बस, इतनी सी चाहत है – शाहीन खान

राहुल अभी तक ऑफिस से घर नहीं आए थे, आज कुछ ज़्यादा ही लेट हो गए, इंतजार करते-करते थक चुकी थी अपर्णा | घड़ी पर नज़र डाली तो 10:30 होने वाले थे, बोरियत से बचने के वह  टीवी ऑन कर सीरियल देखने लगी| सीरियल की कहानी में रोमांचक मोड़ आया ही था कि राहुल की … Read more

चाहत माँ बनने की –  सुभद्रा प्रसाद

 “मैं पूछती हूँ, तुम्हारे भैया, भाभी और कितने दिन यहाँ रहेंगें  ? ” सुमन अपने पति उमेश से पूछी |            “अरे आठ दिन की छुट्टी लेकर आये हैं, अभी छ: दिन हुए हैं, तो दो दिन और रहेंगे |पर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो  ? ” उमेश ने पूछा |           “क्योंकि मैं परेशान हो … Read more

चाहत बस थोड़े प्यार की – कुमुद चतुर्वेदी

  इकलौते भाई और तीन बहनों में बीच की बेटी थी वह।बड़ी बहन पहली संतान होने से पिता की लाड़ली और माँ की चहेती थी,फिर भाई था जो बचपन से ही दुबला, पतला होने के साथ इकलौता बेटा भी था और माँ,पापा का लाड़ला था।उसके बाद वह और उससे छोटी बहन जो सबसे छोटी होने से … Read more

बांँसुरीवाले बाबा – मुकुन्द लाल 

  “अजी सुनती हो!… ड्यूटी पर जाना है, देर हो रही है।… तुम तो सुबह से ही लटक में लाये गये भाई के आगे-पीछे डोलती रहती हो…”   “आ रही हूंँ!… जरा बैजू को सर्ट पहनने में मदद कर रही थी…”   “हांँ! हांँ!… सर्ट ही क्यों?… उसके सिर में तेल डालकर बाल भी संवार दो, उसका श्रृंँगार … Read more

हां यही प्यार है – डा.मधु आंधीवाल

नीलाक्षी हां यही तो नाम है उसका पर सब उसे नीला के नाम से ही पुकारते थे क्योंकि उसकी आंखें नीली थी । रंग गोरा आँखे नीली बाल भी हल्के सुनहरी । पूरे साल बस एक ही बात का इन्तजार रहता कि कब छुट्टियाँ हो और वह नानी के गांव जाये ।  नीला को गांव … Read more

विदेश जाने की चाहत पूरी हुई तुम्हारी,पर मेरा क्या??? – सुषमा यादव

कुछ दिनों से सर्दी खांसी हो गई थी शिवानी को, घरेलू उपचार भी किया, एलोपैथिक दवाएं भी खाई ,पर खांसी जाने का नाम ही नहीं ले रही थी,, वो जल्दी किसी डॉक्टर के पास नहीं जाती,पर जाना पड़ा,, अकेले ही रहती है, ज्यादा तबियत ना ख़राब हो जाये, नहीं तो अकेले अपने आप को कैसे … Read more

नट्टू गट्टू के पप्पा – प्रीती सक्सेना

आज पड़ोस के खाली घर में काफ़ी हलचल सी दिख रही है, लगता है, कोई आने वाला है, तभी जोर शोर से इतनी सफाई चल रही है, चलो कुछ रौनक बढ़ेगी, बातचीत के लिए पड़ोसन तो मिलेगी, सोचकर हम मन ही मन प्रसन्न हुए, और अंदर आ गए, शाम को पौधों को पानी दे रहे … Read more

किसी भी चीज की अति खराब है! – मनीषा भरतीया

शिल्पा ये क्या है…तूम फिर से शुरू हो गई अब यह रोना-धोना बंद करो और जल्दी मेरा बैग लेकर आओ मुझे देरी हो रही है. सूरज प्लीज आप मत जाओ ना मैं आपके बिना नहीं रह पाती मुझे आपकी इतनी ज्यादा आदत हो गई है कि मैं बस सुबह से लेकर शाम तक आपके बिना … Read more

पिता – कंचन श्रीवास्तव

जिद्दी मां-बेटे के बीच,रवि पिसकर रह गया था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे। बब्बू की बढ़ती उम्र और मां के आंचल की छांव के बीच ,उसे एक तरफ कठोर कदम उठाने पर मजबूर करती तो दूसरी ओर उसकी ममता आड़े आ जाती ।इससे वो बहुत परेशान रहता। सबसे बड़ी बात … Read more

और मातृत्व छलक उठा – नीरजा कृष्णा

आज सुबह हमारे घर के बाहर हमारे पुराने फलवाले की आवाज सुनाई दी….आम ले लो आम, रसीले मीठे आम…सुनकर सबका मन खुश हो गया। “मम्मी, आज मोहन भैया फल का ठेला लेकर आए हैं! देखो देखो ,कितने सुंदर पीले पीले आम हैं।” बोलते बोलते नन्ही पीहू की जीभ जैसे स्वाद से भर कर लपलपा गई। … Read more

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