निपुण ही चमकते हैं – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

दिवाकर जी ने अपने बेटे राहुल का अपनी पहुंच और पैसे के लेनदेन से अच्छे स्कूल में एडमिशन करवा दिया और सोचा अच्छे स्कूल की स्टैंडर्ड की पढ़ाई से उनका बेटा जरूर ऊंचे पद पर पहुंचकर भविष्य में उनका नाम रोशन करेगा,इसी सोच में उनके भीतर घमंड ने भी पैर फैलाना शुरू कर दिए , … Read more

परम संतोष – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

   राधा चाची रसोई में काम करने के साथ-साथ बड़बड़ाती जा रही थीं , ‘ऐसे अनाड़ी के पल्ले से बांधी गई हूँ कि सेहत ठीक हो या न हो, रसोई मेें तो हमें ही खटना पड़ेगा।हमारे साथ की सारी सहेलियों के पति और दूर क्यों जाएं रिश्ते- नातों में ही देख लो, आजकल सब आदमी रसोई … Read more

मैं नौकरानी नहीं हूं – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

 मानवी अपना लैपटॉप का चार्जर ढूंढ रही थी और सीमा को गुस्से में चिल्ला रही थी.. मुझे लैपटॉप का चार्जर भी नहीं दिख रहा है… तभी सीमा ने कहा- कि दीदी मैंने उसे अलमारी के अंदर रख दिया था। सीमा ने कहा तुम्हें किसने कहा था? उसे अलमारी के अंदर रखने के लिए अरे !दीदी … Read more

अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत – स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

अरे सुहानी , आज स्कूल से आने में इतनी देर कैसे हो गई ?? राजू आज तो जिद पर ही अड़ गया था कह रहा था मम्मी जब तक नहीं आएगी तब तक खाना नहीं खाऊंगा , ना कपड़े बदलने तैयार था और ना खाना खाने ! बड़ी मुश्किल से मैंने और नैना से समझा … Read more

पैसे का सदुपयोग – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” भाभी…आप इन लोगों को इतना सिर पर मत चढ़ाइये..कहीं ऐसा न हो कि जब आपको ज़रूरत पड़े तब ये मना कर दे और आप#टका-सा मुँह लेकर रह जाएँ…।” ननद नंदा की बात सुनकर निधि कुछ नहीं बोली, बस मुस्कुराते हुए उसके कंधे पर अपना हाथ रख दी।       निधि का पति सुमेश सरकारी नौकरी करता … Read more

बहू को कभी बहू न समझा…!!! – विनोद सिन्हा “सुदामा“ : Moral Stories in Hindi

लिजिए मां जी आपकी अदरक वाली चाय… गर्म चाय की कप सास के सामने पड़ी छोटी टेबल पर रख कर स्मृति मन ही मन भुनभुनाते हुए रसोई में जाने लगी.. “कभी बहू का हक नहीं मिला मुझे…” “जब देखो तब खाली पीली हुक्म चलाती रहती है” बेटी जरा यहां आना,बेटी जरा ये कर देना वो … Read more

अनमोल उपहार – जया शर्मा प्रियंवदा : Moral Stories in Hindi

वर्मा जी की गिनती शहर के अमीर लोगों में हुआ करती थी वर्मा जी की बर्तन बनाने की फैक्ट्री थी, और वह अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए अक्सर छोटे-मोटे आयोजन किया करते रहते। वर्मा जी के पिता जी ने शहर में काफी बड़ी हवेली बनवाई और मंदिर के साथ ही धर्मशाला भी जहाँ हर पूर्णिमा … Read more

स्नेह का बंधन – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

मत रो बिटिया मां चली गई तो क्या हुआ बाबू जी तो है ,हम है मायके आती रहना इतना कहकर शकुन्तला ने दोनों बेटियों को गले लगा लिया और दोनों के हाथों में दस ,दस का एक-एक नोट रख दिया।और खुद भी आंसू पोंछने लगी। बिटिया जो आया है संसार में वाको तो एक दिन … Read more

दगड़ाबाई चा गुत्ता! – कुसुम अशोक सुराणा : Moral Stories in Hindi

अमावस की रात में झींगुरों की झीं-झीं के बिच, सूखे पत्तों को रौंद कर एक आवाज़ रात की ख़ामोशी को चीरती हुई दगडाबाई के कानों में गर्म शीशे सी पहुँची और कुछ ही पलों बाद उसे ऐसे लगा मानों कोई उसका पल्लू खींच रहा हैं! ऊँची-ऊँची घास के बिच एक्का-दुक्का ढाबों के आसपास हाइवे से … Read more

दहेज – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

सुधीर, सुधीर कहाँ हो? चिल्लाते हुए सीमा अपने पति के पास पहुंची,जो अपने दोस्तों से गप्पे लड़ा रहा था। उसे दोस्तों के साथ देखकर गुस्साते हुए बोली “कब से तुम्हें बुला रही हूँ, सुनाई नहीं दे रहा, बहरे हो? लगता है मेरे पापा ठगे गए है।” यह सुनकर सुधीर सीमा को आँखे दिखाते हुए बोला … Read more

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