सपनें खुली आँखों के – डॉ. पारुल अग्रवाल

आदित्य आज बहुत खुश था,आज उसे अपनी वर्षों की कठिन मेहनत और तपस्या का फल मिलने वाला था। इसी दिन की खातिर वो अपने परिवार से इतनी दूर अकेले रह रहा था। आज उसके खुली आंखों से देखे सपने पूरे होने वाले थे। उसने खुशी-खुशी ऑटो लिया और पहुंच गया फिल्म स्टूडियो में जहां प्रसिद्ध … Read more

 ‘ स्वाभिमान है, अभिमान नहीं ‘ – विभा गुप्ता

” विपिन, एक जगह बैठ नहीं सकते,तो चले जाओ यहाँ से।तूने तो मेरे नये कुरते का सत्यानाश कर डाला।” नितिन बाबू अपने छोटे भाई पर चिल्लाये जो अपनी बैसाखी के सहारे चलकर पानी पीने आया था,हाथ से गिलास छूट गया और पानी के कुछ छींटें उनके नये कुरते पर पड़ गये।फिर उन्होंने विपिन की पत्नी … Read more

आत्मसम्मान के साथ समझौता – कमलेश राणा

यश को जब मैंने पहली बार देखा था तब वो गोरा चिट्टा प्यारा सा शर्मीला सा 10-12 साल का बच्चा था,, जो मेरे सामने आने में भी शरमा रहा था और अपनी माँ के पीछे दुबका ही जा रहा था,, उसकी वो भाव भंगिमा आज भी मुझे वैसी ही याद है जैसे कल की ही … Read more

“पत्नी के स्वाभिमान से समझौता?कभी नहीं!” – कुमुद मोहन 

पापा! चुप रहिये! जब देखो आप रीमा को किसी ना किसी बात पर टोकते रहते हैं, वह बेचारी आगे से आगे दिन भर आप लोगों की खिदमत में लगी रहती है फिर भी आप लोगों को उसे सुनाऐ बिना चैन ही नहीं आता! विनय सुबह सुबह गुस्से से अपने पचहत्तर साल के पिता रमेश जी … Read more

अतीत – डा.मधु आंधीवाल 

सांची आज बहुत उदास थी । बीती बातें बीती यादें कभी कभी उसके मन को व्यथित करती थी । उसका बचपन कितने अभाव और कष्टों में गुजरा था । घर में बीमार मां और दो छोटे भाई बहन । बापू की बहुत छोटी सी पान की दुकान वह भी एक छोटे से गाँव में । … Read more

रघु की पीड़ा –     बालेश्वर गुप्ता

आज भी हमारे नगर में डॉ रघु को याद किया जाता है।हमारे पिता बताया करते कि डॉ रघु के हाथों में जादू था।नब्ज पकड़ कर रोग पहचान लेते और ऎसी दवाइयां देते कि मर्ज जड़ से ही खत्म हो जाता।नाम मात्र की राशि मे ही अपनी फीस के साथ दवाइयां भी दे देते थे।मजे की … Read more

स्वाभिमान – अनामिका मिश्रा 

रश्मि के पति को कैंसर हो गया था, उसके दो बच्चे थे। अपने पति को व तड़पते हुए देख रही थी। घर से बाहर के जो काम आज तक उसने न किए थे उसे समझ में नहीं आ रहा था,क्या करे।  बैंक से पैसे कैसे निकाले,डॉक्टर के पास शहर के बाहर जाना हो, टिकट कैसे … Read more

मेरे स्वाभिमान की कमाई  – रोनिता कुंडु 

सुनिए जी..! आज रवि का बोर्ड का रिजल्ट आया है… और वह बहुत अच्छे नंबरों से पास हुआ है…. आशिमा ने ऑफिस से लौटे अपने पति कपिल से अपने भाई रवि के बारे में कहा.. कपिल:  हम्म….अच्छा…. कहकर बाथरूम में घुस गया… जब कपिल बाथरूम से बाहर निकलता है… आशिमा:   वह मैंने उससे कहा … Read more

 प्यार या स्वाभिमान – बेला पुनिवाला

  आज मैं उसी स्कूल के करीब से गुज़र रहा था, जहाँ से आराध्या के साथ मेरी ज़िंदगी की शुरुआत हुई थी। बीते हुए वह लम्हें जिसे हम चाहकर भी कभी भुला नहीं पाते और मैं खुद भी उस पल कुछ देर के लिए वहीं रुक गया और उन बीते किताब के पन्नों को फ़िर से … Read more

स्वाभिमानी बालिका – कांता नेगी 

सुजाता एक नन्ही बालिका थी,जिसकी उम्र मात्र दस साल थी।उसके पिता काम के सिलसिले मे अपने मित्र के साथ दूसरे गांव गए तो थे पर अभी तक वापस नही आए थे। मां पास के जंगल से घास काटकर लाती और उसे बेचकर जो पैसे मिलते उसी से गुजर -बसर हो रही थी। सुजाता के घर … Read more

error: Content is protected !!