कौन तुम्हें यूं प्यार करेगा – रजनी श्रीवास्तव “अनंता”

“क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती?” मीरा का हाथ अपने हाथों में लेकर समीर ने थोड़ा उदास होते हुए पूछा। “करती हूं, तुमसे कौन प्यार नहीं करेगा? तुम एक बेहतरीन इंसान हो!”  मीरा ने प्यार से समीर की तरफ देखा और धीरे से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली। “मगर समीर मैं खुद से बहुत ज्यादा … Read more

मत कुचलो स्वाभिमान – ऋतु अग्रवाल 

  अनीता आज बहुत खुश थी। कोरोनावायरस में लगा लॉकडाउन समाप्ति पर था। यह छह-सात महीनों का लंबा अंतराल उसने कैसे काटा है, वहीं जानती है। लॉक डाउन के चलते लोगों ने अपने घरेलू सहायकों को सेवानिवृत्ति दे दी थी। कोई भी अपने घर में बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति देकर खतरे में नहीं आना … Read more

 जब तक जियो स्वाभिमान के साथ जियो –   संगीता अग्ग्र्वाल

क्या बात है स्मिता जी आप आजकल पार्क नहीं आ रहीं ?” नंदिता ने अपनी पार्क में मिलने वाली मित्र के घर आकर पूछा। ” बस नंदिता जी थोड़ा तबियत नासाज चल रही आजकल !” स्मिता ने बुझे स्वर में कहा। ” हाँ थोड़ा मौसम और थोड़ा उम्र का तकाजा भी तो है मेरी तबियत … Read more

अभी तो बेटी बाप की है। –  अनु अग्रवाल

“ये लड़की भी न………ब्याह को बस कुछ ही दिन रह गए हैं……और ये अभी तक घोड़े बेचकर सो रही है……भगवान जाने क्या होगा इसका तो”- सुलक्षणा जी सुबह-सुबह गौरी के कमरे की खिड़की खोलते हुए बोले जा रहीं थीं। “माँ मैं ये शादी नहीं कर सकती”-जैसे ही गौरी के ये शब्द सुलक्षणा जी के कान … Read more

सम्मान की सूखी रोटी  –  सविता गोयल

बहू……., तेरे ससुर जी की खिचड़ी में थोड़ा और घी डाल दे ….. वो ऐसी लुखी खिचड़ी नहीं खा पाते। आशा जी प्यार से समझाते हुए अपनी बहू संध्या से बोलीं। संध्या ने कुढ़ते हुए एक चम्मच घी खिचड़ी में डाल दिया लीजिए.. डाल दिया घी… और भी कुछ डालना हो तो बता देना… वैसे … Read more

स्वाभिमान – सरिता सिंह 

#स्वाभिमान “समझते क्या हो प्रकाश ? क्या मेरे प्रेम,मेरे विश्वास की कोई कीमत नहीं ,तुम्हारे लिए?” “क्या नहीं किया मैंने तुम्हारे लिए?अपने घर वालों तक से दुश्मनी ले ली। सबकुछ किया तुम्हारे लिए।क्या इस दिन के लिए?” सलोनी ये कहकर रोने लगी। प्रकाश सलोनी को पहली बार ऊंची आवाज़ में बातें करते देख तिलमिला सा … Read more

मैं अपने घरवालों के सामने कोई नाजायज़ मांग नहीं रख सकती –  शीनम सिंह

“अमित अपने ससुराल वालों से मदद मांगने में कैसी शर्म?? तू दामाद हैं उस घर का,आखिर उनका भी कोई फर्ज़ हैं तेरे लिए,4 पैसों की मदद कर देंगे तो वो गरीब नहीं हो जायेंगे,अब तू अपने भाई को ही देख ले जब भी पैसे की जरूरत होती हैं वो बेझिझक अपने ससुराल वालों से मांग … Read more

स्वाभिमान मेरी दौलत है –  पुष्पा जोशी

“मैं विनोद से क्षमा नहीं मानूंगा, क्षमा किस बात के लिए मांगू जब मैंने कोई अपराध किया ही नहीं.” किशोर ने दृढ़ शब्दों में अपनी बात दयाल सर से कही. ‘बेटा तुम्हारा दोष है या नहीं, मैं नहीं जानता. मैं उस समय वहाँ मौजूद नहीं था, मैं तीन दिन का अवकाश पूरा करके आज विद्यालय … Read more

छलावा  –  रीटा मक्कड़

मीना को समझ नही आ रहा था कि आजकल राजीव के मन मे क्या चल रहा है। उसको ऐसा लग रहा था कि आजकल राजीव उस पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगे हैं। उसके साथ समय बिताने के बहाने ढूंढते रहते हैं।उसने खाना टाइम से खा लिया कि नही।उसको कुछ चाहिए तो नही। दिमाग … Read more

मर्द होने का अहम तुम्हारे अन्दर भी है!  – मनीषा भरतीया

ओफ! हो राजीव इस बार फिर तुम्हारा चेक बाउंस हो गया और ₹600 तुम्हारे अकाउंट से कट गए| अगर तुम किश्त कटने के पहले अकाउंट में पैसे डाल देते तो ये नौबत नहीं आती| तुम्हें थोड़ा ध्यान देना चाहिए था| सारा दिन तुम कितनी मेहनत करते हो तब जाकर कहीं घर का घर का खर्च … Read more

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