कन्यादान – कंचन श्रीवास्तव
घूंघट के भीतर से आंखों ने रेनू को ढूंढ़ लिया और जैसे ही दोनों की नज़रें मिली दोनों ही फफक पड़ी रेनू के सामने रिया का वही दुधमुंहा चेहरा सामने घूम गया जब हो रूई के फाहे से उसे दूध पिलाया करती थी। और रिया भी आंचल में मुंह डालके सारे आंसुओं को उड़ेल देना … Read more