सिर्फ मूर्ति नहीं ,घर की नारी  भी देवी है – सुधा जैन

वसुधा ने अपने परिवार में अपनी मां में जीवन भर एक मर्यादा की  सीमा रेखा में अपने आप को चलते हुए देखा था। प्रतिदिन सुबह उठना, घर के काम समय पर करना, सर पर पल्लू रखना, पूजा करना, आने वाले मेहमानों का यथोचित स्वागत करना, सास ससुर के निर्देशों का पालन करना, बच्चों की अच्छी … Read more

ऐसी ससुराल से तो बेटी घर में भली…. – चेतना अग्रवाल

बड़े भागो वाली है हमारी बेटी… बहुत बेस्ट खानदान से रिश्ता आया है उसके लिये। सबसे बड़ी बात उसके रूप गुणों पर रीझकर खुद से रिश्ता माँगा है। मैं ना कहती थी कि हमारी लाड़ो को तो कोई भी माँग लेगा।” निरूपमा जी घर में घुसते ही बोलीं। “क्या हुआ अम्मा… क्यों इतना शोर मचा … Read more

अपने ग़लतियों सहित अपनाते हैं – सुल्ताना खातून 

“मां मेरे ससुराल के लोग बहुत ही घटिया सोच रखने वाले हैं, बात बात पर मुझे ताने देते हैं मुझसे दिनभर गधों की तरह काम करवाते हैं, किसी को मेरी परवाह नहीं रहती, मां आज मुझे पता चला है, कि मेरा पति शराब भी पीता है और जुआ भी खेलता है, मां शादी से पहले … Read more

बेटी अच्छी, बहू ही बुरी – सुल्ताना खातून 

आज दोनों बहने फिर मिली बैठी थी, सरिता जी के पास तो बहुत सारी बातें होती थी, लेकिन सीमा जी के पास सिर्फ अपनी बहू की शिकायतें…. । सीमा जी की दोनों बेटियां भी आई हुई थीं… अपने अपने बच्चों के साथ… बच्चे घर में धमा चौकड़ी मचा रहे थे… सीमा जी की दोनों बेटियां … Read more

वो “आंखमूंदी गुड़िया” वाला प्यार…! – मीनू झा

लो खिलौनों की कमी थी क्या इसके पास जो फिर तू ये खिलौने ले आई बहू.. तुम दोनों तो एक बच्ची क्या हो गई है पागल ही हो गए हों..पूरे घर को खिलौनों का कारखाना बनाकर रख दिया–बाहर से आई प्रीति के हाथ में खिलौनों का पैकेट देखकर सास रीमा बोल पड़ी। क्या मां..एक ही … Read more

अपने घर के बच्चों में भेद कैसा… रश्मि प्रकाश 

कमला जी के दो बेटे हैं और दोनों एक ही सोसायटी में अपने अपने फ़्लैट में रहते हैं… सब का लगभग हर दिन का आना जाना लगा हीरहता है पर उनकी बहुएँ जरा कम ही एक दूसरे के घर जाती है… कमला जी भी दोनों बेटों के घर बारी बारी और ज़रूरत के हिसाब सेरहती … Read more

यही तमन्ना है – प्रेम बजाज

साहनी साहब बैंक में कार्यरत थे और परिवार भी छोटा सा बस एक ही बेटा, दूसरी संतान ईश्वर ने दी ही नहीं। साहनी साहब और उनकी धर्मपत्नी रोहिणी को बेटी का बहुत चाव था, मगर ईश्वर को शायद मंज़ूर नहीं था, बेटी पैदा तो हुई मगर पैदा होते ही इस संसार से कूच कर गई। … Read more

सर्दी की चादर-देवेंद्र कुमार

स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। सबसे अच्छे तीन चित्रों को पुरस्कार मिला। उसमें रचना का बनाया गुलाब के पौधे का चित्र भी था। स्कूल की ओर से तीनों विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। समारोह समाप्त होने के बाद रचना की माँ प्रतिभा प्रिंसिपल से मिलीं। पुरस्कार के लिए धन्यवाद दिया। फिर कहा- “रचना बताती है … Read more

टींस – अनीता चेची

दसवीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात बहुत सारे विद्यार्थियों ने विद्यालय में प्रवेश लिया। परंतु कुछ लड़कियां ऐसी थी जो घर बैठी हुई थी। उनके माता-पिता उन्हें पढ़ाना नहीं चाहते थे। उनमें से ही एक  थी ‘नंदिनी’ जब मुझे पता चला कि नंदिनी के माता-पिता उसे पढ़ाना नहीं चाहते। मैं उनके घर … Read more

अपने तो अपने होते हैं।  –  पुष्पा पाण्डेय 

नेहा के इंजिनियरिंग की पढ़ाई का अंतिम पेपर अगले हफ्ते था। काॅलेज की पढ़ाई पूरी करने की खुशी से ज्यादा दुख था कि अब वह रोज अनवय से नहीं मिल पायेगी। अनवय और नेहा दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। अपने जीवन साथी के रूप में वे किसी दूसरे की कल्पना भी नहीं … Read more

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