कंधों का होना   –  डॉ अंजना गर्ग

तनु को इस शहर में नौकरी ज्वाइन किए 2 साल होने को थे। मां बाबा के साथ वह तब से ही फ्रेंड्स कॉलोनी के फ्लैट में रह रही थी उसकी दुनिया दफ्तर और स्मार्टफोन तक सिमटी हुई थी। कई बार तनु की मां जय श्री उसे कहती कि आसपास वाले लोगों को कभी कभी मिला … Read more

अपनी पहचान – मीनाक्षी सिंह 

हमारे विद्यालय की आंगनवाड़ी की मैडम आज सुबह आयी ! और ये निमंत्रण पत्र देते हुए बोली ! मैडम बेटे की शादी हैँ ! आईयेगा ज़रूर पूरे परिवार के साथ ! घर के बुजूर्गों के नाम से तो हजारों  निमंत्रण देखें हैँ उनका नाम तो सदियों से समाज में प्रतिष्ठित होता हैँ !! बात तो … Read more

स्वाभिमान जाग उठा – संगीता त्रिपाठी 

छनाक…. आवाज सुन कर रमा जी भागी -भागी बाहर के कमरे में आई, जहाँ शीशे का गिलास कई भाग में टूटा पड़ा था। निगाहें कोने में गई, जहाँ पाखी आँखों में आँसू भरे थर -थर काँपती खड़ी थी। रमा जी समझ गई, आज फिर प्रसून और पाखी में झगड़ा हुआ।   “हड़बड़ी में कोई काम ठीक … Read more

दर्द की अधिकता ही दवा बन जाती है – लतिका श्रीवास्तव 

…..सारे समाचार पत्रों की सुर्खियों में थी वो आज…..मीडिया ने चटखारे लेते हुए उसके ऊपर लगे आरोपों को छापा  था….अचानक सबकी नजरों में वो निहायत घटिया भ्रष्ट कामचोर और फर्जी साबित हो गई थी…..उसके खासमखास भी उसके बारे में मनगढ़ंत फर्जी कहानियां यत्र यत्र सुना रहे थे मजे ले रहे थे ..! शमिता के लिए … Read more

“मनहूसियत” (भाग दो) – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा 

माँ,तुमने तो मेरे मूंह की बात कह डाली। मैं तो सोच रहा था पर हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था कहने की। आखिर किस तरह और कैसे कहता…समझ नहीं आ रहा था। चलो अच्छा हुआ तुमने मेरे मन की बात खुद ही कह दिया। छोटी को देख रिया भी खुश हो जायेगी।  मैं तीन टिकट … Read more

मानिनी  –   डॉ. सुनील शर्मा

” मानिनी और वह चली गई! हमारे यहां काम-काज करने वाले गणेशी की नवविवाहिता कुछ ही दिन विवाहोपरांत साथ रहने के बाद एक दिन चली गई मायके. लाख समझाने बुझाने तथा गणेशी के गिड़गिड़ाने का भी कुछ प्रभाव नहीं पड़ा उस मानिनी पर… पीछे मुड़कर देखती हूं तो यादों के पन्ने फड़फड़ाने लगे हैं. साफ … Read more

क्या आपके घर मे बाप भाई नही –  संगीता अग्ग्र्वाल

” जल्दी चल यार पिक्चर मिस हो गई ना तो तुझे छोडूंगी नही , हर बार इतना समय लगा देती है तैयार होने मे !” बस मे चढ़ती कृतिका अपनी दोस्त शानवी से बोली। ” अरे यार नही निकलेगी क्यो टेंशन ले रही है !” शानवी बोली और दोनो दोस्त बस मे चढ़ गई अपना … Read more

लड़कियां भी मना कर सकती है – गीता वाधवानी

आज अंजू जब कॉलेज से आई, तब उसने देखा कि उसकी दादी जी की सहेली रमा जी और उनकी बेटी राजू दीदी बैठी हुई है। वैसे तो राजू दीदी का नाम राजकुमारी था और सब उन्हें राजू ही कहते थे। उन्होंने बताया कि कल, बहुत वर्षों बाद राजू दीदी की बुआ जी अपनी पोती मीना … Read more

उपहार  –   संजय मृदुल

सुनो जी! इस दीवाली पर दूज के दिन भैया का जन्मदिन भी है कुछ अच्छा लेना है उनके लिए। अनु ने विनय से कहा। क्यों? पीछे से निलय की आवाज आई। क्यों गिफ्ट लेना है उनके लिए। साल में तीन बार तो ऐसे भी देते ही हो गिफ्ट। बदले में वो क्या देते हैं हम … Read more

सासू मां मेरी थाली पर ही नजर क्यों  – किरन विश्वकर्मा

रीतिका सारा काम करने के बाद खाने के लिए बैठी तो जैसे ही रोटी के टुकड़े में सब्जी लगाकर खाया तो उसे सब्जी अच्छी नही लगी वैसे भी परवल की सब्जी उसे पसंद नही थी मायके में होती तो किसी और चीज से रोटी खा लेती पर यह तो ससुराल था जहाँ पर अचार, देशी … Read more

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