तुम ऐसे तो ना थे – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

घड़ी की सुइयों के साथ साथ आज अवन्ति के हाथ भी जल्दी जल्दी काम कर रहे थे ।काम ख़त्म कर घर से निकलते हुए अपनी माँ से बोली ,”मैंने सब कुछ तैयार कर दिया है , तुम और पापा वक़्त पर खाना खा लेना और दवाइयाँ भी याद से ले लेना।” तभी माँ ने आवाज़ … Read more

पराये धन की रौनक… – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

बेटियां तो पराया धन होती हैं… हर लड़की ये सुनते सुनते बड़ी हो जाती हैं और एक दिन पराया धन बन चली जाती दूसरे की तिजोरी में…..उनलोगो ने संभाल कर रखा तो अहो भाग्य… और नहीं संभाला तो हतभाग्य … पर क्या किसी के जिगर का टुकड़ा पराया धन हो सकता  हैं …                          ना … Read more

सौभाग्यवती – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

।आज सुबह सुबह ही  मालूम हुआ कि काकी चली गई ।मन बहुत उदास हो गया ।काकी का सबके लिए, हर पर्व त्योहार, जन्म दिन, विवाह की वर्षगांठ पर रटा रटाया आशीर्वाद रहता-” सौभाग्य वती भव” चाहे अपना हो या पराया ।काकी ने कभी किसी से भेदभाव नहीं किया ।वह थी तो उड़िया ,लेकिन कोशिश करके … Read more

अहमियत – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“मम्मीजी,आज फ्रेंडशिप डे पर हम सभी फ्रेंड्स का मूवी और डिनर का प्रोग्राम है। मैं जाऊॅं ना? स्नेहा ने आशा भरी नजरों से मालती जी की ओर देखते हुए पूछा। “कबतक आ जाओगी?” “जी, रात में 9:30 बजे तक आ जाऊॅंगी।” “इतनी देर रात तक अकेले बाहर रहना घर की बहू-बेटियों को शोभा नहीं देता। … Read more

चाभियों का गुच्छा – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ ये क्या कर रही है सुनंदा बहू… अभी आते ही घर की ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की बड़ी जल्दी है तुम्हें जो अपनी तिजोरी की चाभियों का गुच्छा राशि को सौंप रही है।” चाची सास की आवाज़ सुन सुनंदा जी सकपका गई “ क्या हुआ चाची जी हमारे घर की ही तो परम्परा निभा … Read more

गृहिणी को भी तनाव मुक्त जीवन चाहिये – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

“तुमसे एक काम सही से नहीं होता, कितनी बार कहा है,मेरे कपड़े अलग धोया करो पर तुमको तो हर काम में जल्दी रहती है,वाइट टी शर्ट पीली कर दी “। रमन जी गुस्सा हो कर बोले। “आपके कपड़े मैंने अलग धोये थे आपकी पीली टी शर्ट का कलर लग गया “नेहा बोली। “अपनी लापरवाही को … Read more

शनिवार रविवार पलटवार – विमल चन्द्र पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

‘‘कइसी थी पिच्चर ?’’ ‘‘बहुत अच्छी लगी हमको तो। आपको कइसी लगी ?’’ ‘‘हमको कुछ खास नहीं लगी। ऐसी पिच्चर जब हम इनवसटी में पढ़ते थे तो ठीक लगती थीं। अब इ सब तुमको ठीक लगेगा, तुम कम पिक्चर देखी हो न ?’’ ‘‘कम क्या….हम सादी के तीन साल में जितना पिक्चर आप के साथ … Read more

समयरेखा – अंजू शर्मा : Moral Stories in Hindi

“छह बजने में आधा घंटा बाक़ी है और अभी तक तुम तैयार नहीं हुई!  पिक्चर निकल जाएगी, जानेमन!!!” मानव ने एकाएक पीछे से आकर मुझे बाँहों में भरते हुए ज़ोर से हिला दिया!  बचपन से उसकी आदत थी, मैं जब-जब क्षितिज को देखते हुए अपने ही ख्यालों में डूबी कहीं खो जाती, वह ऐसे ही … Read more

पीठा – रामजी तिवारी : Moral Stories in Hindi

जेठ में सिर्फ दो दिन बचे हैं और इन्हीं में से किसी एक दिन पीठा चढ़ाना है। कल या परसो। सुंदरी देवी परेशान हैं। सोचती हैं, अपने पति की बात को पहले ही ठुकरा दिया होता तो अच्छा होता। लेकिन वो उनके झाँसे में आ गई। यह बात तो वैसाख महीने में ही उनके कान … Read more

तब तो जीजा जी का दोगुना खर्चा हो गया होगा !! – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

“आ गए आप !! , दरवाजा खोलते ही अपने पति वरुण को खड़ा देखकर रिया चहकते हुए बोली । ” हां, आ गया … तभी तो सामने खड़ा हूं ।” वरुण भी शरारत से बोला तो रिया हंस पड़ी । अंदर आते ही सामने बैठक में बैठी हुई वंदना जी भी बेटे को वापस आया … Read more

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