आज़ादी।-  कामनी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ना मुझे आपके पैसे चाहिए ना आपकी संपत्ति…  मैं अब बच्ची नहीं हूँ। अपने तरीके से जीने दो मुझे। कहते हुए कोमल पैर पटकते हुए घर से बाहर चली गई। मम्मी और पापा खुद को दोषी मानते हुए आज फिर एक दूसरे से यही बात करते रहे… नहीं, हमें बच्चों … Read more

जिंदगी में कब कौन सा मोड़ आयेगा –  मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  नीलम और प्रिया देवरानी जेठानी थी ।नीलम के पति यानि प्रिया के जेठ का बिजनेस था और प्रिया के पति नौकरी करते थे।नीलम के पास पैसा था।दो बेटे थे जो पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी में थे बड़ा बेटा पूना में नौकरी करता था और छोटा अमेरिका में था ।नीलम को अपने … Read more

थैली भर के आशीर्वाद-  सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  “अरे ये क्या बेटा, गगन, मैंने तो तुम्हें सब्जी लाने को भेजा था, पर तुम तो खाली थैली लेकर आ गये |” माँ ने अपने पंद्रह वर्षिय पुत्र गगन को खाली थैली  लेकर घर में आते देखकर कहा |       ” खाली थैली नहीं मां, थैली भरकर आशीर्वाद लाया हूँ |” … Read more

अब जाकर आंखें खुली हैं!!-  पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आंगन में पड़ी तख्त पर ढेर सारे सामान,सजे पड़े थे। अर्पिता के भैया अंकित अभी – अभी राखी बंधवा कर गए हैं!  यूं तो भैया अपने काम में बहुत व्यस्त रहते हैं… और इस बार तो बोला भी था, मुझे बिजनेस के काम से कहीं निकलना था, तो शायद रक्षा … Read more

 बंधते रिश्ते – लतिका श्रीवास्तव : Short Stories in Hindi

पापा इस बार मैं घर तभी आऊंगी जब भाभी घर से जाएंगी  वो नहीं दिखना चाहिए मुझे घर में……!नेहा बेटी का वही जिद्दी स्वर …. पर बेटा सुनो तो मेरी बात ….कैलाश नाथजी कहते रह गए और नेहा ने कॉल काट दिया। ………नेहा उनकी इकलौती बिटिया … बहुत ज्यादा लाडली …बचपन से अपनी हर ज़िद … Read more

घुटन ( भाग 2)- माता प्रसाद दुबे : Moral stories in hindi

रामदयाल जी और राजू के लिए खाना सावित्री देवी खुद ही बनाती थी। रामदयाल जी की अन्य सम्पत्ति भू-भाग जो सावित्री के नाम पर थे व उसके कीमती ज़ेवर गहने सब दोनो बहूओ और बेटों ने आपस में बांट लिया था। सिर्फ एक आलीशान मकान जो कि रामदयाल जी ने लखनऊ के पाश इलाके में … Read more

घुटन ( भाग 1)- माता प्रसाद दुबे : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : घर में पार्टी चल रही थी..डीजे की धुन पर घर के सभी लोग मेहमानों के साथ थिरक रहे थे..उस आलीशान घर के एक कमरे में जीवन के सत्तर बसंत देख चुके रामदयाल जी कमरे में बैठे ख्यालों में खोये हुए थे..नौकरी से सेवानिवृत्त होने के पश्चात वह घर पर ही … Read more

मां तो कभी बच्चों पर किए गए खर्च का हिसाब नहीं लगाती!! (भाग – 3) – अर्चना खंडेलवाल

मैं इस उम्र में तुम्हारे घर की क्या चौकीदारी ही करती रहूंगी। सौरव,  मां हूं तेरी तुझे नौ महीने कोख में पाला है,छोटा है तो तुझे सबसे ज्यादा प्यार दिया है, विनीत से ज्यादा तू मेरा लाड़ला रहा है, तेरी हर जिद पूरी की है, तेरे खिलौने और खेल के सामान का मैंने कभी हिसाब … Read more

मां तो कभी बच्चों पर किए गए खर्च का हिसाब नहीं लगाती!! (भाग – 2) – अर्चना खंडेलवाल

तूने सास-ससुर की सेवा के झंझट से मुक्ति पाने का अच्छा उपाय ढूंढा है, शकुंतला देवी ने ज्योति को सुनाया। नहीं मांजी, मैं इस तरह से रोज आपके तानें सुनकर जीना नहीं चाहती हूं,ससुर जी की कमाई के पकवान भी मेरे लिए फीके हैं और अपने पति की कमाई की दो सूखी रोटी भी मैं … Read more

मां तो कभी बच्चों पर किए गए खर्च का हिसाब नहीं लगाती!! (भाग – 1) – अर्चना खंडेलवाल

मां, अकेले मेरी जिम्मेदारी नहीं है, महीना शुरू हुए इतने दिन हो गये और आपने अभी तक भी पैसे नहीं भेजे?? मैं ही अकेला मां का खर्चा क्यूं उठाऊं? अभी मेरे मकान का भी काम चल रहा है, अब मकान बनवाऊं या मां की बीमारी में पैसा खर्च करूं! मेरे पास भी कोई खजाना नहीं … Read more

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