बिंदी – प्रवीण सिन्हा : Moral Stories in Hindi

 भाई साहब बिंदी भी क्या चीज है । नारी के माथे पर लगे तो नारी का श्रृंगार पुरूष के माथे पर लगे तो तिलक  । बिंदी को नारी के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। सच कहू तो ब्रम्हांड का आकार भी तो बिंदी के समान है । जीवन के आरंभ में भी बिंदी और … Read more

“अनकहा दर्द” – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

मैं स्कूल जा रही थी ड्राइवर अंकल के साथ। जाते समय सड़क किनारे एक बूढ़ी अम्मा दिखाई दी जो सर्दी में कपकपा रही थी। उनके शरीर पर एक छोटा सा कंबल था जो उनको पूरी सर्दी से बचाने में असमर्थ हो रहा था। मेरे मन में इनको देखकर बहुत दुख हुआ मेरा मन दर्द से … Read more

निस्वार्थ भाव – शालिनी श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

  घर चलो अजय, मां ने दोपहर का खाना तैयार करके रखा होगा… तुम भी खा लेना… नहीं तो फिर बाहर का खाना खाओगे और रोज बाहर का खाना हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता…. रवि ,तुम कब तक मुझे रोज यूं ही घर ले जाकर खाना खिलाते रहोगे??? अजय तुम ऐसा क्यों सोचते हो??? … Read more

आपबीती – चांदनी खटवानी : Moral Stories in Hindi

जया और मैं अपनी अपनी बेटी को लेकर.. रोज पार्क जाते एक नियत समय पर! दोनों बच्चियां खेलती रहतीं और हम लोग भी क्वालिटी टाइम स्पेंड करते! इधर तीन-चार दिनों से जया की मां का लगातार फोन आ रहा था.. उनकी तबीयत ठीक नहीं थी.. तो जया से मिलने आने को‌ कहती रहतीं.. पर वह … Read more

“माँ की सीख ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“भाभी कैसा खाना बनाया है आपने आपको जरा भी खाना नही बनाना आता क्या हद है पता नही भैया कैसे झेल रहे आपको !” शादीशुदा ननद मायके मे भाभी से बोली। ” दीदी अभी मुझे यहां का हिसाब नही मम्मी जी भी घर पर नही थी और आपको तो पता है मेरी तबियत भी ठीक … Read more

पैसे का गुरूर – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

हमारे मुहल्ले में सप्ताह में दो दिन हाट लगता था।मंगल और शुक्रवार को ।हमलोग अक्सर हाट से एक हफ्ते की सब्जी खरीद लेते थे।उसदिन मंगल वार था और मेरे पति आफिस से खाने के लिए दोपहर में आये तो कहा “लाओ थैला और पैसे, सब्जी ले आता हूँ ।अभी ताजी ताजी सब्जी मिल जायेगी ।मैंने … Read more

संस्कार – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

    ताईजी  आपने हर वस्तु ,हर रिश्ते से ऊपर पैसे रखे है मुझे मम्मी और पापा ने पैसों से ज्यादा इंसानियत को महत्व देना सिखाया है । गगन की बात सुनकर आशा जी कुछ सोच में पड़ गई। सच ही तो है आज गगन को नहीं अपितु उनको ही गगन की जरूरत है। अच्छा चलता हूं … Read more

वो ममतामयी सास तो मैं ममतामयी बहु – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

ट्रिन ट्रिन ट्रिन काॅलवेल की आवाज सुनकर रमा देवी इटके से उठकर बड़बड़ाती दरवाजे की तरफ लपकी अरे भई कौन है? आ रही हूँ …ऐसा नहीं एक बार बजा दें, स्विच पर हाथ रखा नहीं तब तक नहीं हटाते जब तक कि दरवाजा न खुल जाए।दस काम रहते घर में करने को और ऊपर से … Read more

हैसियत ! – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

अंजना देख रही थी कि रागिनी और रमन के पांव आज जमीन पर नहीं पड़ रहे । उनके बच्चे भी खुशी से  इठलाते हुए घर-भर में घूमते फिर रहे थे। खुशी होती भी क्यों न उन्हें ? ‘किराएदार’ शब्द में छिपी सामाजिक अवहेलना तथा उसके कटु अनुभवों को झेलते हुए आज एक लंबे समय के … Read more

गुनाहों का कभी प्रायश्चित नहीं होता – प्रतिभा भारद्वाज ’प्रभा’  : Moral Stories in Hindi

“मां जी क्यों न हम एक बच्चा गोद ले लें….” “बहू, तुम्हें होश भी है कि तुम क्या कह रही हो….बच्चा गोद ले लें…..तुमने ये सोच भी कैसे लिया कि मैं किसी और का बच्चा गोद लेने के लिए मान भी जाऊंगी… ये बात अलग है कि तुम ही हमें बच्चे का सुख नहीं देना … Read more

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