मेरी बहु रानी – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मां जी… आप इस तरह  गिड़गिड़ाती हुई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, मुझे तो मेरी पहली वाली कड़क और तुनक मिजाज सासू मां चाहिए! नहीं बहू… मैंने तुम पर कितने जुल्म किए हैं किंतु फिर भी तुमने ही मेरी सेवा का ठेका क्यों लिया? मरने देती मुझे या मुझे मेरे कर्मों की सजा तो भूगतने देती, … Read more

बहुरानी – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

जब से भाभी मेरे घर में दुल्हन बन कर आई तभी से बाबूजी  अम्मा भाभी को दुलहीन कह के पुकारती थी, उस समय मेरी उम्र पंद्रह साल की थी… मैं सोचती थी मेरी सासू मां मुझे बहुरानी कह के पुकारे तो कितना अच्छा लगेगा.. दुल्हिन तो देहाती जैसा लगता है…अम्मा लकड़ी के चूल्हे के पास … Read more

अफसोस बस इसी बात का – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

क्या देख रही हो अरुणा? अफसोस हो रहा है? यह सोच कर के काश मैं अपनी हठ छोड़ दी होती तो आज हम शर्मा जी के जैसे ही सपरिवार दिवाली मना रहे होते! सच बताओ उन्हें ही देख रही हो ना तुम? अशोक जी ने अपनी पत्नी अरुणा से कहा  अरुण जी:   कैसा अफसोस? … Read more

स्वर्ग यहां-नरक यहां – शुभ्रा बैनर्जी  : Moral Stories in Hindi

दीपावली की लंबी छुट्टी मिली थी स्वाति को।ऊपर से बेटी भी आ रही थी।उसके आ जाने से त्योहार की भागदौड़ नहीं करनी पड़ती थी स्वाति को। आते ही फरमान जारी हो गया उसका”मम्मी,इस बार दीवाली में कांजीवरम साड़ी ही पहनना पड़ेगा।पापा के दिए झुमके भी निकाल दूंगी।मैं भी पायल पहन ही लूंगी।सारे काम समय से … Read more

अफसोस – डाॅक्टर संजु झा: Moral Stories in Hindi

अपने घर की बालकनी में बैठी उमा एकटक सूरज को निहार रही थी।उसकी जिन्दगी की तरह शाम का सूरज ढ़लते दिन का आभास करा रहा था।उसकी जिन्दगी का सूरज भी तो बेवफा निकलकर रात के अंधेरे में गुम हो गया। उमा को सदैव अफसोस रहेगा कि उसकी खुद की गलती के कारण ही उसका प्यार … Read more

परिवर्तन – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    अरे,सुमन ये अपने फ्लैट में लाइट क्यों नही है?पूरी सोसाइटी में तो बिजली आ रही है।         वो हम समय से पहले रिचार्ज कराना भूल गये थे ना,इसलिये आज बैलेंस समाप्त हो जाने के कारण बिजली कट गयी है।आज रात अंधेरे में ही काटनी पड़ेगी,सुबह 9 बजे के बाद ही री कनेक्शन हो पायेगा।         क्या——अपनी बिजली … Read more

बेटी – एम पी सिंह: Moral Stories in Hindi

पूनम की डोली ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में ननद और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति अंगद की अच्छी नोकरी थी। सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। परंतु पूनम की ननद बिमला ज्यादा घुल मिल नहीं रही थीं।  उसे भाभी की … Read more

इतना गुमान ठीक नही .….. परिस्थितियां मौसम के तरह जाने कब रंग बदल ले – रंजीता पाण्डेय   : Moral Stories in Hindi

रीता जी (उम्र बयालीस साल)  और उनकी बेटी रिया  (सोलह साल) दोनो एक साथ रहती थी | रिया के पापा अमेरिका में  काम करते थे | दो , तीन साल में घर आते थे ,वो भी कुछ महीनो के लिए |   लेकिन वो हमेशा रीता जी को बोलते की रिया का अच्छे से ध्यान … Read more

गुमान – पुष्पा पाण्डेय  : Moral Stories in Hindi

“कुसुम! एक साल हो गया, क्या तुम्हें माँ से मिलने का मन नहीं कर रहा है? हाँ भाई अब मैं किस काम की रही, बूढ़ी जो हो गयी हूँ।” कुसुम अपनी माँ की उलाहना सुनकर बड़े प्यार से उसे समझाने की कोशिश करने लगी। “ ऐसी बात नहीं है माँ। जब से पैर का ऑपरेशन … Read more

अंतर – मंजू सक्सेना : Moral Stories in Hindi

“माँ… जानती हो आज मेरे पास एक अजीबोगरीब मुकदमा आया था…”,मनीष शाम को कोर्ट से लौट कर माँ के साथ चाय पीने के दौरान अचानक बोला तो माँ की नजरें उसकी ओर उठ गई। “हाँ…माँ…आज एक ऐसा मुजरिम मेरे सामने आया जिस पर शराब पी कर किसी की हत्या करने का आरोप था।पर जानती हो … Read more

error: Content is protected !!