बेटा शिवम एक गिलास पानी दे दे बेटा, अच्छा माँ लाता हूँ। ये लो माँ पानी,, लगता है आज आपकी तबियत बहुत खराब है, ऐसा करता हूँ आज मै आफिस से छुट्टी ले लेता हूँ। मेरे पीछे आपको कौन देखेगा, यदि आपको कुछ चाहिए तो कौन देगा। नहीं बेटा तू अपने काम का नुकसान न कर मैने गोली खा ली है कुछ देर मे ठीक हो जाऊंगी।
हाँ आज तेरा टिफिन नहीं बना पाऊंगी, तू वही कैंटीन मे कुछ खा लेना। तुम मेरे खाने की चिंता न करो माँ मै देख लूंगा। लेकिन तुम कैसे खाओ पीओगी। कुछ नहीं एक गिलास दूध रख जा वही पी लूंगी और जब थोड़ी तबियत ठीक लगेगी तो कुछ खा लूंगी। ठीक है माँ मै दूध गरम करके रख दे रहा हूँ और फिर मै आफिस के लिए निकल रहा हूँ। अपना ख्याल रखना, ठीक है बेटा।
आफिस पहुँच कर भी शिवम माँ के लिए चिंतित था। तभी आफिस में साथ काम करने वाली नमिता केबिन मे आई और उसने शिवम को दो तीन आवाजें दी। लेकिन शिवम न जाने कहाँ खोया हुआ था। नमिता ने शिवम को कंधे से झिंझोडा अरे, शिवम कहाँ खोए हुए हो, कबसे आवाज दे रही हूँ तुम हो कि सुन ही नहीं रहे हो।
अरे कुछ नहीं नमिता वो आज माँ की तबियत ठीक नहीं हैऔर वो घर मे अकेली है। अच्छा नमिता बोली, माँ अक्सर बीमार ही रहती है, उनको घर मे अकेले छोडकर आता हूँ तो आफिस मे मेरा मन नहीं लगता। हाँ वो तो है नमिता बोली। डाक्टर को दिखाओ ठीक हो जाएगी परेशान न हो।
शिवम और नमिता एक दूसरे को पसंद करते थे। शादी करना चाहते थे। लेकिन शिवम और नमिता दोनों नौकरी के साथ आगे की पढ़ाई भी कर रहे थे। उन्हें शादी तो करनी थी लेकिन पढाई पूरी होने के बाद। एम बीए की पढ़ाई कर रहे थे दोनों, जिससे दोनों को नौकरी में तरक्की मिल सके।
नमिता ने अपने घर मे अपने मम्मी पापा को शिवम के बारे मे बताया हुआ है। शिवम से वे मिल भी चुके है। नमिता के मम्मी पापा को शिवम पसंद भी था शादी करने में कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन दोनों ने तय किया हुआ था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद ही शादी करेगें।
शिवम और उसकी मां बस दो ही लोग घर में थे। शिवम के पिता शिवम की बचपन में ही गुजर गए थे। घर की खेती थी उसी से पैसा आ जाता था तो शिवम और उसकी मां का खर्चा अच्छे से चल जाता था। पहले तो शिवम गांव में रहकर पढ़ाई की थी, शिवम के दादा दादी भी उनके साथ रहते थे।
और शिवम के दादाजी खेती बाड़ी का काम देखते थे। लेकिन हाई स्कूल के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए शिवम को मां के साथ शहर आना पड़ा। शिवम के दादा जी को भी कोई परेशानी नहीं थीवे चाहते थे कि शिवम अच्छे से पढ़े लिखे।
यहां शहर में एक कमरा किराया से लेकर शिवम अपने मां के साथ रहने लगा था। । शिवम पढ़ने में होशियार था, वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहता था। और फिर उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। गांव में अब शिवम के दादा दादी का स्वर्गवास हो गया था। शिवम और माँ अब शहर के ही होकर रह गए ।शिवम इंजीनियरिंग करना चाहता था।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके वह नौकरी करने लगा था।साथ-साथ पढ़ाई में करता था। अभी ऑफिस में शिवम का मुलाकात नमिता से हुई।औपचारिक बातचीत के दौरान कब दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी
और दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे पता ही नहीं चला। एक दिन शिवम ने नमिता के सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया। नमिता ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। लेकिन दोनों ने ही तय किया की शादी के हम पढ़ाई पूरी करने के बाद ही करेंगे।
इधर शिवम की मां जानकी जी हर वक्त शिवम से कहती रहती थी बेटा शादी कर ले,, अच्छा मां कहकर शिवम टाल देता था। अभी पहले पढ़ाई पूरी करनी है । इधर जान की अब बीमार रहने लगी और अस्थमा ने भी जकड लिया उसे। और घुटनों के दर्द से परेशान रहने लगी।
जानकी जी से अब घर का काम धाम नहीं होता था। अक्सर बिस्तर पकड़ लेती थी । जिससे शिवम को बहुत परेशानी होती थी,,क्योंकि वह ऑफिस में होता था और माँ अकेलीघर मे होती थी। शिवम को मां की चिंता होती थी।
इस बार मां बीमार हुई तो 15 दिन से पड़ी हुई है उठा ही नहीं जा रहा है। । उससे सारा घर डिस्टर्ब हो गया था ।शिवम ऑफिस में छुट्टी नहीं ले पा रहा था । और उसकी पढ़ाई भी बहुत कम हो पा रही थी । आज जब नमिता ने शिवम की परेशानी देखी तो थोड़ा सोचने को मजबूर हो गई।
शिवम ने कहा नमिता क्यों ना हम लोग शादी कर ले, मुझे मां की वजह से बहुत परेशानी हो रही है। और फिर तुम्हारा तो काम भी ऐसा है कि तुम ऑफिस का काम घर से भी कर सकती हो । सोच विचार के बाद निर्णय लिया शिवम ममता ने कहा ठीक है मैं तैयार हूं एक सेमेस्टर की पढ़ाई बस और रह गई थी।
नमिता ने अपनी मम्मी पापा को सारी परेशानी बताई और एक मंदिर में जाकर शादी कर ली। । शिवम नमिता को लेकर घर आ गया। नमिता देखने सुनने में बहुत अच्छी थी, और स्वभाव से भी बहुत मृदु थी । शिवम नमिता को लेकर घर आया और मां से मिलवाया।
मां यह देखो तुम्हारी बहु यह तुमने शादी कब कर ली । आज ही कर ली, मां तुम बीमार हो तुम्हारे देखभाल को कोई नहीं है। अब नमिता देखभाल करेगी तुम्हारी । लेकिन यह तो नौकरी करती है ना हां ,ये घर से काम करें कि तुम्हारी देखभाल करेगी ।
मैं ऑफिस चला जाता था तुम बिल्कुल अकेले हो जाती थी, मुझे बड़ी चिंता होती थी। तभी आगे बढ़कर नमिता ने कहा आप चिंता ना करें मां अब मैं आपकी अच्छे से देखभाल करूंगी और नंदिता ने जानकी जी के पांव छुए।
नमिता की देखभाल से जानकी जी ठीक होने लगी ।लेकिन शिवम और नमिता को हंसते बोलते देखकर जानकी जी को उससे जलन होने लगी। कहीं वह मेरे बेटे को मुझसे छीन ले। वह तरह-तरह के हथकंडे अपनाने लगी नमिता को परेशान करने को।
जिसकी वजह से नमिता शिवम की नजरों में गिर जाए। जानकी जी को शुगर थी पता था नमिता को वह बिना शक्कर की चाय बनाकर देती थी लेकिन जानकी थी चुपके से चाय में दो चम्मच शक्कर डाल देती थी ,और शिवम के सामने कह देती मुझे शुगर है तभी तुम्हारी बीवी इतनी सारी शक्कर डालकर चाय में देती है जिससे मैं मर जाऊं ।
जब शिवम ने नमिता से कहा तो नमिता बोली नहीं शिवम मैं माँ जी को बिना शक्कर की चाय देती हूँ।लेकिन इसमें तो शक्कर है पता नहीं ,अच्छा मैं दूसरी बना देती हूं । जानकी जी कभी दाल या सब्जी में ज्यादा नमक डाल दती थी या फर्श में पानी गिरा देती और शिवम से कहती बहू चाहती है कि मैं गिर जाऊं और मेरी हड्डी पसली टूट जाए।
इस तरह से काम करके वह नमिता को परेशान करने लगी थी । शिवम नमिता से दूर हो जाए । बेटा बहू को हंसने बोलते देखती तो जानकी के तन बदन में आग लग जाती।
हर समय जानकी नमिता से जलन होती रहती थी। लेकिन नमिता ऐसी नहीं थी, वह जानकी जी को अच्छे से ख्याल रखती थी। धीरे-धीरे नमिता को महसूस होने लगा कि जानकी जी उसे पसंद नहीं करती। शिवम और नमिता को आपस में प्यार से बात करते हो तो देखकर जान की जल भुन जाती थी।
आज नमिता ने की कढ़ी बनाई थी बड़े प्यार से। और बनाने के बाद उसे चखा भी था,सब ठीक-ठाक था लेकिन जब सब लोग खाने बैठे तो शिवम ने पहला निवाला मुंह में डालते ही थूक दिया । यह क्या नमिता इतना नमक डाला है, नहीं तो शिवम नमक तो बिल्कुल ठीक था मैंने चखकर देखा था । जानकी जी लेकिन चुप थी बिल्कुल,,नमिता जानकी जी की तरफ देख रही थी ।
उसने आज पूछ ही लिया माँ जी कढ़ी में अपने नमक डाला है ना ऊपर से, नहीं नहीं मै क्यों डालूंगी। तो घर में तो और कोई है नहीं और मैंने चखा था नमक, बिलकुल ठीक था और कौन डालेगा माँ जी।में जानती हूं कि आप मुझे पसंद नहीं करती मुझे शिवम की नजरों में गिरने के लिए ही आप ऐसा कुछ करती रहती है। फिर नमिता ने दाल बनाई और फिर सब में फिर से खाना खाया।
दूसरे दिन जानकी जी की अचानक तबीयत खराब हो गई। बीपी बढ़ गया था तो ब्रेन हेमराज हो गया। जल्दी-जल्दी अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। नमिता ने एक हफ्ते की ऑफिस से छुट्टी ली थी। और जी जान से जानकी की सेवा की। एक हफ्ते बाद घर ले आए तो जान की जी को अपना काम करने में भी असमर्थ थी । नमिता पूरे मन से जानकी जी की देखभाल करती है ।
आज जानकी जी को देखने पड़ोसी सावित्री आई थी नमिता की सेवा देकर वह जानकी जी से बोली बहुत अच्छी बहू मिली है तुम्हारी इतनी अच्छे से देखभाल कर रही है, नहीं तो कहां आजकल की ब बहुएं सांसों की इतनी सेवा करती है । तुम बहुत किस्मत वाली हो जानकी,,जानकी की भी आंखें खुल गई सावित्री के जाने पर नमिता सूप ले आई
जानकी के लिए और उसे अपने हाथों से पिलाने लगी। मुझे माफ कर दे बेटा मैं तुमसे जलन रखती थी कि कहीं तुम मेरे बेटे को मुझसे छीन न लो इसलिए तुम्हें परेशान करने को मैं तरीके ढूंढती रहती थी। मुझे माफ कर दे बेटा नहीं माँ जी ऐसा ना करें आप बड़ी है मुझसे माफी मांग ती अच्छी नहीं लगती। मैं आपके बेटे को आपसे क्यों छिनूंगी,
वह तो आपका ही है मां बेटे का रिश्ता दुनिया का सबसे अनमोल और पवित्र रिश्ता है उसे कई जुदा नहीं कर सकता है। यह डर आप अपने मन से निकाल दीजिए कि मैं आपसे आपकी बेटे को छीन लूंगी।हां बेटा तू बहुत अच्छी है मुझे एक बार फिर से माफ कर दे और दोनों सास बहू एक दूसरे के गले लग गई।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
21 सितम्बर