पछतावा – अभिलाषा श्रीवास्तव :  Moral Stories in Hindi

“मेरी मम्मी मेरे साथ रहेगी “ उदय ने कहते हुए माँ की पैकिंग करने लगा राघव जी गुस्से भरी हुई नज़र से पत्नी को देख रहे थे और अनू पत्नी- माँ के बीच में फंसी मृगतृष्णा सी बैचैन थीं बेटे के साथ जाकर पति को दूखी नहीं करना चाह रही थी वही उदय जिसने दिन … Read more

एक सालगिरह ऐसी भी – ज्योति आहूजा :

 Moral Stories in Hindi पंकज और संध्या पुणे की एक सुंदर सोसायटी में रहते थे। पंकज की नौकरी काफी अच्छी थी, पैकेज भी शानदार था, और घर में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं थी। बच्चे—बड़ी बेटी सृष्टि (24 वर्ष) और बेटा आदित्य (22 वर्ष)—भी अच्छे कॉलेजों में पढ़ चुके थे। सब कुछ व्यवस्थित और … Read more

काली रात – सरिता कुमार :

 Moral Stories in Hindi 6 जून 1991 की वो काली रात तीन साढ़े तीन दशक बाद भी मुझे खूब अच्छे से याद है । एस के मेडिकल हॉस्पिटल का आई सी यू वार्ड रात के साढ़े आठ बजे होंगे पापा आक्सीजन सिलिंडर से सांस ले रहे थें । स्लाइन की बोतल टंगी हुई थी । … Read more

मुफ्त की चाकरी – रश्मि झा मिश्रा :

 Moral Stories in Hindi लाली का ब्याह चंदन से हुआ था… चंदन राधा का इकलौता बेटा था… राधा चंदन के बचपन में ही गुजर गई थी… चंदन अपनी काकियों और आसपास के सब, दूर पास के रिश्तेदारों के घर… उठते बैठते… उनके छोटे बड़े काम, सौदे निपटाते, डोलते, बड़ा हो गया था… कोई खास पढ़ाई … Read more

जीवन साथी की तलाश – अमिता कुचया :  Moral Stories in Hindi

आज घर में चहल पहल थी कि चलो सीमा का रिश्ता तय हो रहा है। वह सांवली रंगत की थी।उसकी फोटो को फिल्टर से सुंदर बना कर भेजा गया था। आज पांचवी बार लड़के वाले देखने आ रहे हैं ,दोपहर खाने की तैयारी के साथ सीमा को मेकअप करके तैयार किया गया।ताकि सीमा का रंग … Read more

सांझा चूल्हा – गीतू महाजन :  Moral Stories in Hindi

दीवार के उस तरफ से आते हुए शोर से परमिंदर कौर को अंदाज़ा हो गया था कि उसके देवर चरण सिंह की बेटी नवजोत कौर के रिश्ते के लिए लोग इकट्ठे हुए होंगे।आस पड़ोस की औरतों से उसे कुछ बातें तो पता चल ही गई थी।रात को जब परमिंदर के पति सुजीत सिंह और उसका … Read more

कुछ बेटे भी पराये होते है – संगीता अग्रवाल :  Moral Stories in Hindi

” माँ मुझे भी अपना कमरा चाहिए जैसे भैया का बनवा रहे हो मेरा भी एक बनवा दो ना!” पंद्रह साल की नंदिनी अपनी माँ गीता से बोली. ” तू दादी के कमरे मे रहती तो है अपना कमरा क्यों चाहिए फिर तुझे!” गीता ने उससे पूछा. ” माँ दादी मुझे उस कमरे मे कुछ … Read more

रिश्ते जो झगड़े में भी हारते नहीं – ज्योति आहूजा

नील और परिधि ।इनकी शादी को 5 वर्ष बीत चुके हैं। आम परिवारों की तरह यह भी आपस में कभी तो प्रेम का भाव दिखाते हैं तो कभी बच्चों की तरह लड़ते नजर आते हैं। अब कुछ समय पहले की ही बात है। नील परिधि से कहता है “मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही … Read more

तमाचा – परमा दत्त झा :  Moral Stories in Hindi

अरे न्यू मार्केट चलेगा -राधा ने टैम्पो वाले से पूछा। जी चलिए -वह विनम्रता से बोला। पर मैं डेढ़ सौ रूपए दूंगी।-वह बोली। इसपर उसने हां में सिर हिलाया। वह बैठी तो आराम से अपना बैग टैम्पू में रख दिया।इतना ही नहीं न्यू मार्केट तक वह एक शब्द नहीं बोला। बस वह न्यू मार्केट आकर … Read more

 संयोग – परमा दत्त झा :  Moral Stories in Hindi

आज रानी परेशान थी कारण वह आटो वाला उसे देखता था तो पूरी आवभगत के साथ सम्मान के साथ बिठाता था। परंतु न जाने क्या था कि उसे बुरा लगता था। इस आटो बाले का नाम बबलू है।बस सवारी ढोना,काम से मतलब रखना,फिर इसे देखने का कारण — वह परेशान हो गयी तो पति से … Read more

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