद्रह साल से सुखी गृहस्थ जीवन गुजार रहीं थीं। वह पति कहीं और भी प्रेम की पींगे चढ़ा रहा था और इस पराकाष्ठा … Read more

सबक – शिप्पी नारंग: Moral Stories in Hindi

“पापा जी जैसे कल बात हुई थी, पेपर तैयार हो गए हैं आप साइन अभी करेंगे या फिर बाद में ” शुभ्रा ने अपने ससुर सूरज जी से पूछा जो नाश्ते के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठे थे साथ में शुभ्रा के पति मोहित और सासू मां वेदिका सरीन भी बैठी थी । “अच्छा तैयार … Read more

अपने घर से मायका बन जाने का सफर भाग 3   – संगीता अग्रवाल 

” मम्मी मैं भी तो तरस रही थी अब जल्दी से बढ़िया सा कुछ खिलाओ इतने मैं हाथ मुंह धोकर ये बैग के कपड़े अपनी अलमारी मे लगा कर आती हूँ !” रितिका ये बोलते हुए अपने कमरे की तरफ चल दी।  थोड़ी देर बाद उसने अपनी पसंद का नाश्ता किया और माँ से बाते … Read more

अपने घर से मायका बन जाने का सफर भाग 2  – संगीता अग्रवाल 

बेटी को विदा कर कामिनी जी और सुधीर जी बिलख पड़े रो तो भाई आदित्य भी रहा था पर उसे मम्मी पापा को भी तो संभालना था। बहन की विदाई बाद एकदम से समझदार और जिम्मेदार जो हो गया था। उधर रितिका के ससुराल पहुँचते ही वहाँ खुशी का मौहौल हो गया। कितनी अजीब है … Read more

अपने घर से मायका बन जाने का सफर – संगीता अग्रवाल 

दुल्हन के जोड़े मे सजी रितिका विदाई से पहले अपने पूरे घर को बड़ी हसरत से निहार रही थी। वो घर जो कुछ देर बाद ही उसे छोड़ कर जाना है। अचानक उसकी निगाह हलवाइयों का हिसाब निमटाते पिता पर गई एक दिन मे ही कितनी मायूसी छा गई उनके चेहरे पर अपनी लाडो को … Read more

बड़ों का आशीर्वाद –   विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सुन…अब कोई बहाना नहीं…तुझे आना ही है।सुमित आर्मी ऑफ़िसर बन गया है, उसे आशीर्वाद नहीं देगी…।”    ” दूँगी…क्यों नहीं दूँगी…मेरे सामने ही तो वह चलना-बोलना सीखा है लेकिन रंजू….।” मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि उधर से आवाज़ आई,” लेकिन- वेकिन छोड़ और…।”   ” ठीक है बाबा…मैं आ रही हूँ…अब … Read more

मोगरे के फूल – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

विश्वनाथ जी स्वयं ,खुरपी लेकर गुड़ाई करने के बाद, पानी का पाइप पकड़ कर सभी पौधों में पानी डाल रहे हैँ। भैय्या  आज तो शाम को रिसेप्शन है…. आज तो रहने देते.. किसी और को.. किसी नौकर चाकर को कह देते। बहन दमयंती ने कह तो दिया, मगर ये अच्छी तरह जानती है कि भाभी,दया … Read more

सबसे बड़ा ज्ञानी  : Moral Stories in Hindi

 “अरे विशेष तुम तो भई अब हमें पूछते भी नहीं…… अपने चाचा से इतनी नाराज़गी किस बात की?”पड़ोस में रहने वाले मुकुल चाचा ने विशेष से कहा जो ऑफिस से आकर अपने घर की तरफ़ जा रहा था  “नमस्ते चाचा जी,ऐसा कुछ भी नहीं है जो आप सोच रहे हैं…बस आजकल काम की अधिकता की … Read more

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