रैन-बसेरा – रश्मि स्थापक
“ऐ,मेरी जगह पर ये किसने बोरा बिछाया है…?” बालू ने चिल्लाते हुए कहा। रैन बसेरे में रोज शाम होते ही चीख चिल्लाहट मच जाती।एक तो सर्दियों की रातें फुटपाथ पर सोनेवालों पर भारी गुजरती हैं इसलिए सर्दियों में तो सरकारी रैन-बसेरे में बेघर लोगों की चिल्लपों मची रहती, सब अपनी- अपनी जगह की जुगाड़ में … Read more