संस्कार – डाॅ संजु झा

संस्कार  मानव जीवन  का अनमोल धरोहर  है।प्रत्येक माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों में  अच्छे संस्कार के बीज बोते हैं।हाँ!यह अलग बात है कि कुछ बच्चे बड़े होने पर  भी अपने संस्कारों के प्रति सजग रहते हैं और कुछ उन संस्कारों  को विस्मृत कर जाते हैं। संस्कार  से सम्बन्धित एक कहानी मेरे जेहन में आ … Read more

मैं ग्वांर नहीं संस्कारी हूं – सुल्ताना खातून

ये क्या पूजा भाभी आप नित नए डिज़ाइन की मेंहदी हाथों पर लगाएं रखतीं हैं…एकदम गवांरो की तरह… सात साल हो गए आपकी की शादी को पर आपको पर आपने शहर का रहन सहन नहीं सीखा…ये पूजा की छोटी नंद कह रही थी जिसकी अब शादी होने वाली थी। पूजा गांव की रहने वाली थी…लेकिन … Read more

संस्कार ही रिश्तों को मज़बूत करते हैं – के कामेश्वरी 

सुभाष चन्द्र के दो संतान थे । एक लड़की जो बड़ी थी बिंदु और उसका छोटा भाई रमेश चंद्र था । सुभाष चंद्र की शादी पहले ही एकबार हो चुकी थी परंतु उनकी पहली पत्नी बिंदु को जन्म देते ही गुजर गई थी । बिंदु की परवरिश करने के लिए उन्होंने फिर से मंजू से … Read more

बेटी के घर में माँओं का दख़ल – कल्पना मिश्रा

“आज क्या-क्या खाया? किसने बनाया?”  “अच्छा, तो तेरी सास क्या कर रही थीं? वो आराम फ़रमाती रहती हैं क्या? “ “क्या? तेरे सास,ससुर भी तेरे साथ पिक्चर /बाज़ार जाते हैं? मतलब? हर जगह पीछे-पीछे लगे रहते हैं, तुझे प्राइवेसी नही देतें?” “नौकरानी नही है तू, क्यों जुटी रहती है?अबकी बार कह देना मुझे ज़्यादा काम … Read more

संस्कार- यात्रा – कमलेश राणा

मैं शायद उस समय छः महीने का था जब मेरे पापा मुझे और माँ को लेकर मुंबई आ गये थे क्योंकि उत्तराखंड के पहाड़ों पर जीवन यापन करना बहुत ही मुश्किल कार्य है। उनके एक मित्र मुंबई में टैक्सी ड्राइवर थे। जब वो गाँव आये तो पापा उनके साथ इस महानगर में भाग्य आजमाने चले … Read more

मिन्नू के संस्कार – दीक्षा शर्मा

‘ आप क्यूं उस छोटे बच्चे को मार रहे हैं अंकल!’ मिन्नू चिल्लाकर बोला। ‘ तुझसे क्या, तू कौन होता है बोलने वाला, छ्टांग भर का लड़का!’ उस आदमी ने अपनी भारी आवाज़ में मिन्नू को डराकर कहा। मिन्नू छोटा था। वह रोने लगा।पर फिर पता नहीं क्या हुआ वह दौड़कर उस नन्हे पिल्ले के … Read more

वारिस – कमला अग्रवाल

बच्चे का मुख चूमते हुए सुधीर ने आवाज दी , ” रुपा मैं चला ,सलोने का ख्याल रखना “। ” अरे ! आज तो चाय पी के जाइए “   ” नहीं रुपा ! तुम जानती हो ,घर पर सुप्रिया मेरा इन्तजार कर रही होगी ,चाय उसी के साथ पिऊंगा ।” रुपा के चेहरे पर … Read more

हीरा पन्ना – सारिका चौरसिया

बहनें दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करती थी,, छोटी बड़ी के बगैर सोती नहीं थीऔर बड़ी ! छोटी को कहीं से आने में जरा सी देर पर परेशान हो जाती थी,, बेटियों ने मां को बचपन से ही अनेकों संघर्षों से जूझ कर भी उनके लिये उत्तम व्यवस्था बनाने की हर संभव कोशिश करते … Read more

संस्कार  – पूनम अरोड़ा

आज फिर काशी अब तक नहीं आई थी। नीता को ऑफिस जाने में देर हो रही थी, वो खुद ही बड़बड़ाती जा रही थी “कितनी बार उससे कहा है कि मेरे जाने से पहले आ जाया कर, बाद में आने से अभय को दरवाजा खोलने उठना पड़ता है और उसकी नींद खराब होती है लेकिन … Read more

मां के संस्कार ने बेटी को बेहतर बनाया, – सुषमा यादव

 बच्चों को शिष्टाचार, तहज़ीब और संस्कार बहुत छोटी सी अवस्था में ही सिखाया जाये,, उन्हें भले बुरे की पहचान कराई जाये,, और किसी भी चीज़ के लिए ज़िद करने की आदत को सुधारा जाए, उन्हें प्यार से, तथा मनोवैज्ञानिक तरीके से समझाया जाये,,तो बच्चे बाद में सिरदर्द नहीं बनते, उनके कारण हमें किसी के सामने … Read more

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