एक समझौता – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi
“क्या ये दिन देखने के लिए हमने तुझे इतना पढ़ाया-लिखाया—-? और तेरी शादी करवाई —? कृष्णकांत जी गुस्से से लाल- पीले हुए जा रहे थे। बेटा नितिन चुपचाप पिताजी की नाराजगी को सहन कर रहा था। सामने मंजू देवी बुखार से कराहते हुए पति कृष्णकांत से बोलीं बस –। अब चुप भी करो जी—! मेरी … Read more