कागज़ के रिश्तें – निभा राजीव निर्वि
मीरा ने कार का दरवाज़ा बंद किया और एक गहरी सांस ली। सामने फैमिली कोर्ट की वो पुरानी, मटमैली इमारत खड़ी थी, जहाँ हर रोज़ न जाने कितने रिश्ते फाइलों में दफ़न हो जाते थे। आज उसकी बारी थी। मीरा के पिता, मिस्टर शर्मा, ने उसका हाथ थाम रखा था, मानो उसे गिरने से बचा … Read more