मुहब्ब्त – आरती झा”आद्या”

हैलो.. मोबाइल पर पापा फ्लैश होता देख अभिनव बोलता है। क्या.. कब.. कैसे.. अभी आता हूँ मैं.. किस हॉस्पिटल में हैं.. अभिनव बोलता हुआ लगभग दौड़ता हुआ अपने बॉस की कैबिन में पहुँचता है। सर मेरी माँ का एक्सीडेंट हो गया है.. मैं हॉस्पिटल के निकल रहा हूँ… बदहवास सा अभिनव बॉस को सूचित करता … Read more

संभालों अपने संस्कारों को…!! – भाविनी केतन उपाध्याय 

“जब मैंने कोई गलती नहीं की तो क्यों बर्दाश्त करूं? आप को पता था कि मेरे माता पिता गरीब हैं और कुछ देने में सक्षम नहीं है फिर भी आप ने मांजी अपना स्वार्थ ही देखा मेरे माता पिता ने आप को इस बात से अवगत भी कराया था कि आप लोगों में और हमारे … Read more

अब सर्दियों में ठंड से नहीं पर अपनेपन और प्यार से कंपकपी सी लगती है…… – भाविनी केतन उपाध्याय 

” प्रणाम मौसी जी,कैसी है आप और मौसम कैसा है ? “ ” अरे वाह..!! आज तो मेरे भाग खुल गए भई, बड़े दिनों बाद इस बुढ़ी मौसी को कैसे याद किया ? मौसम का तो क्या कहने कभी ठंड तो कभी गर्म जैसा अपना मिजाज .!!” ” मौसी जी, अगर आप को कोई आपत्ती … Read more

संस्कारी दिव्यांग – विनोद प्रसाद 

अस्पताल के बेंच पर अकेला बैठा अरूण बार-बार ऑपरेशन थियेटर के बंद दरवाजे के खुलने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था। भीतर उसकी पत्नी को प्रसव हेतु ले जाया गया था। बैठे-बैठे वह अतीत की गहराइयों में डूबता गया। दुनिया वाले भले ही उसे दिव्यांग मानते थे, लेकिन अरूण ने शारीरिक अपंगता को कभी … Read more

मिष्ठी’ – प्रियंका सक्सेना

दादी आज फिर परेशान हो गई।‌ मिष्ठी उनकी हालत देखकर दुखी हो गई। आइए मिष्ठी और उसके परिवार से आपका परिचय कराती हूॅ॑। मिष्ठी ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक मेधावी छात्रा है। विज्ञान उसका पसंदीदा विषय है। घर में मिष्ठी, दादी, मम्मी आशा और पापा अजीत ही रहते हैं। दादी में मिष्ठी की जान … Read more

परोपकार वर्सेज संस्कार – भगवती सक्सेना गौड़

सुजाता अस्पताल के बेड पर थी, अचानक उसने कहा, “अरे मैं यहां कैसे आयी?” तभी उसे आभास हुआ, सुकन्या बेटी उसका सिर सहला रही है, “हां, मम्मा, आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी पापा ने फ़ोन किया, तो रात को मैं आकर आपको यहां लेकर आयी। अब कैसा लग रहा है।” “ठीक है, … Read more

संस्कार – बेला पुनिवाला 

  सूशीला कि  बेटी आशा की शादी के कुछ महीनो बाद सुशीला  को अपनी बेटी आशा की बहुत याद आ रही थी, तब सुशीला ने सोचा, कि चलो, आज आशा को फ़ोन करके उसका हालचाल पूछ ही लेती हूँ और उसे कुछ दिन यहाँ आने को कहती हूँ। इसी बहाने उस से बात भी हो जाएगी। … Read more

सिर्फ अपने लिए नहीं….. – लतिका श्रीवास्तव 

डॉक्टर की बातें रामदयाल जी के दिमाग में भूचाल पैदा कर रही थीं कि एन मौके पर अगर आप यहां नहीं आते तो हार्ट अटैक हार्ट फेल में बदल गया होता!!….रमा ने संक्षिप्त में बताया था कि आज अदिति और अमीश के कारण ही फ्लाइट बुक हो पाई और आपको यहां लाना संभव हो पाया……..!! … Read more

नई विचारधारा का आगाज़” – भावना ठाकर ‘भावु’

घर में चहल पहल और माँ के चेहरे पर रौनक देखकर गायत्री ने काॅलेज से आते ही पूछा, “मम्मा ये सब क्या है? कोई मेहमान आने वाले है क्या? जो घर को चकाचक कर रही हो” बेटी के सवाल पर सुषमा ने चहकते हुए कहा, “हाँ बेटा जी आप भी चकाचक हो जाओ, आज शाम … Read more

मेरा खून ऐसा नहीं है..! – मीनू झा  

“नीना…मानती हूं शिवांश इकलौता बेटा है तुम्हारा, बहुत प्यार से पाला पोसा बड़ा किया है,पर अपने प्यार को इतना भी अंधा मत बनाओ कि जिन आंखों में बसा कर रखा है उसे..कल वहां सिर्फ आंसू ही रहें”–जेठानी नीना से कह रही थी। जीजी..किसने कहा आपसे कि मेरा प्यार अंधा है..या मेरा बेटा मुझे धोखा दे … Read more

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