पापा चले गए – रीटा मक्कड़

कितने खुश थे उसदिन पापा बिटिया का रिश्ता जो तय हो गया था और वो भी बहुत अच्छे घर मे।लड़का भी बेऐब बहुत हैंडसम और मेहनती था। पढ़ीलिखे और खानदानी लोग थे। जिसने रिश्ता करवाया वो भी पापा के बहुत करीबी जानकारों में से था इसलिए उन्हें मन से बहुत तसल्ली थी कि अब उन्हें … Read more

सासु मां की सोच” – मीनाक्षी राय

नीता के पिता और समर पिता दोनों दोस्त थे|  समर  के पिता बैंक में ऑफिसर थे, समर चार भाई-बहनों में छोटा था | नीता के पिता गांव में किसान थे| नीता के पिता और समर के पिता एक ही विद्यालय में पढे थे,  निता के पिता के पिता को चुकी जमीन जायदाद बहुत थी, तो … Read more

आज सब चुप थे वह बोलती थी – चांदनी झा

अजीब सी चुप्पी थी घर में। आखिर आज भी लड़केवाले, निशा के लिए मना कर के गये। फ़ोटो भेजा था मोबाइल में लड़केवालों को। पर उन्होंने कहा, लड़की थोड़ी हेल्दी है। वो तो दादी बड़बड़ाने लगी तो सबका ध्यान इद्दर-उधर हुआ….. लड़के वाले का फोन आते ही दादी, तो बड़बड़ाने लगी। अरे हेल्दी क्या है? … Read more

अनुरोध – गोमती सिंह

शाम का समय था । सूर्य देवता अस्तांचल की ओर रवाना करनें लगे थे । पक्षी वृन्द अपनें अपनें नीड़ की ओर वापस हो रहे थे । वातावरण में अंधेरा छाने लगा था। अंधेरे में डूबते इस दृश्य को देखकर सुनीता का मन उदासी के सागर में खोने लगा ।               वह सोंचने लगी कि क्या … Read more

इंसानियत – कंचन श्रीवास्तव

रिया के होने के साथ ही रेखा की चिंताएं बढ़ने लगी बढ़ना लाज़िमी भी है बेटी जो ठहरी ,भले आज जमाना बदल गया है बेटियां बेटों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही पर देख भाल रहन सहन चाल ढाल का ख्याल तो रखना ही पड़ता है उसे ऐसी परवरिश देनी होगी जिससे आगे चलकर … Read more

मैडम – अनुपमा

रफ्तार से भरी सड़क पर अचानक से एक छोटी बच्ची को देख मैडम घबरा गई और दौड़ कर उसे गोद मैं उठा लिया , साथ ही चारो तरफ देखने लगी की किसने इसे मरने को बीच रास्ते पर छोड़ दिया ,देखा पास ही मरणासन्न स्तिथि मैं अर्धनग्न औरत पड़ी है ,जिंदा है भी की नही … Read more

भरोसा – नीलम सौरभ

काम से थके-माँदे लौट कर घर में प्रवेश करते विनोद ने देखा, दूसरे मोहल्ले में रहने वाली उसके दूर रिश्ते की चाची उसके घर से निकल कर बाहर जा रही थीं। दोनों ने ही एक-दूसरे को देखा मगर चाची ने कोई बात नहीं की और झटपट अपने रास्ते हो लीं। घर के भीतर विनोद ने … Read more

राजयोग – गरिमा जैन

आज कितने दिनों के बाद रचना से मुलाकात हुई, दिनों नहीं सालों कह सकते हैं। स्कूल टाइम में तो वह कितनी तेज तर्रार लड़की हुआ करती थी। हर चीज में आगे। हम उसे ऑलराउंडर कहकर बुलाते थे। हंसी मजाक करना तो कोई रचना से सीखता। छोटी-छोटी बातों पर ऐसे चुटकुले, ऐसे जुमले कस देती कि … Read more

आखिरी अलविदा – गरिमा जैन 

समीर :”आज तो तुम बहुत खुश लग रही हो ,ऐसे तो कुछ भी कर लो तुम्हारे चेहरे पर तो मुस्कुराहट आती ही नहीं। ऐसा क्या छपा है अखबार में जिस को पढ़कर तुम्हारी मुस्कुराहट ही नहीं थम रही।” उर्मिला: “नहीं कुछ नहीं बस ऐसे ही कुछ याद आ गया” समीर:” अरे क्या याद आ गया … Read more

मैंने अपनी बेटी ब्याही है, बेची नहीं है! – मनीषा भरतीया

नैना एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थी|घर में माता-पिता चार बहनें और एक भाई-भाभी थे। दो बहनों की शादी हो चुकी थी और दो नैना और उसकी छोटी बहन कुंवारी थीं। अब रिश्ते में बंधने की बारी नैना की थी। नैना के लिए कई रिश्ते देखे गए, लेकिन कुछ नैना को तो कुछ नैना … Read more

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