काश मैंने बेटे की जगह पति और पिता बनकर फैसला लिया होता!! – संगीता अग्रवाल  

” माफ कीजिएगा मांजी आपकी बहु के मरी हुई संतान पैदा हुई है !” नर्स बाहर आ उमा जी से बोली। ” क्या ….और मेरी पत्नी कैसी है ?” उमा जी की बजाय उनके बेटे रक्षित ने पूछा। ” वो अभी बेहोश हैं असल में बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी करवाने की चक्कर में उन्होंने पहले … Read more

मॉं! ऑटो रिक्शा वाले अंकल अच्छे नहीं हैं…. – भाविनी केतन उपाध्याय 

” बिट्टू बेटा, जल्दी करो, तुम्हारे ऑटो रिक्शा वाले अंकल आ गए हैं, देखो होर्न पर होर्न बजाए जा रहे हैं” निशा ने अपने सात साल के बेटे को कहा। “मम्मी, आज मुझे पापा के साथ स्कूटर पर जाना है आप अंकल को बता दिजीए ना….. “बेटा, बात को समझो जरा, पापा को तुम्हें छोड़ने … Read more

मोहल्ले वाला प्यार – बरखा शुक्ला 

बिन्नी एक क़स्बेनुमा शहर में रहती थी  । उसके बाबूजी की परचून की दुकान है। अब भई कब और कैसे बिन्नी को पड़ोसी का बेटा विनय भा गया ,पता नहीं । विनय के पिताजी की स्टेशनरी की दुकान थी , शहर में जितने भी स्कूल थे ,उनकी किताबें वहाँ उपलब्ध रहती  , तो दुकान बढ़िया … Read more

माँ जी संस्कारों की बात आप तो कीजिये ही मत – मीनाक्षी सिंह 

संगीता – माँ जी ,आज क्या बनाऊँ खाने में ?? बबिता  जी ( संगीता की सास ) – पूछ तो ऐसे रही हैं ,,जैसे रोज हमसे ही पूछकर बनाती आयी हैं !  संगीता – जिस दिन पापा जी  ( संगीता के ससुर जी ) मंडी से एक साथ सब्जी लाते हैं तो हमेशा पूछकर ही … Read more

 साधना – मधु शुक्ला

आठ वर्ष के इंतजार के बाद मनीषा को मातृत्व सुख प्राप्त होने वाला था। परिवार में सभी बहुत खुश थे। मनीषा के पति शिवम उसका विशेष ध्यान रखते थे। सही समय पर मनीषा जुड़वां बच्चियों की माँ बनी लेकिन उनको पालने के लिए जीवित न रही, वह डिलीवरी के दूसरे ही दिन स्वर्ग सिधार गई। … Read more

 बुनियाद – गुरविंदर टूटेजा

#संस्कार  शुचि तुमने माँ को बता दिया ना कि हम आज पिच्चर जा रहें हैं और खाना भी बाहर से खाकर आयेंगे….शादी के पन्द्रह दिन बाद बाहर जातें समय रमन ने पूछा…??   नहीं रमन मैंने तो नहीं बताया…!!!! हाँ तो अब बोल ना…!!   ये समझ नहीं आया कि बताना क्यूँ है…??   देखो हम संयुक्त परिवार … Read more

अतीत का सबक – डॉ. पारुल अग्रवाल

संजना को आज बेटी सांभवी के करुणा से भरे हुए शब्दों और विनती ने आज से लगभग तीस साल पहले पहुंचा दिया था। जब वो बीस बाइस साल की कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा थी। जिसकी दुनिया घर से कॉलेज और कॉलेज से घर तक ही सीमित थी। जिसे कॉलेज में पढ़ने के लिए तो … Read more

पुनर्मिलन अपने प्यार से – संगीता अग्रवाल 

” शुक्र है अब सब कुछ सामान्य हो गया ..इस मास्क से भी लगभग छुटकारा मिल ही गया है !” नताशा फोन पर अपनी दोस्त शालिनी से बोली। ” हां यार सही कहा तुमने इस मास्क के चक्कर में कितनी लिपस्टिक खराब हो गई पड़े पड़े अब जब सब कुछ खुल गया अब नए शेड्स … Read more

बेटा है तो क्या इसे संस्कारों की जरूरत नहीं – सुल्ताना खातून

सुमित्रा मैंने तकिये के नीचे छूट्टे पैसे रखे थे मिल नहीं रहे….. तुमने रखे हैं क्या…. केशव विस्तर टटोलते हुए बोला, केशव जल्दी में था…. छुट्टे पैसे रखने से किराया देने मे देरी नहीं होती…घर का इकलौता स्कूटर तायाजी ले गए थे….. रजत से पूछिये चाचाजी मैंने उसे नुक्कड वाली दुकान से ढेर सारे चिप्स … Read more

संस्कार बड़ों से ही बच्चों को मिलते हैं – के कामेश्वरी

विनय मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मा था । अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था । पिता एक बहुत बड़े प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे ।विनय बहुत ही होनहार छात्र था इसलिए उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बिट्स पिलानी में पूरी की थी।अहमदाबाद के कॉलेज में आइ बी एम की पढ़ाई पूरी की थी । … Read more

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