छलावा: एक खूबसूरत धोखे की दास्तान

सुमन के हाथ से चाय का कप छलकते-छलकते बचा। उसने अपनी घबराहट को छुपाते हुए विषय बदल दिया, लेकिन उसके दिमाग में जैसे एक बवंडर उठ खड़ा हुआ था। घर लौटते समय रास्ते भर उसके दिमाग में श्रुति की कही बातें, वो लैपटॉप बैग, राजीव का बार-बार टूर पर जाना, सब कुछ एक फिल्म की … Read more

रिश्तों की असली वसीयत

 रामदीन जी मुस्कुराए और मुझे अपने पास बैठाते हुए बोले, “मैंने यह मकान एक ट्रस्ट को दान कर दिया है, मित्र। मेरे जाने के बाद यह पूरी तरह से अनाथ बच्चों का आश्रय स्थल बन जाएगा। और हां, जो पीछे वाला हिस्सा था, जिसे मैंने राघव को किराये पर दिया था, वो मैंने उसके नाम … Read more

वक्त का आइना

 लेकिन समय का पहिया हमेशा एक सी गति से नहीं चलता। जिंदगी ने अपनी करवट बदली। विक्रम को अचानक दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनका देहांत हो गया। विक्रम के जाने के बाद, नंदिनी का साम्राज्य जैसे ढह गया। वह घर, जिसे उन्होंने दुनिया के सबसे महंगे मार्बल और झूमरों … Read more

रजत की झंकार

 माँ की बातें समीर के दिल में किसी तीर की तरह चुभ गईं। उसे अचानक एहसास हुआ कि पिछले कई महीनों से नंदिनी ने उससे कोई ज़िद नहीं की, वो पहले की तरह खिलखिला कर नहीं हंसी। उसने अपनी पत्नी को एक मशीन की तरह घर का काम करते हुए तो देखा, लेकिन उसकी आत्मा … Read more

स्मृतियों का आँगन: एक बेटी का भ्रम

 निशा जब महज़ आठ वर्ष की थी, तब एक भीषण सड़क दुर्घटना ने उससे उसके माता-पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया था। नियति का यह आघात इतना गहरा था कि उस नन्ही सी जान को समझ ही नहीं आया कि उसकी दुनिया अब हमेशा के लिए वीरान हो चुकी है। ऐसे अंधकारमय समय … Read more

नींव के पत्थर: एक बेटी के सपनों की उड़ान

“तुम्हारे सपने शादी के साथ ही खत्म हो जाने चाहिए थे स्मिता ,” समीर ने कठोरता से कहा। उनकी ये बहस बाहर तक सुनाई दे रही थी। स्मिता  की सास, सुमित्रा देवी, भी वहाँ आ गईं। जब उन्हें पता चला कि बहू बाहर जाकर काम करना चाहती है, तो उन्होंने भी आसमान सिर पर उठा … Read more

अधूरी चौखट

 “मुझे आपकी दौलत या आपके रुतबे से कोई मतलब नहीं है ठाकुर साहब,” समर की आवाज में एक अजीब सी दृढ़ता और दर्द था। “मैं बस इतना बताने के लिए फोन कर रहा हूँ कि जिस बेटी को आपने अपनी झूठी शान के लिए मृत मान लिया था, वो आज सच में मौत के दरवाजे … Read more

आजादी के सही मायने और जुनून – डॉ बीना कुण्डलिया 

दूर से आती मधुर संगीत की धुन..सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा हम बुलबुलें है इसकी ये गुलिस्तां हमारा। सुबह सुबह भारती के कानों में जैसे ही आवाज गूंजी वो झटपट बिस्तर से उठ बैठी सामने घड़ी सात बजे का समय दिया रही थी। अरे बाप रे बाप सात बज गये उसको तो नौ बजे … Read more

बेनाम रिश्ते का बोझ

पिछले तीन दिनों से घर में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। यह खामोशी घर की दीवारों में नहीं, बल्कि स्नेहा के स्वभाव में थी। स्नेहा, जो पूरे घर की जान थी, जिसकी चहचहाहट से सुबह होती थी और जिसकी हंसी पर पूरा परिवार निहाल रहता था, वो अब एक बुझी हुई मोमबत्ती की … Read more

सांवली सी वो

 मीरा दीदी की पुरानी संदूकची को साफ करते हुए आज मेरे हाथ में एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर लग गई। तस्वीर पर जमी धूल को मैंने अपने दुपट्टे के कोने से साफ किया, तो उसमें से दो चेहरे उभर कर सामने आए। एक तरफ मेरी बड़ी बहन कावेरी थी, और उनके ठीक बगल में … Read more

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