निशा – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 आज बहुत लंबे अंतराल के बाद निशा अपनी छोटी बहन नंदिनी के घर आई थी हालांकि उनके घर के बीच में केवल 1 घंटे का रास्ता था। न जाने कब से नंदिनी उसे अपने यहां बुला रही थी “दीदी आ जाओ परिवार सहित, आप हमेशा अपने घर बुलाती रहती हो, आप भी तो कभी हमारे … Read more

अधूरी कहानी – अनिता मंदिलवार सपना : Moral Stories in Hindi

एक बड़ा सा महल जैसा घर । रहन सहन उच्च कोटि का । घर में बीसों नौकर चाकर । बेटा, बेटी, बहू और दामाद । सब हैं । घर पर कुछ शोर सुनाई देता है । यहाँ क्या शोर हो रहा है भई ! मिस्टर शर्मा घर के अंदर दाखिल होते ही कहते हैं । … Read more

संस्कार – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

मोबाइल की घंटी  बजते ही रसोई घर  से निकलते हुए   मधुमिता जी ने काव्या को आवाज लगाई ,जरा देखो किसका फोन है ?  ये लड़की भी हमेशा कानों में ईयर फोन लगाए रहती है, सुनती ही नहीं ।  फोन पर राज था ,   उसकी आवाज़ सुनकर  मां की आवाज़ बदल गई , उसने … Read more

नेचुरल हैं – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

जब से मेरे काले-घने, नागिन-से लहराते बाल सफ़ेद होने लगे, मेरी सहेलियाँ और हितैषियों ने अपने सलाह- मशवरों का पुलिंदा ही खोल दिया था। कोई कहता मेंहदी लगा तो कोई हेयर डाई का नाम बताता।कोई लोहे का तवा देने को तैयार हो जाता तो कोई आँवला-त्रिफला की विशेषता गिनाने लगता। एक ने तो यहाँ तक … Read more

जीवनदान – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

जीवन में गरीबी के कारण बहुत संघर्ष झेले उसने पर कठिन परिस्थितियों से निजात पा ही लिया । एक सप्ताह बाद शादी को पाँच साल होने वाले थे । पर घर में कोई उत्साह ही नहीं था । उसका नाम था मनोरमा ।  जहाँ जिस कोने में जाती हर किसी के दिल में एक अमिट … Read more

विष उगलना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रचना बहुत ही अमीर घर की बेटी थी । शादी भी बहुत अमीर घर में हो गई ।फिर क्या था ,छोटे  लोग,यानी गरीब लोगों को कुछ समझती ही नहीं थी।  अपने घर काम करने वाली कमली को हमेशा बुरा भला बोलती रहती थी । एक दिन कमली का पति बहुत बीमार था ।कमली ने बोला … Read more

तेरे किया का कहीं मुझे ना भुगतना पड़े – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ बस कर नंदा… कितना विष उगलना बाकी रह गया है?” अचानक से ये आवाज सुनकर नंदा दरवाज़े की तरफ देखने लगी  सामने उसकी माँ जानकी जी खड़ी थी । नंदा के चेहरे की हवाइयाँ उड़ गईं… माँ अचानक यहाँ कैसे आ गईं… कहीं सासु माँ ने तो नहीं बुलाया है तभी पीछे से आवाज़ … Read more

बचुआ! इक छोटा-सा ‘मुबैल’ हमें भी दिला दो.. – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 आज शनिवार है। पूरे एक हफ्ते बाद दादी पहले वाली दादी बन गई हैं। इतनी कड़कती ठंड में भी , पापा के मना करने के बावजूद, उन्होंने सुबह-सुबह अपना बिस्तर छोड़ दिया और नहा-धोकर, हाथ में माला लेकर वे पुनः अपने बिस्तर में विराजमान हो गईं और अपनी चिर-परिचित ऊंची आवाज में बहू को इतनी … Read more

कन्या भोज – प्रवीण सिन्हा : Moral Stories in Hindi

आशीष की पत्नी सुरेखा बड़ी धार्मिक स्वभाव की हैं साल के दोनो नवरात्रि के साथ एकादशी का व्रत हर महीने रखती हैं । एकादशी में पंडित जी को दान करना नहीं भूलती हैं । दोनो उच्च शिक्षित हैं और दोनो ही मल्टीनेशनल कम्पनी में सर्विस करती हैं । अच्छा खासा वेतन हैं यही कोई 22 … Read more

आत्मसम्मान – प्रवीण सिन्हा : Moral Stories in Hindi

बशीर मिया 65 के हो चले हैं पर काम करना नहीं छोड़ा सरकारी नौकरी थी 58 मे पटवारी के पद से रिटायर्ड हो गये  थे । पर उनका मानना था कि जब तक उपर वाले कि बुलावा न आ जाये तब तक आदमी को हाथ पैर हिलाते रहना चाहिए पैसे की दरकार न हो त … Read more

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