एक दूजे के लिए – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

दिसंबर का महीना अपनी अलसाई आँखें जल्दी खोलना नहीं चाहता था, ऐसे में भला सूरजदेव भी नहीं दिखते थे , और दिखते भी तो किसी बुजुर्ग स्वभाव वाले मानव की तरह ठंडे, जिसे समय ने विनम्रता का चोला पहना दिया हो । खैर , मुझे तो उठना ही पड़ेगा ,सोचते हुए शुक्ला जी उठ बैठे … Read more

ढलती सांझ – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

” चाचाजी, कल जो अंकल यहाँ आये है ं ना, उन्होंने कल से कुछ भी नहीं खाया है | सुबह की चाय भी नहीं पी है और अब नाश्ता भी नहीं कर रहे हैं |” मालती ने रमाशंकर जी से कहा |          ” तुमने पूछा नहीं , क्यों नहीं खा रहे  हैं? ” रमाशंकर जी … Read more

जीवन की इस ढलती सांझ में उन्हें आपसे क्या चाहिए – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

 राजन घड़ी दो घड़ी बस आपका साथ आप उनसे उनका थोड़ा बहुत हाल पूछ लो उनके पास बैठकर प्यार से बात कर लो इसके अलावा उन्हें नहीं चाहिए कुछ, क्यों पेंडुलम की तरह नचा रहे हो दोनों भाई अपने ही पिता को। लेकिन राधिका मैं पिछले 6 महीने से पापा को अपने साथ रख रहा … Read more

नई सुबह – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    ” ममता…ज़रा मेरी पीठ खुजला दे…।”       ” अभी आई…।” कहकर ममता शकुंतला जी की तरफ़ बढ़ी ही थी कि शीलप्रभा जी ने उसे आवाज़ दे दी,” ममता बहन..मेरी चोटी तो बना दे..।”       ” अभी आई शील दीदी..।” कहते हुए ममता  शकुंतला जी पीठ खुजलाकर शीलप्रभा जी के बिस्तर पर बैठकर उनकी चोटी बनाने लगी।तभी पास … Read more

बट्टा लगना – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

कुछ बच्चे माता-पिता की प्रतिष्ठा  धूमिल  कर  उनकी इज्ज़त  पर बट्टा लगा देते हैं, जिससे समाज में उनका सिर शर्म से झुक जाता है। शशि भूषण सिंह ने सपने  में भी  कभी नहीं सोचा था कि अपने बेटे निखिल की करतूतों  के कारण उन्हें समाज में शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है। शशि भूषण सिंह के … Read more

“ढलती सांझ और मजबूत होते प्यार के बंधन” – कविता अर्गल : Moral Stories in Hindi

अविनाश और शीला जी गुलाबी गुलाबी ठंड में अपने आंगन में आती कुनकुनी धूप में बैठकर चाय का आनंद ले रहे थे।उनके अब तनाव रहित आराम के दिन गुजर रहे थे। वें दोनों बच्चों की सारी जिम्मेदारियों से मुक्त हो चुके थे,और बहू -बेटे के साथ जीवन की संध्या का ये समय बड़े मजे से … Read more

माँ तुम तो समझो – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ देखो अपने लाड़ले पर जरा लगाम कसो… नहीं तो कल को मेरे हाथों कुछ हो जाएगा तो फिर मुझे दोष मत देना… जाने कितने मन्नतों के बाद हमारे घर ये बेटा पैदा हुआ पर हमारी क़िस्मत पर बट्टा लगाने में लगा है ।” महावीर सिंह ग़ुस्से में बोले जा रहे थे उधर कमरे के … Read more

धड़ाम! – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

दोपहर का काम खत्म करके रमा अपनी जेठानियों के साथ गप्पें मार रही थी। सासू माॅं मालादेवी भी अपने कमरे में आराम कर रही थी। तभी किचन से खूब जोर की धड़ाम! की आवाज आई।आवाज़ सुन मालादेवी और उनकी बहुऍं किचन की ओर दौड़ पड़ी। वहाँ रमा के ससुर जी(बाबूजी) मुँह में लड्डू ठूँसे दोनों … Read more

स्वार्थ – खुशी : Moral Stories in Hindi

मीता शादी हो कर आई तब घर में सास ससुर पति धीरज और ननद  रीमा जो शादी शुदा थी पर हर समय मायके में ही रहती थीं । मीता ने शुरू शुरू में तो सबको बहुत प्यार से बांधने की कोशिश की पर जल्द ही उसे समझ आ गया कि उसकी सास एक स्वार्थी महिला … Read more

यात्रा, फुटपाथ से घर तक की – मनु वाशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

आज जो मैं बताने जा रही हूं, वह कोई कहानी नहीं, बल्कि एक हकीकत बयां करता फुटपाथ से घर तक की यात्रा का प्रसंग है। ट्रिंग ट्रिंग… किसी अपरिचित का फोन था, तीन या चार जुलाई 2024 को, अशोक वाशिष्ठ ने व्यस्तता के चलते फोन रिसीव नहीं किया।अगली सुबह उन्होंने ट्रू कॉलर पर देखा तो … Read more

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