“नहीं चाहिए भीख के पैसे!” – बालेश्वर गुप्ता
राघव एक प्रतिभाशाली मूर्तिकार था। उसकी उंगलियों में वो जादू था जो गीली मिट्टी में भी प्राण फूँक देता था। लेकिन कला की कद्र और पेट की भूख के बीच का फासला अक्सर बहुत लंबा होता है। उसके पिता, दीनानाथ जी, पुराने ज़माने के कारीगर थे जिन्होंने पूरी ज़िंदगी अभावों में गुजारी थी, लेकिन अपनी … Read more