पापा की शादी – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

प्रकाश जी 54 वर्ष के विधुर पति थे ।पेशे से इंजीनियर थे वो।दो साल से विधुर का जीवन बीता रहे थे वो।एक बेटी थी जिसकी पत्नी के जाने के बाद शादी हुई थी। बेटी एम बीए करने के दौरान साथ पढ़ने वाले सहपाठी मयंक को पसंद करती थी। मां को बेटी मेघा ने बताया था … Read more

रावण दहन – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

रावण दहन कर घर लौट रही थी सुमित्रा। रास्ते में छोटीसी गली हैं, जो सुनसान रहती है, लेकिन जल्द पहुंच जाते है। अचानक उसे किसी के चीखने की आवाज आई। बिल्कुल हल्की-सी। वहम समझ, कुछ उदासीनता ओढ़ वह आगे बढ़ने लगी। पांव हैं कि वहीं ठिठक गए। खुसर-पुसर की आवाज सुनकर वह उस दिशा में … Read more

वंचित – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

ललिता काफी देर से अपने बड़े भाई।ललित का इंतजार कर रही थी आज उसका जन्मदिन था उसका भाई हर साल उसके जन्मदिन पर हमेशा उसके लिए तोहफे  लेकर आ जाता था परंतु, इस बार ना तो वह उसके जन्मदिन पर आया और ना ही कुछ तोहफा भिजवाया तब कुछ देर इंतजार करके उसने फोन करके … Read more

संस्कार – एम.पी.सिंह : Moral Stories in Hindi

अनिल ओर सुनील, दोनो बचपन के दोस्त थे। इंजिनीरिंग करने के बाद अनिल अपने पिता के कारोबार में लग गया और सुनील मल्टी नेशनल कंपनी में नोकरी करने लगा। अनिल की शादी आशा से हुई और सुनील भी शादी में आया ओर उसे आशा की बहन सुमन पसंद आ गई। कुछ दिन बाद सुनील ने … Read more

घरौंदा – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

माता पिता निहाल हो रहे थे। सोच रहे थे, भले हमने कितना भी संघर्ष किया जीने के लिए, रोटी के लिए, घरौंदे को सजाने के लिए, हमारे बच्चों को, टीना और मोनेश को हमने सबकुछ दिया है। आज छत की चिंता है, न रोजी रोटी की। अमित जी का बहुत बडा व्यापार है। अनीता जी … Read more

रिश्ता – खुशी : Moral Stories in Hindi

नलिनी एक बड़े बिजनेस मेन की बीवी थी।उसका एक बेटा आदित्य था। नलिनी एक साधारण परिवार से संबंध रखती थी जिसमें उसके मां पिताजी और एक बहन गायत्री थी।नलिनी में यू तो बहुत खूबियां थी परंतु एक बुराई भी थी वो अपने दिमाग में जो सोच  या बात बिठा लेती उसे लगता की उसी की … Read more

” टका सा मुंह लेकर रह जाना ” – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

” भाभी, आपने अपनी बहू को बहुत छूट दे रखी है | जरा उसपर नजर रखो | ” माधुरी घर में घुसते हुए अपनी भाभी उषा से बोली |       ” अरे माधुरी, आओ बैठो | ऐसे क्यों बोल रही हो ? जरा बताओ तो क्या बात है? क्या किया है, मेरी बहू नूतन ने? ” … Read more

टका सा मुंह लेकर रह जाना – पूनम भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

अन्वी और सिद्धार्थ ने नई सोसाइटी में घर लिया तो सुधा जी अपने बेटे बहू के पास आ गई थी। बेटे बहू के ऑफिस जाने के बाद सुधा जी अकेली रहती तो जल्दी ही  पड़ोस वाली संध्या जी से उनकी दोस्ती हो गई। संध्या जी की एक बुरी आदत थी कि वह कभी भी कुछ … Read more

समझदारी – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

पैकर्स के गाड़ी की हॉर्न सुनकर दौड़कर  साढ़े तीन साल का सौरव बाहर आ गया ,देखिए दादाजी हमारी गाड़ी आ गई ,कहकर तालियाँ बजाने लगा ।  सुबोध जी  पोता को खुश होते देखकर भी खुश नहीं हो पाए । अनामिका दूसरे नम्बर की बहू है ,वो स्वभाव से बहुत अच्छी थी ,किंतु दीवार की शादी … Read more

बन्धन नेह का – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

इति एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रही थी।  उसका वर्क फ्रॉम होम चल रहा था। माता-पिता की इकलौती संतान होने के कारण बहुत ही नाजों से पली थी। बेटी विवाह योग्य होने पर  किसी भी माता-पिता का उसके विवाह के लिए चिंतित होना लाजिमी हैं। चाहे बेटी नौकरी करती हो, या घर में रहती … Read more

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