संभलते रिश्ते  – ऋतु गर्ग

अनुजा अपनी बहन से बहुत प्यार करती थी । जब भी कुछ सामान लाती तो अपनी छोटी बहन के लिए लाना कभी नहीं भूलती और वह आशा करती कि सभी भी दोनों बहनों को समान रूप से प्यार और सम्मान दे।  माता-पिता को लगता कि अनुजा तो बड़ी है उसे हर बात को समझना चाहिए … Read more

 प्यार की खुशबू – संगीता श्रीवास्तव

शीतल नाम था उसका जो अब शीतली के नाम से जानी जाती है। बहुत प्यारी, गोरी चिट्टी, अच्छी कद -काठी की। मुझे बीते दिन याद आने लगे जब वह मुझे पहली बार मिली थी ।क्या सलीका था- उठने बैठने ,बोलने चालने और पोषाक! पोषाक के तो क्या कहने, जिसे देख कर ही‌ ऐसा लग रहा … Read more

ऐसे भी लड़के वाले होते हैं – मीनाक्षी सिंह

रंजना आज किंजल को देखने लड़के वाले आ रहे हैं ,सब तैयारी कर लेना ! लिस्ट बना दो जो जो सामान लाना हो ले आऊँ ! कितने लोग आ रहे हैँ ?? यहीं कोई आठ लोग ! कोई बात पक्की हो जायें तो इतने लोग आयें भी तो ठीक लगे ! उनकी आवभगत करो फिर … Read more

बेटा है पराया धन – Shikshaprad Kahaniya

आज मनोहर लाल जी की सबसे छोटी पुत्री तानिया का विवाह था। आज उनकी सारी जिम्मेदारियां पूर्ण होने वाली थी।मनोहर लाल जी के तीन बच्चे थे,दो पुत्रियां सारिका और तानिया तथा एक पुत्र रोहित।तानिया उनमें सबसे छोटी थी। अभी दो साल पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी सुप्रिया जी को कैंसर ग्रस्त होने के कारण खो … Read more

प्यार का जाल – नंदिनी

बड़े नाजों से पली दो बहनें नीरू ,खुशबू  कभी भी नीरज शुभांगी ने कोई कमी नहीं रहने दी, हर  ख्वाहिश को पूरा किया । बढ़ती उम्र के साथ मौज मस्ती ,घूमना , दोस्ती यारी स्वाभाविक है ।  ऐसे में बड़ी नीरू की दोस्ती मोहित से हुई , पहला साल कॉलेज का अलग ही उत्साह उमंग … Read more

माफ़ी – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

रामदिन काका ने प्रभा के कमरे के बाहर दरवाजे पर खड़े होकर आवाज लगाई। “बहुरिया आपके बाबूजी आए हैं मिलना चाहते हैं। उन्हें बुला लूँ अंदर !” काका को ही पूरे घर के देख -रेख की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रभा जब से ब्याह कर इस घर में आई थी तब से ही देखा था … Read more

कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता ठाकुर साहब – मीनाक्षी सिंह

निकम्मा घर में ही पड़ा रहता हैँ ,शादी भी हो गयी ,अब भी कोई ज़िम्मेदारी का एहसास नहीं ! मैं क्या तेरा पूरा जीवन खर्च उठाऊँगा ! नालायक कहीं का ,बहू के ज़रूरी सामानों के लिए भी पैसा मुझसे ही मांगता हैँ ! बिल्कुल शर्म हया नहीं हैँ इसकी आँखों में ! देखों अभी भी … Read more

आत्मग्लानि – पूनम अरोड़ा

संजय नर्सिंग  होम के संचालक और (हैड ऑफ द डिपार्टमेन्ट ऑफ सर्जरी) डाक्टर संजय ने मैनेजमेंट टीम को  सख्त हिदायत दे रखी थी कि चाहे कोई  कितना भी सीरियस केस आए , कोई  कितना भी अनुनय करे बिना फीस जमा कराए किसी का इलाज शुरू मत करना।  कई लोग ऐसे ही अपनी गरीबी का रोना … Read more

खौफ़ – मधु झा

शालिनी आफ़िस से आकर सीधे बेडरूम में जाकर लेट गयी और झुमरी मासी से काॅफी लाने को कहा। काॅफी का नाम सुनते ही झुमरी समझ गयी कि आज फ़िर से शालिनी बहुत स्ट्रेस में है,, वरना बाक़ी दिन वो आफ़िस से आने पर फ्रेश होकर ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठकर चाय पीती है,, उसके … Read more

 एक बेटी ऐसी भी – मधु झा

रामेश्वर जी और उनकी पत्नी मनोरमा जी पैकिंग करने में व्यस्त हैं,,।  “क्या कहीं घूमने जा रहे या फ़िर अपनी बेटी के यहाँ जा रहे,,?” “अजी नहीं,,ये दूसरे घर में शिफ़्ट हो रहे।  अरे वाह,  क्या इन्होंने दूसरा मकान भी ले लिया है,,? एक बड़े से मकान में तो पहले से ही रह रहे थे … Read more

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