प्रतिस्पर्धा से परे – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi
रजत और आदित्य। नामों में तो सामंजस्य था, पर ज़िंदगी में सिर्फ प्रतिस्पर्धा थी। बचपन के दोस्त कब एक-दूसरे के सबसे कटु प्रतिद्वंद्वी बन गए, पता ही नहीं चला। स्कूल में अंकों की दौड़, कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट की जंग, और फिर कॉर्पोरेट जगत में पदोन्नति के लिए छीना-झपटी। रजत हमेशा खुद को दूसरे स्थान … Read more