अपना घर अपना होता है। – रजनी भास्कर ‘नाम्या’  : Moral Stories in Hindi

उसका दुग्ध सा सफेद वर्ण झुर्रियों के ताने-बाने में से झांकती लालिमा और गहरा जाती जब उसके अधरों पर  निश्चल हंसी आती थी। कितना हंसती थी….. बात बात पर….. स्वयं ही कोई बात कहती और हंसती। बच्चों की सी उसकी निश्चल हंसी सामने वाले को मंत्रमुग्ध कर देती। जितनी शीघ्रता से वह हंस देती थी … Read more

खुशियों पर सबका हक है – हेमलता गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

बहू … क्या यह अच्छा लगता है तुम्हारी बहन हर दूसरे दिन यहां आ जाती है और फिर तुम दोनों दोपहर की गई हुई रात को घर वापस आती हो, बेटा.. अभी तुम्हारी नई-नई शादी हुई है अभी तुम्हें अपना सारा समय प्रतीक के साथ गुजारना चाहिए, तुम दोनों साथ-साथ घूमो फिरो, दोनों एक दूसरे … Read more

मैं आपसे जुदा नहीं बाबूजी – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

“बाबूजी आप समझने की कोशिश कीजिए। मैं आपको सलाह नहीं दे रही हूं बस बता रही हूं आप जो कर रहे हैं वह गलत है। इसमें उसकी क्या गलती है। वह तो बच्ची है अभी! अभी दिन ही कितने हुए हैं उसके शादी को?”बड़ी बहू मंजूषा को यह कहते हुए जब सुना तो  मनोहर बाबू … Read more

अपना घर… – मधु वशिष्ठ   : Moral Stories in Hindi

दरवाजा खुलते ही मीना ने देखा कि सामने माताजी भी अपने फ्लैट में वापस आ गई थीं। हैरानी और खुशी से माताजी को मिलने के लिए गई। माताजी उसके सामने वाले फ्लैट में ही अकेली रहती थीं। 10 साल पहले जब सरकारी विभाग में कार्यरत वर्मा जी संसार छोड़ कर गए थे| माता जी के … Read more

अपना घर… – रश्मि झा मिश्रा   : Moral Stories in Hindi

“मां अपना जरूरी सामान सब देखकर रख लेना… दवाइयां ध्यान से ले लेना… एक महीना तो कम से कम रहना ही पड़ेगा ना…!”  “अरे चारू… बेटा मुझे मत बुला इतने दिनों के लिए… तेरी सासू मां तो हैं ही… उनका स्वभाव मुझसे नहीं मिल पाता… तू तो जानती है बेटा… पिछली बार कितनी परेशानी उठानी … Read more

बहू के सामान पर बेटी का हक़ – रश्मि प्रकाश   : Moral Stories in Hindi

“ क्या बात है जबसे नित्या के घर से आई हो तुम्हारा चेहरा उतरा उतरा हुआ सा क्यों है?” निकुंज ने राशि से पूछा  “ कुछ नहीं जाने दीजिए… आप भी मुझे नहीं समझेंगे और चार बात सुना देंगे ।” कहकर राशि कपड़े बदल कर बिस्तर पर आकर लेट गई  नीँद आँखों से कोसों दूर … Read more

एहसान – अमिता कुचया   : Moral Stories in Hindi

सोमी की गरमी की छुट्टी हुए काफी दिन हो गये थे। वो मामा के यहाँ जाना नहीं चाहती थी। उसे बुआ के यहाँ जाना अच्छा लगता था, वो जब भी जाती तो दो चार दिन के लिए ही जाती थी। इस बार भाभी की बेटी मौली के साथ खेलना था, वो दो साल की थी, … Read more

हक – वीणा सिंह   : Moral Stories in Hindi

छोटे भाई राजा का फोन देखकर आश्चर्य हुआ.. बहुत दिनों बाद. कॉल बैक किया.. उधर से आवाज आई दीदी सप्तमी तिथि को पापा का श्राद्ध  का दिन पड़ा है. ओह पापा को दुनिया से गए एक साल हो गया.. उधर राजा बोल रहा था पहला पितृपक्ष  है इस बार इसलिए पंडित जी ने जैसे जैसे … Read more

“मुझे माफ कर दो पापा ” – कमलेश आहूजा  : Moral Stories in Hindi

नेहा अरमान के प्रेम में इतनी पागल हो गई थी कि उसको कुछ भी सुध नहीं थी।कब वो उसको अपने काम के लिए इस्तेमाल करने लगा उसको पता ही नहीं चला। बस वो उसके मोह जाल में फँसती चली गई और अरमान उसका फ़ायदा उठाने लगा। नेहा की माँ ने उसे बहुत समझाया लेकिन वो … Read more

खानदान की इज्जत – निशा जैन   : Moral Stories in Hindi

सेजल घर से बाहर जाती तो काॅलोनी की औरतें कहती कैसी बहू ले आए कपड़े पहनने का ढंग ही नहीं, साड़ी पहनना तो दूर, सूट का दुपट्टा भी सिर पर नहीं रखती। शर्मा जी की बहू खानदान की इज्जत मिट्टी में मिलाने में कोई कमी नही रखती। सेजल जब भी अपने काम पर जाती तो … Read more

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